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कोशिश, पुरजोर पर क्यों असफल रहते पौधरोपण अभियान

प्रतिवर्ष समाज संगठनो द्वारा जोर-शोर से पौधरोपण किया जाता है। इनके समाचारों से समाचार-पत्र इस तरह भरे होते है, जैसे कुछ ही वर्षों में संपूर्ण क्षेत्र वन से घिर जायेगा। लेकिन हकीकत ये है की हरियाली बढ़ नहीं रही है, बल्कि दिनों-दिन और भी कम हो रही है अतः यह चिंतनीय है की ऐसा क्यों हो रहा है? क्या पौधरोपण करके समाचार पत्रों में फोटो छपवाकर समाज संगठनो की जिम्मेदारी पूर्ण हो जाती है? आखिर पौधरोपण में उनकी भूमिका क्या होनी चाहिए? वर्त्तमान दौर में पर्यावरण संरक्षण संपूर्ण राष्ट्र ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए चुनौती बन गया है। आइये जाने इस ज्वलंत विषय पर स्तम्भ की प्रभारी मालेगांव निवासी सुमिता मूंदड़ा से उनके व समाज के प्रबुद्धजनों के विचार।

“देखरेख का भी लें संकल्प”- सुमिता मुंधड़ा, नागपुर

सभी को विदित है की अधिकांशतः विभिन्न सामाजिक संगठनो द्वारा आयोजित पौधरोपण अभियान महज एक दिखावा मात्र ही होता है। श्री माहेश्वरी टाइम्स पत्रिका का धन्यवाद देना चाहूंगी की मत सम्मत के ज़रिये मुझे सबकी राय जगजाहिर करने का अवसर मिला है। आज मशीनी युग में हम इंसानो के लिए अपनी साँसों को बचाये रखने एवं स्वस्थ जीवनयापन करने के लिए सर्वाधिक आवश्यक कार्य है पर्यावरण का संरक्षण। भारत में विभिन्न पर्यावरण जागरूक अभियान भी चल रहे हैं जिसके तहत पौधरोपण किया जाता है, पर इसका पूर्ण लाभ नहीं मिलता। कारण स्पष्ट है की पौधों का रोपण तो किया जाता है पर पोषण नहीं किया जाता। बस अपनी तसल्ली या लोकदिखावे के लिए हम पर्यावरण-पौधरोपण अभियान में जुड़ते है, नए-नए पेड़ लगाते हैं, तस्वीरें खिचवाते हैं, सोशल मीडिया पर बढ़-चढ़कर तस्वीरों के साथ अपना प्रचार-प्रसार भी करते हैं, लोगों की वाह-वाही भी बटोरतें हैं, और पर्यावरण रक्षण की जिम्मेदारी को पूर्ण मानते हैं। एक बार भी अपने हाथों से आरोपित बीज/डाली को मुड़कर भी नहीं देखते की वाकई में वह प्रफुल्लित हो भी रही है या नहीं? सच तो यह है की इक्के-दुक्के पौधरोपण स्थल को छोड़कर किसी भी रोपित बीज से एक अंकुर तक नहीं फूटता तो पेड़ क्या खाक लगेंगे? क्या सिर्फ पौधे लगाने या बीज आरोपित करने तक ही हमारी ज़िम्मेदारी थी? आरोपित करने के बाद उसकी देख-रेख क्या प्रकृति की ज़िम्मेदारी है? क्या हम अपने नवजात बच्चों को भी जन्म देकर भगवान् भरोसे छोड़ देते हैं? हमें प्रकृति के इन सवालों का समाधान कर पर्यावरण के लिए अपने दायित्वों को पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाने के लिए दृहसंकल्प लेना होगा, तभी हमारा प्राकृतिक ऋण भी उतरेगा। सामाजिक संस्थानों को अपना बहुमूल्य समय देकर बीज को आरोपित कर प्रफुल्लित होने तक की ज़िम्मेदारी को उठाना होगा जिससे हम सही मायने में पौधरोपण अभियान में सफल हो पाएंगे।

योजनाबद्ध तय करें देखरेख – राजेश कोठरी, सूरत

पौधारोपण एक सही दिशा और उचित कदम है। हमें पौधरोपण से लेकर विकास तक की भूमिका को अदा करना होगा। पौधारोपण से लेकर उनके रख-रखाव, वृद्धि तक पर, ताकि हरियाली बढे। उस पर जोर देना होगा। हमें दिशा की ओर आगे बढ़ना होगा। पौधारोपण के साथ पौधे को पानी पिलाने की ज़िम्मेदारी भी लें। उसका रखरखाव कैसे हो इसके लिए संसाधनों पर भी वचनबद्धता हो। समय-समय पर उचित देख-रेख की व्यवस्था हो। उचित एजेंसी को पौधारोपण के बाद उसके विकास की जवाबदारी दें। तब हम पर्यावरण में देखेंगे नया परिणाम।

