भाई जी राधेश्याम चांडक

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सहकारिता के प्रति हमेशा से नकारात्मक सोच रही है। यदि ऐसी सोच रखने वाले लोग बुलढाणा अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी की सेवा को एक बार देख लें, तो कहेंगे की आम व्यक्ति के जीवन स्तर को सुधारने का सहकारिता को एक आंदोलन का रूप देकर इस संस्था को इस गौरवशाली मुकाम तक पहुंचाने का श्रेय है, इसके संस्थापक भाई जी राधेश्याम चांडक को। श्री माहेश्वरी टाइम्स उनकी इस सेवाओं को नमन करते हुए सहकारिता में योगदान के लिए सम्मानित कर रही है, “माहेश्वरी ऑफ़ द ईयर 2017 ” के सम्मान से।

जब भी देश के सहकारिता आंदोलन का इतिहास लिखा जाएगा तो उसमे बुलढाणा निवासी भाई जी राधेश्याम चांडक का नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। कारण है उनके दिमाग व मन की कोमल भावनाओं की सोच की उपज “बुलढाणा अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी”। इसकी शुरुआत तो एक छोटे से पौधे के रूप में हुई थी लेकिन वर्तमान में यह संस्था न सिर्फ देश बल्कि सम्पूर्ण एशिया की सबसे बड़ी सहकारी समिति बन चुकी है।

इसका लक्ष्य था, ऐसे लोगों की आर्थिक सहायता करना जिन्हे किसी बैंक से ऋण प्राप्त नहीं होता और महाजनो के चक्कर में फसने के सिवा जिनके पास कोई रास्ता ही नहीं होता। संस्था की सेवा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है की उसने ऐसे सजायाफ्ता लोगों की भी ऋण देकर आर्थिक मदद की है, जिनका कोई मददगार नहीं होता। यही कारण है की अपने इन योगदानों से श्री चांडक की स्थिति ठीक वैसी बन गई की “जिसका कोई नहीं उसके भाईजी हैं।”

ऐसे हुई थी शुरुआत:

भाईजी राधेश्याम चांडक स्वयं के अपने जीवन की शुरुआत आर्थिक परेशानियों से हुई थी। अतः उन्होंने आमव्यक्ति की तकलीफ को अत्यंत निकट से देखा। अतः आम व्यक्ति के विकास के लिये सहकारिता के महत्व को समझ श्री चांडक ने इस आंदोलन का शेष महाराष्ट्र में नेतृत्व करने की ठान ली और जून 1986 में बुलढाणा अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी की स्थापना बुलढाणा में की। वैसे तो उनसे पूर्व भी कई लोगों ने सहकारिता आंदोलन की बागडोर संभाली लेकिन सभी असफल हो गए। अतः उनके इस प्रयास को भी लोगों ने दुस्साहस नाम ही दिया।

अपनी लोकप्रियता के कारण लोगों के बीच भाईजी के नाम से जाने-जाने वाले श्री राधेश्याम चांडक ने लोगों के विश्वास को अपना आधार बनाया और कार्य के प्रति समर्पण, योग्यता व अनुशासन को शक्ति और अपने प्रयासों को प्रारम्भ कर दिया। उनकी तीक्ष्ण बुद्धि, भावनात्मक जनसम्पर्क व मेहनत पर विश्वास ने उन्हें सफलता के मार्ग पर ऐसा अग्रसर किया की उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

एक बीज रूप में प्रारम्भ “बुलढाणा अर्बन को-ऑपरेटिव सोसाइटी” धीरे-धीरे एक ऐसा वटवृक्ष बनती चली गई जिसकी छाँव में सोसाइटी के लगभग डेढ़ लाख से अधिक सदस्य आर्थिक उन्नयन की ओर अग्रसर हो रहें हैं। इस सोसाइटी की शुरुआत उन्होंने मात्र एक शाखा से 72 सदस्य व 12000 रूपए की कुल पूँजी से की थी।

वर्तमान में सेवा की वटवृक्ष:

