शिक्षा-संस्कार की ज्योति जलाते- डॉ. संजय मालपानी

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कवि तो अपनी भावनाओं और शब्दों से प्रेरणा देता है किंतु कुछ बिरले ही ऐसे होते हैं जो उत्तम और उदात्त विचारों का आचरण अपने जीवन में करके समाज के लिए स्वयं ही एक मिसाल बन जाते हैं। ऐसे ही एक व्यक्तित्व हैं- डॉ. संजय मालपानी। वे संस्कारों के पाठ के साथ शिक्षा क्षेत्र का इस तरह कायाकल्प कर रहे हैं, कि देश के उत्कृष्ठ उच्च शिक्षित युवा भी मिलें, लेकिन भारतीय संस्कारों के साथ। आपके इन्हीं योगदानों को नमन करते हुए श्री माहेश्वरी टाईम्स परिवार आपको ‘शिक्षा संस्कार के क्षेत्र में’ विशिष्ट योगदानों के लिये समाजसेवा अंतर्गत ‘माहेश्वरी ऑफ द ईयर अवार्ड’ प्रदान करते हुए गौरवान्वित महसूस करता है।

संगमनेर जिला अहमदनगर(महाराष्ट्र) के प्रतिष्ठित मालपानी परिवार में 20 जुलाई 1969 को अ.भा. माहेश्वरी महासभा के पूर्व महामंत्री श्री ओंकारनाथ मालपानी व श्रीमती ललिता मालपानी के यहाँ जन्मे व इसी को अपनी कर्मभूमि बनाकर योगदान दे रहे डॉ. संजय मालपानी एक प्रतिष्ठित उद्यमी हैं, लेकिन उनकी प्रतिष्ठा फिर भी एक ऐसे समाजसेवी के रूप में अधिक है, जो तकनीकी प्रशिक्षण, उच्च शिक्षा तथा संस्कारों आदि द्वारा लोगों के जीवन को संवारने का काम कर रहे हैं।

एम.कॉम, डी.एम.एम तथा पीएच.डी. (चाइल्ड डेवलपमेंट मैनेजमेंट) तक उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी डॉ. संजय मालपानी ने स्व-उद्यम को ही आजीविका के रूप में अपनाया तथा शिक्षा संस्कारों के पोषण को जीवन का लक्ष्य बना लिया।


30 देशों तक किया संस्कारों का विस्तार

अखिल भारतीय माहेश्वरी महासभा के भूतपूर्व महामंत्री स्व. श्री ओंकारनाथजी मालपानी और श्रीमती ललिता मालपानी के सुपुत्र डॉ. मालपानी ‘‘गीता परिवार’’ के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष हैं।

स्वामी गोविंददेव गिरिजी महाराज द्वारा स्थापित गीता परिवार संस्था के हजारों कार्यकर्ता ग्रीष्मकालीन अवकाश में देश भर में अनगिनत संस्कार वर्गों और शिविरों का आयोजन करते हैं। किन्तु इस वर्ष अप्रैल के महीने में जब कोविड का भय अपने चरम पर था तब ऐसे कार्यक्रम संभव नहीं थे। अपनी वर्षों की संस्कार साधना में विध्न पड़ जाने से कार्यकर्ता भी निराश थे।

डॉ. संजय मालपानी

किन्तु ऐसे समय में भी एक व्यक्ति संभावनाओं की तलाश कर रहा था वह थे डॉ. मालपानी। उन्होंने कहा कि ‘डिस्टेंसिंग’ हो लेकिन ‘सोशल’ नहीं, बल्कि ‘फिजिकल’।

इस बार कोरोना महामारी के कारण डॉ. मालपानी ने इस बार ‘फिजिकल डिस्टनसिंग एंड सोशल शोल्डरिंग’ अर्थात शारीरिक दुराव में रहते हुए समाज सहकार का विचार सबके सामने रखा और सोशल मीडिया के माध्यम से ‘ई-संस्कार वाटिका’ की अनूठी कल्पना दी।

अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महिला संगठन की बालक एवं किशोरी विकास समिति भी संस्कार साधना के इस कार्य में सहभागी हुई। बच्चों के बीच प्रत्यक्ष कार्य करने वालों के लिए यह एक नई चुनौती थी किंतु डॉ. मालपानी ने इसे इतना सरल और सहज रूप दे दिया कि 15 दिनों के इस ऑनलाईन संस्कार वर्ग में 30 देशों से लॉकडाउन के कठिन समय में 35000 से अधिक बच्चों ने भाग लिया।