काम कम, प्रचार-प्रसार अधिक- पीसी राठी (पूर्व अपर कलेक्टर), इंदौर:

हमारे देश में जनसेवा, समाजसेवा व राष्ट्रसेवा के क्षेत्र में जितना कार्य शासन एवं निजी स्तर पर किया जाता है, उसका प्रचार-प्रसार उससे कई गुना अधिक किया जाता है। काम काम और दिखावा ज़्यादा होता है। फोटो में जितना पौधरोपण दिखाया जाता है, यही ज़मीन पर इतना पौधरोपण सफल हो जाता तो आज भारत की तस्वीर ही बदल जाती। आपने भी फोटो सहित सुझाव शायद इसलिए बुलवाये हैं की बगैर फोटो छपाये लोग विचार भेजना भी पसंद नहीं करते हैं। पौधारोपण करना जितना सरल है, पौधो की परवरिश कर वृक्ष बनाना उतना ही दुष्कर है। बाद की देखरेख के अभाव में 95 प्रतिशत पौधारोपण नष्ट हो जाता है। पौधारोपण करने के बाद की ज़िम्मेदारी का निर्वहन नहीं करने वालों के लिए वृक्षों की अवैध कटाई के समान दंड का प्रावधान होना चाहिए। मेरा सुझाव है की पौधारोपण के अनिवार्यता संबंधी विधिक प्रावधान किये जाएं। स्वच्छता अभियान के समान प्रोत्साहन व पुरस्कार की घोषणा हो। समाचार पत्र, टीवी चैनल, सोशल मीडिया आदि द्वारा पर्यावरण संरक्षण को प्रमुख चुनौती मानकर प्रयास नहीं किये गए तो परिणाम गंभीर होंगे।

संरक्षण की ज़िम्मेदारी भी लें- डॉ.राधेश्याम लाहोटी(अध्यक्ष-माहेश्वरी युवा संगठन), नौखा:

आजकल हर वर्ष हम मानसून सीजन में देखते है की पौधारोपण के प्रति लोगों का उत्साह बढ़ा है। आम जनता पहले से अधिक जागरूक भी हुई है। कई सामाजिक संगठनो द्वारा भी समय-समय पर कैंपेन चलाये जाते हैं। सोशल मीडिया के अत्याधिक प्रयोग ने आमजन में अलख ज़रूर जगाई है। लेकिन अफ़सोस हम सिर्फ पौधे के साथ फोटो खिंचवाकर ‘साँसे हो रही कम,आओ पेड़ लगाए हम’ जैसे स्लोगन के साथ उसको सोशल मीडिया पर अपलोड करके या अखबार में फोटो व न्यूज़ देकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं। अतः हमारी पुरज़ोर कोशिश भी परिणाम नहीं ला पा रही है। हर वर्ष देश भर में लाखों की संख्या में नए पौधे लगाए जाते हैं लेकिन देखभाल व संभाल के अभाव में गिने-चुने पौधे ही पनप पाते हैं। हमारे द्वारा लगाए गए पौधों में से 10 प्रतिशत भी अगर बड़े पेड़ का आकार लें सके तो यह अम्बर झूम उठेगा और यह धरती खिलखिला उठेगी। पूरे विश्व में पेड़ों की कटाई के कारण धरती का तापमान 45 से 50 डिग्री तक पहुंच गया है। अगर अब भी हम नहीं चेते तो हमारी आने वाली पीढ़ी स्वस्थ हवा के लिए तरसेगी। अपने बच्चों के भविष्य के लिए लाखों-करोड़ों रूपए जोड़ो या नहीं, कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन उनके स्वस्थ भविष्य के लिए अपने हाथों से एक पेड़ ज़रूर लगाना होगा। हमारे परिवार का प्रत्येक सदस्य एक पौधा लगाए व अपने बच्चे की तरह उनकी परवरिश और सार संभाल करने का संकल्प भी लें।

तकनीकी जानकारी भी ज़रूरी- शरद गोपीदास बागड़ी, नागपुर:

प्रकृति, पर्यावरण का संरक्षण करना हर प्राणी, जीव जंतु के हित में है। हम अगर गहराईयों से अध्ययन करें तो पाएंगे की प्रकृति अपने आप में बराबर संतुलन बनाकर चलती है। प्रकृति ने हर जीव-जंतु- प्राणी, पेड़-पौधे के रहने, खाने, पीने, फूलने, फलने, जीने की व्यवस्था कर रखी है, जो अपने आप में संतुलन बनाए रखती है। मनुष्य प्रकृति से छेड़छाड़ कर उसे सतत असंतुलित कर रहा है। अभी कुछ सालों से पौधारोपण की मुहीम बहुत ज़ोर-शोर से चलाई जाने के बाद भी पेड़ो की संख्या बढ़ने के बजाए घटती जा रही है। इसका मुख्य कारण पौधारोपण मुहीम एक भेड़चाल, बिना किसी सोचे-समझे की जा रही है। संस्थाए अपना लक्ष्य पूरा करने, फोटो खिचवाने व नाम कमाने की होड़ में गड्ढे खुदवाकर उसमे आनन्-फानन पौधे लगा कर उसे भूल जाती है। पौधारोपण जितना ज़रूरी है उससे ज़्यादा ज़रूरी होता है पौधारोपण करने की सही जानकारी होना। साथ में यह जानना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है की कौन से पौधे किस मिट्टी व किस ज़मीन के लिए फायदेमंद होते हैं। सही फायदा तभी होगा जब पौधारोपण सही जानकारी के साथ सही मार्गदर्शन में किया जायेगा।