एक छोटे से पौधे के रूप में स्थापित सोसाइटी आज किस तरह सेवा का वटवृक्ष बन चुकी है, इसका अंदाजा आप उसकी वर्तमान स्थिति से लगा सकते हैं। वर्तमान में सोसाइटी का 9 हज़ार करोड़ रूपए से अधिक व्यवसाय, 5500 करोड़ से अधिक जमा, 4 से 5 हज़ार करोड़ से अधिक की ऋण देयता, 7 लाख 50 हज़ार से अधिक सदस्य, 405 से अधिक शाखाएं व 6000 से अधिक समर्पित कर्मचारी हैं। सोसाइटी कितने वृहद स्तर पर कार्यरत है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसकी सेवा का क्षेत्र लगभग 420 वर्ग कि मी से अधिक है।

650 करोड़ स्थायी संपत्ति बुलढाणा अर्बन के पास होकर सात राज्यों में सहकारिता का बुलढाणा अर्बन ने विस्तार कर जमधारकों कि पूँजी एवं विश्वास को कायम रखने का श्रेय भाईजी को जाता है। सोसाइटी वर्तमान में राष्ट्रीयकृत बैंकों कि तरह एटीएम सहित समस्त उच्च स्तरीय बैंकिंग सुविधा दे रही है। इसकी सेवा भी अब सिर्फ सोशल बैंकिंग तक सीमित नहीं रही बल्कि उसके सेवा के क्षेत्र भी वृहद हो चुके हैं।

लोगों का आर्थिक विकास ही सपना:

सोसाइटी अब कई सेवा संस्थाओं के साथ ही 300 से अधिक वेयर हाउस, टोल प्लाज़ा, ग्रेन क्लीनिंग व ग्रेडिंग यूनिट, 21 स्कूल, विभिन्न तीर्थ स्थानों पर 3 भक्त निवास, होस्टल, ओल्ड ऐज होम्स, एग्रीकल्चर लैब व इंस्टूमेंट बैंक, स्पिनिंग मिल, फार्मास्यूटिकल कंपनी, काऊ शेल्टर, मिनरल वाटर प्लांट, वैदिक विद्यालय, रेजीडेंसी होटल आदि का संचालन कर रही है।

लक्ष्य यही है कि लोगों को अधिक से अधिक रोज़गार प्रदान करना और वह भी सम्मानजनक ढंग से। वास्तव में वह हुआ भी सोसाइटी के जितने कर्मचारी हैं, उन्हें शासकीय कर्मचारियों से अधिक सुविधाएं मिलती हैं। सोसाइटी के 10 प्रतिशत शेयर्स इनके लिये ही हैं, जिससे ये भी संस्था के लाभ के सीधे-सीधे हिस्सेदार हैं। संस्था सदस्यों को स्वास्थ्य सुविधा के साथ ही न्यूनतम मूल्य पर आवास सुविधा भी उपलब्ध करवाती है।

कई संस्थाओं को सेवा:

भाईजी राधेश्याम चांडक सिर्फ बुलढाणा अर्बन को ऑपरेटिव सोसाइटी को ही अध्यक्ष के रूप में सेवा नहीं दे रहें हैं, बल्कि इनमे कई अन्य संस्थाएं भी शामिल हैं। भाईजी राधेश्याम चांडक बुलढाणा अर्बन चैरिटेबल सोसाइटी, बुलढाणा अर्बन को ऑपरेटिव ई-कंस्यूमर स्टोर्स, श्री संभाजी राजे विद्यालय डोंगर खंडाला, श्री अम्बादेवी संस्था तारापुर जिला बुलढाणा, गुड डे बैडमिंटन क्लब बुलढाणा, बुलढाणा डिस्ट्रिक्ट हॉकी एसोसिएशन, बुलढाणा क्लब, बुलढाणा डिस्ट्रिक्ट टेबल टेनिस एसोसिएशन, बुलढाणा डिस्ट्रिक्ट शूटिंग बॉल एसोसिएशन बुलढाणा शाखा आदि को अध्यक्ष के रूप में सेवा प्रदान कर रहें हैं और भी कई ऐसी सेवा संस्थाएं हैं, जिनके माध्यम से सेवा की वृहद यात्रा चली है।

भाईजी के प्रयास से रेलवे आरक्षण, नेत्र शिविर व डायग्नोस्टिक्स सेंटर, निः शक्तों के लिये ट्राईसाइकिल, कैलिपर्स व अन्य सहायक उपकरण वितरण निः शुल्क एम्बुलेंस सुविधा आदि का संचालन किया जा रहा है। उनकी संस्थाओं ने कई ग्रामों को गोद लेकर उनमे विकास यात्रा प्रारम्भ की। यहाँ तक की ऊर्जा के क्षेत्र में भी प्राकृतिक साधनों से ग्रामों को आत्मनिर्भर किया।

