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कैसे बन सकता है आत्मनिर्भर भारत

कोरोना महामारी से बचाव के लिये चले प्रयासो व लॉकडाउन में जो हमे कई समस्याओं से गुजरना पड़ा। इनमें से प्रमुख था, मेडिकल सामग्री आदि की विदेशों से प्राप्ति। इस चुनौती ने हमें आत्मनिर्भर होने की राह दिखाई है, जिसके लिये हमारे प्रधानमंत्रीजी ने हमें ‘‘आत्मनिर्भर भारत’’ का मूलमंत्र दिया है। आइये देखें कैसे बनेगा ‘‘आत्मनिर्भर भारत’’

अब जहां एक और महामारी के कारण बंद व्यवस्थाओं को पुनः एक एक करके चालू करने का प्रयास किया जा रहा है वही हमें सरकार द्वारा आत्मनिर्भरता का बहुमूल्य मंत्र भी दिया गया है। मंत्र अच्छा है और देश को स्वयं में सक्षम होने की ज़रूरत भी है परंतु अभी तक सिर्फ़ आत्मनिर्भर बनने को कहा गया है। पर उससे जरूरी मुद्दा यह है कि आत्मनिर्भरता क्या है और ये कैसे मुमकिन होगी?

अभी तक इन सवालों के जवाब ख़ुद सवाल बनकर खड़े हुए है। क्योंकि सरकार का रूख एवं नीतियां अभी भी अस्पष्ट है। फ़िलहाल जो समझा जा रहा है उसके अनुसार सरकार ने मूलतःआयात से अपनी निर्भरता कम करने और घरेलू संसाधनो के उपयोग से देश को स्वयं में सक्षम बनाने पर ज़ोर दिया है किंतु क्या इसका मतलब वैश्विक स्तर पर अपनी सक्रियता कम करना समझें या फिर स्वदेशी वस्तुओं की उपलब्धता बढ़ाना, ये खुलकर नहीं बताया गया है। कुछ सकारात्मक बिंदु है जो पूरी तरह स्पष्ट है। उन पर गौर करना भी जरूरी है।

इन पर गौर करना जरूरी:

  • ज्ञान की सम्पूर्णता व समय की बचत:

जैसे पूरी तरह निर्भर होने के लिए पूरा ज्ञान होने की आवश्यकता होती है तो ,उसके के लिए ज़रूरी अध्ययन भी किया जाएगा जो हमें अपने आप में सम्पूर्णता प्रदान करेगा। वही दूसरी ओर घरेलू संसाधनो की उपलब्धता से उत्पादन में तथा आयात में लगने वाला समय भी बचेगा।

  • दूसरे देशों का भरोसा बढ़ेगा:

जब हम खुद अपने देश में पूर्ति करने को सक्षम हो जाएँगे और सब तरह की सुविधाओ की व्यवस्था बेहतर से बेहतर करेंगे तो दुनिया की नजर में तो आएँगे ही और ऐसे में जो कम्पनीज़ दूसरे देशों से अपने उद्योगों को भारत में स्थान्तरित करने का विचार कर रही है वो हम पर भरोसा दिखा पाएँगी।

  • उचित दाम में ज्यादा काम:

भारत में जनसंख्या की अधिकता से हमें सरलता से मज़दूर मिल सकते है जिससे कि बड़ी मात्रा में उत्पादन बढ़ाया जा सकता है और यह बिंदु बाहरी देशों की कम्पनीज़ को आकर्षित करने के लिए एक बहुत बड़ा कारण हो सकता है।

इनका करना होगा अमल:

  • नए की बजाय पुराने उद्योगों की सुध ले:

सर्वप्रथम सरकार को नए उद्योगों को बढ़ावा देने के बजाय बन्द होने की कगार पर खड़े पुराने उद्योग धंधों की मूल समस्याओं को सुलझा कर उन्हें पुनर्जीवित करना होगा।

  • विदेशी कम्पनीज़ पर गुणवत्ता को लेकर विश्वास:

जहां तक बात गुणवत्ता की आती है तो आज एक साबुन से लेकर कार तक ज़्यादातर हम विदेशी वस्तुएँ ही उपयोग में लाना पसंद करते है क्यूँकि हमको लगता है वो अधिक गुणवत्ता वाली है और अनुसंधान करी हुई है तो इस सोच को बदलने के लिए हमें भी गुणवत्ता को प्राथमिकता देनी होगी।

  • मार्केटिंग पर विशेष ध्यान:

विदेशी कम्पनी अपने विज्ञापनों में भारतीय लोकप्रिय सितारों को ही लेती है क्योकि प्रायः ये सितारें जनता की सोच को काफ़ी हद तक प्रभावित करते है और आम जनता उनका अनुसरण करती है । भारतीय कम्पनीज़ को भी भारतीयों की पसंद के बारे में और अधिक जानना होगा और अनूरूप ही विज्ञापन बनाने होंगे।

  • छोटी छोटी बातों पर पर सरकार अधिक ध्यान दे यदि आत्मनिर्भर भारत का सपना सरकार देख रही है तो उसको मजदूर से लेकर टॉप मेनेजमेंट तक की परेशनियो एवं व्यवस्थाओं को बराबर समझने की कोशिश करनी होगी तब तो ये मुहिम सफल है वरना किसी नीति को ठंडे बस्ते में जाने में भी देर नहीं लगती है।
नम्रता कचोलिया

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