ई-संस्कार वाटिका ने हर घर को ही संस्कार केंद्र बना दिया और संस्कार वर्ग केवल बच्चों का नहीं होकर पूरे परिवार का हो गया। अपनी अनूठी कल्पना से डॉ. मालपाणी ने 35000 परिवारों में उत्साह और उमंग का संचार कर दिया।


गीता विशारद की उपाधि से सम्मानित

51 वें जन्मदिन पर गीता पर आधारित 51 वीडियोज का समर्पण और ‘गीता विशारद’ की उपाधि- अपने पिछले याने कि 50वें जन्मदिन के अवसर पर संजयजी ने गीता के 18 अध्याय कंठस्थ करने का संकल्प पूर्ण किया था।

इस वर्ष उनका 51वां जन्मदिन जब आया तब उन्होंन स्वयं कंठस्थ और मनन की हुई गीता को सरल अर्थों में समझाकर जन-जन तक और विशेषकर युवाओं तक पहुंचाने का संकल्प लिया। इसी संकल्प के साथ उन्होंने जानो गीता- बनो विजेता, की वीडियो श्रृंखला तैयार की।

डॉ. संजय मालपानी

प्रतिदिन गीता के एक विचार पर एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया जाने लगा। देखते ही देखते उनके वीडियो अत्यंत लोकप्रिय होने लगे। अलग-अलग माध्यमों से हजारों लोग प्रतिदिन ये वडियो देखते थे।

गीता पर उनके प्रभुत्व और प्रेम को देखते हुए श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष पूज्य स्वामी गोविंददेव गिरिजी महाराज ने उन्हें ‘गीता विशारद’ उपाधि से अलंकृत किया।


ऑनलाइन गीता प्रशिक्षण योजना

संजयजी के वीडियो सुनकर अनेक लोग उनके पास गीता पढ़ने, याद करने की इच्छा व्यक्त करने लगे और यहां से एक नई संकल्पना का उदय हुआ- ‘‘ऑनलाइन गीता प्रशिक्षण वर्गों के आयोजन’’ का। ई-संस्कार वाटिका के बाद यह उससे भी बड़ी चुनौती थी।

संजयजी की एक और विशेषता है कि वे अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम करते हैं। गीता परिवार के उपाध्यक्ष डॉ.आशु गोयल को इस मिशन का नतृत्व उन्होंने सौंपा। उन्होंने कार्य का विभाजन कर टेक्निकल सहयोग की टीम बनाई। संस्कृत भाषा की कुछ समझ रखने वाले लोगों को गीता प्रशिक्षक की जिम्मेदारी देकर उनको संस्कृत व्याकरण का प्रशिक्षण दिया।

गीता के श्लोकों को सरल प्रकार से व्याकरण और उच्चारण की शुद्धता के साथ याद किया जा सके इसके लिए भी विशेष परिश्रम किया। वेबसाइट निर्माण के कार्य में रुचि रखने वाले अपने पुत्र यश मालपानी को उन्होंने इस कार्य के लिए एक विशेष वेबसाइट निर्माण करने का दायित्व दिया और इसके बाद “लर्नगीता.कॉम” नामक वेबसाइट का प्रमोशन किया गया। देखते ही देखते हजारों लोग गीता कंठस्थ करने के लिए पंजीकरण करने लगे।

बीजरूप में प्रारंभ हुआ कार्य एक नए कीर्तिमान को स्थापित करने जा रहा था। भारत के अलग-अलग राज्यों से जुड़ने वाले गैर-हिंदी भाषी लोगों की संख्या बढ़ने लगी और तब देश की 10 भाषाओं में गीता सिखाने का कार्य आरंभ हो गया। आज इस कार्य का विस्तार विश्व के 59 देशों तक हो गया है।

अनेक महान संतों का आशीर्वाद इसे प्राप्त हुआ। संजयजी के नेतृत्व में गीता परिवार द्वारा संचालित इस अभियान ने अब तक 52000 लोगों को गीता सिखाकर एक नया विश्व कीर्तिमान स्थापित कर दिया है।

विशेष बात यह कि यह सारा कार्य नि:शुल्क किया जा रहा है और सहभागियों की परीक्षा लेकर उन्हें अलग-अलग स्तर पर प्रमाण पत्र भी दिए जा रहे हैं।