बुलढाणा शहर के लिये पेयजल आपूर्ति के एक मात्र बाँध के रखरखाव में भी उनकी सोसाइटी अहम भूमिका निभा रही है।

सेवा ने दिलाया सम्मान:

भाईजी की सेवाओं का वास्तविक प्रतिफल तो उनका आत्मसंतोष ही है, लेकिन उनकी सेवा ने प्रत्यक्ष रूप से उन्हें सम्मानित भी करवाया जबकि उन्होंने इसकी उपेक्षा कभी नहीं की। विगत वर्ष शिरडी में आयोजित “इंटरनेशनल को-ऑपरेटिव कांफ्रेंस” में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चवान के हाथों “जीवन गौरव अवार्ड” से सम्मानित किया गया।

इसके साथ ही भाईजी पद्मश्री स्व विट्ठलराव विरवे पाटिल महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव एग्रो इनोवेशन अवार्ड-2001 , पद्मश्री डॉ माणिकभाई देसाई नेशनल सर्विस अवार्ड-2002 , सहकार सेवाश्री अवार्ड- 2004 , विशेष समाजसेवा के लिए “जागृति अवार्ड” शिक्षा आर्थिक विकास, समाजसेवा, संस्कृति व उद्योग कार्य के लिए “जानिव – 2005 अवार्ड” अभा छाबा मराठा एसोसिएशन के “मराठा मित्र अवार्ड”, महाराष्ट्र स्टेट मराठी पत्रकार संघ के “बाल शास्त्री जाम्भेकर” स्वामी स्वरूपानंद संस्था के “सहकार तपस्या अवार्ड”, जीजा माता सावित्री ट्रस्ट के “फूले साहू आंबेडकर अवार्ड – 2008 ” शिक्षा व समाजसेवा के लिए “स्व सुवालालजी वाकेकर समाजभूषण अवार्ड” छत्रपति शिवाजी बहुजन मित्र संस्था के “छत्रपति शिवाजी बहुजन मित्र अवार्ड” संस्था एनएएफसीयूबी के “केपकॉन 2007 अवार्ड” “समाज भूषण 2006 -07 ” आदि सम्मानों से सम्मानित हो चुकें हैं।

आम जनता के हर कदम पर साथ:

सेवाभाव में समर्पित बुलढाणा अर्बन का मुख्य उद्देश्य आम जनता की ज़्यादा से ज़्यादा सहायता कर उन्हें एक मानवबद्ध सामाजिक श्रृंखला में जोड़ना ये भाईजी की दूरगामी सोच थी जो बहुत हद तक सफल हो चुकी है। नोटबंदी के दरम्यान सहकारिता क्षेत्र में धोखाधड़ी की स्थिति निर्मित होने पर भी बुलढाणा अर्बन एक वटवृक्ष की तरह खड़ी है। अपने सदस्यों द्वारा दिखाया गया विश्वास ही अपनी सफलता की पूँजी है, ऐसा भाईजी मार्गदर्शन में कहते हैं।

पर्यावरण के बारे में सचेत होकर उन्ही के द्वारा बुलढाणा शहर में विगत 3 वर्षों से स्वच्छ अभियान चलाया जा रहा है। स्वच्छ बुलढाणा शुद्ध बुलढाणा का सपना बुलढाणा में लगभग पूरा हो चुका है। भाईजी द्वारा देशहित की रक्षा में शहीद हुए जवान के बच्चों को शिक्षा का खर्च भी उठाया जा रहा है। भाईजी बुलढाणा के साथ-साथ पूरे महाराष्ट्र की शान वास्तव में भाईजी ही हैं।

हर व्यक्ति के भाई अत्यंत सरल सहज। इतनी बड़ी संस्था के अध्यक्ष रहते हुए भी आज भी इनसे मिलने के लिए अपॉइंटमेंट लेने की ज़रूरत नहीं होती। आम आदमी की तरह रहकर किसी की सहायता करने को ही वे जीवन का आनंद मानते हैं।


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