परिवार की तरह सहेजें- डॉ. श्रीमती सूरज माहेश्वरी,जोधपुर:

पौधारोपण आज की पहली ज़रूरत है। इसका जोर-शोर तो आजकल काफी दिखाई देता है लेकिन कई बार यह अखबार, सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरने तक ही सीमित रह जाता है। जैसे पौधे लगाने के कार्य को प्रभावी ढंग से करने की आवश्यकता है वैसे ही इन्हें परिवार की तरह सहेजने की ज़रूरत है। उचित सिंचाई व्यवस्था, उर्वरक का सावधानी से प्रयोग, आधुनिक तरीके से एवं ट्री गार्ड से संरक्षण, ‘चेतना-समितियों’ का गठन जैसे उल्लेखनीय प्रयास ज़रूरी है। जन्मदिन पर, शुभ कार्यों पर पौधारोपण एवं सार-संभाल को एक उदात्त सांस्कृतिक दायित्व के तौर पर लेना चाहिए।

अनाथ छोड़ दिए जाते है पौधे- संजय जागेटिया(मंत्री शास्त्री नगर माहेश्वरी सभा), भीलवाड़ा(राजस्थान):

वर्त्तमान में विभिन्न सामाजिक संगठनो द्वारा ज़ोर-शोर से पौधारोपण एवं वितरण का कार्य सभी के ज़हन में कूट-कूटकर भरा हुआ है। ऐसा होना भी चाहिए, परन्तु पौधारोपण करके ही इसकी इतिश्री होना प्रायः देखा गया है। मन में एक सवाल उठता है की पौधा कैसे फलेगा- फूलेगा? कैसे बढ़ा होगा? कौन उसकी देखभाल करेगा? पौधा किस जगह सुरक्षित रहेगा? इस प्रकार की व्यवस्थाएं प्रायः कही देखने को भी नहीं मिल नहीं पाती है। एक अनाथ आश्रम में जैसे किसी नवजात शिशु को काली अँधेरी रात में छोड़कर चले जाते हैं, वही स्तिथी पौधारोपण के बाद प्रायः पौधों की देखी गई है। हमें संकल्प लेना पड़ेगा की यह मात्र एक पौधा ना होकर हमारे परिवार का एक अहम् सदस्य हो। जिस प्रकार हम अपने परिवार के नन्हे शिशु की सभी प्रकार के संक्रमण, रोगों, एवं पशुओं व असामाजिक तत्वों से रक्षा करते हैं, उसी प्रकार पौधे की भी कम से कम 1 वर्ष तक सुरक्षा करेंगे।

पौधारोपण करने वाले ही करें देखभाल- देवेंद्रकुमार सोमानी(जिला मंत्री,भीलवाड़ा जिला माहेश्वरी सभा):

पर्यावरण प्रदुषण से बचाने में पौधों का बहुत बड़ा योगदान है। मै पिछले कई वर्षों से यह देख रहा हूँ की पर्यावरण संरक्षण के नाम पर कई संगठनो द्वारा पौधारोपण कर समाचार पत्रों में फोटो छपवाकर इतिश्री कर ली जाती है। पिछले 10 वर्षों में विभिन्न संगठनो द्वारा कितने पौधे लगाए गए एवं कितने पौधे आज जीवित अवस्था में है? इसका मूल्यांकन किया जाना चाहिए। मेरे विचार से पर्यावरण संरक्षण तब ही संभव है जब जो व्यक्ति पौधारोपण करे वो ही व्यक्ति हमेशा उसकी देख भाल करे और पौधों को सींचे। परिवार में माँ-बाप बनकर जैसे बच्चों को बड़ा करते हैं उसी तरह पौधों के माँ-बाप बनकर उनको बड़ा करना होगा। चाहे आप एक पौधा ही लगावें उस पर सम्बंधित व्यक्ति के नाम का टैग लगावें जिस पर अवधि भी अंकित हो, जिससे पौधे को सही देखभाल हो सकेगी एवं पर्यावरण संरक्षण अभियान सफल हो सकेगा। अन्यथा केवल पौधरोपण करना दिखावा मात्र है।


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