भगीरथ ने जिस प्रकार स्वर्ग से गंगा को उतार कर जन-जन तक पहुँचाया उसी पकार संजयजी गीता परिवार के माध्यम से गीता को जन-जन तक पहुँचाने का महान कार्य करके देश और संस्कृति की विशेष सेवा में लगे हैं।


उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता की सौगात

डॉ. मालपानी शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिये भी पूरी तरह से समर्पित हैं। इसके अंतर्गत वे 8000 विद्यार्थियों वाले संगमनेर कॉलेज (एम.पी.संस्था) को चेयरमेन के रूप में सेवा दे रहे हैं। 50 वर्ष पुराने इस कॉलेज का आधुनिक तकनीकों व प्रबंधन द्वारा इस तरह कायाकल्प किया कि वर्तमान में इसे नेक से ‘‘ए प्लस’’ ग्रेड प्राप्त है।

अरिहंत एज्युकेशन फाउण्डेशन पुणे को भी चेयरमेन के रूप में सेवा दे रहे हैं। लगभग 4 हजार विद्यार्थियों के साथ यह फाउण्डेशन बावधन तथा पुणे केम्प में कॉलेजों का संचालन करता है। इनमें परम्परागत शिक्षा के साथ तकनीकी शिक्षा, प्रबंधन, होटल मेनेजमेंट आदि शाखाएँ भी उपलब्ध हैं।

स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में डॉ. मालपानी ध्रुव ग्लोबल स्कूल-संगमनेर व पुणे के संस्थापक अध्यक्ष हैं। डे-बोर्डिंग तथा आवासीय रूप से संचालित ये सीबीएसई विद्यालय राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर की खेल तथा सांस्कृतिक गतिविधियों की सुविधा प्रदान करते हैं।

इनके साथ विद्यार्थियों को ‘‘विद्या व्रत-संस्कार’’ जैसे विशेष कार्यक्रम द्वारा देश व भारतीय संस्कृति के अनुरूप तैयार भी किया जाता है।


मानवता की सेवा को समर्पित ग्रुप

उनका परिवारिक उद्योग समूह मालपानी ग्रुप वास्तव में देखा जाए तो रीनिवेबल एनर्जी उत्पादन द्वारा भी मानवता की सेवा ही कर रहा है। यह लगभग 3 लाख मकानों तक ऐसी ग्रीन इनर्जी पहुँचा रहा है, जिसके द्वारा यह 9 लाख टन कार्बन डाइऑक्साईड के उत्पादन को रोकता है।

इस प्रकार यह वह काम कर रहा है, जो वातावरण को शुद्ध रखने के लिये 753 लाख पेड़ मिलकर करते हैं। इसके साथ ही समूह मालपानी हॉस्पिटल में नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा भी प्रदान करता है। सामूहिक विवाह, स्कॉलरशिप तथा जरूरतमंदों को मेडिकल सहायता उपलब्ध करवाता है।

संगमनेर फेस्टिवल, स्वच्छ भारत अभियान, योगा प्राणायाम ध्यान व पर्सनलिटी डिवलपमेंट वर्कशॉप तथा शिविर का आयोजन भी समूह द्वारा किया जाता रहा है।

मालपानी ग्रुप सामूहिक विवाह, योग्य युवक-युवतियों के लिये परिचय सम्मेलन तथा इन्टर स्कूल व इन्टर कॉलेज एक्टिविटिज का आयोजन भी करता है।


संस्कृत के साथ संस्कृति की भी सेवा

डॉ. मालपानी श्री ओंकारनाथ मालपानी संस्कृत संशोधन केंद्र तथा संस्कृत संवर्धन मंडल के चेयरमेन हैं। ये संस्थाऐं प्राचीन संस्कृत पाँडूलिपि के डिजिटलाईजेशन का कार्य कर उन्हें आधुनिक तकनीक के अनुसार सुरक्षित करने तथा आमजन तक डिजिटल रूप में पहुँचाने का काम कर रही है।

इसके साथ ही संस्कृत के विद्वानों को ‘‘संस्कृतात्मा पुरस्कार” व छात्रों को छात्रवृत्ति भी प्रदान करती हैं। संस्कृत ड्रामा व सेमिनार द्वारा भाषा के संवर्धन का कार्य भी आपकी ये संस्थाऐं कर रही हैं। श्री माधवलाल मालपानी योगा व नेचुरोपैथी सेन्टर के भी डॉ. मालपानी चेयरमेन हैं।

यह संस्था स्कूलों में सूर्य नमस्कार के प्रशिक्षण व प्रोत्साहन के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। इसके अंतर्गत 11 करोड़ सूर्य नमस्कार का लक्ष्य भी पूर्ण कर चुकी है। धार्मिक क्षेत्र में स्वामी गोविन्ददेव गिरीजी महाराज द्वारा स्थापित गीता परिवार के भी डॉ. मालपानी चेयरमेन हैं।


सेवा में बहुआयामी योगदान

डॉ. संजय मालपानी देश के स्वच्छता अभियान में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उनके योगदानों को देखते हुए अहमदनगर कलेक्टर द्वारा डॉ. मालपानी को ‘‘स्वच्छता दूत’’ नियुक्त किया। उन्होंने महाराष्ट्र में 51 हजार से अधिक डस्टबीन वितरित किये।

अहमदनगर के एस.टी. स्टेण्डों पर बड़े आकार के डस्टबीन भी स्थापित करवाये। महाराष्ट्र के कई शहरों में ‘‘स्वच्छ भारत जागरूकता कार्यक्रम’’ का आयोजन किया। शासकीय स्कूलों में बालिकाओं के लिये वॉशरूमों का निर्माण करवाया।

डॉ. संजय मालपानी

इसी प्रकार के विभिन्न प्रकल्प का सतत आयोजन किया जाता है। डॉ. मालपानी एक प्रेरक वक्ता के रूप में भी लोकप्रिय हैं। स्कूली शिक्षा क्षेत्र में डॉ. मालपानी के कार्यो के देखते हुए उन्हे महाराष्ट्र विधानसभा एवं विधिमंडल की संयुक्त सभा में ‘‘राईट टू एजुकेशन’’ विषय पर सम्बोधन के लिए आमंत्रित किया गया था।

उन्होनें ‘‘आर्ट ऑफ पेरेन्टिंग’’ पर 400 से अधिक और पेरेन्ट्स-चिल्ड्रन ताल मेल के शो ‘‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’’ अन्तर्गत 100 से अधिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये हैं। इसी प्रकार बाल मनोविज्ञान आदि कई विषयों पर भी आपके उद्बोधन हुए हैं।

उनके ‘दो शब्द मां के लिए, दो शब्द पिता के लिए’ व्याख्यान के कार्यक्रम का आयोजन अब तक 500 से भी अधिक स्थानों पर हो चुका है।


योग को विशेष स्थान दिलाने का संकल्प

योगासन-प्राणायाम में संजयजी की विशेष रुचि है। वर्ष 2016 में उन्होंने ‘योग सोपान’ अभ्यासक्रम का निर्धारण किया। उन्हीं की प्रेरणा और नियोजन से 35 हजार से अधिक विद्यालयीन छात्रों को यह अभ्यासक्रम नि:शुल्क सिखाया गया।

सन 2016 में इन 35 हजार छात्रों ने एक साथ संगीतमय योगासन प्रस्तुत करते हुए योगमहर्षि स्वामी श्री रामदेव बाबा को रोमांचित कर दिया था। ध्रुव ग्लोबल स्कूल में एक आधुनिक योगासन विभाग भी उनकी संकल्पना से बनाया गया है। गत वर्ष सीबीएसई की राष्ट्रीय योगासन स्पर्धा तथा स्कूल गेम्स की राज्यस्तरीय स्पर्धा का आयोजन भी उन्होंने किया था। बृहनमहाराष्ट्र योग परिषद के अध्यक्ष पद पर संजयजी का चयन किया गया।

संजयजी का स्वप्न था, योगासन को एक खेल के रूप में मान्यता दिए जाने का। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी ये संकल्पना देश के सामने रखी थी और इसी दिशा में कार्य को आगे बढ़ाते हुए योगमहर्षि स्वामी रामदेवजी महाराज तथा डॉ. नागेंद्र गुरुजी के नेतृत्व में राष्ट्रीय योगासन खेल महासंघ का गठन किया गया।

संगमनेर कैंपस

संजयजी के कार्यों और संगठन तथा कार्य कुशलता को देखते हुए इस महासंघ में उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गयी। इसी के साथ उन्हें अंतरराष्ट्रीय याोगासन खेल महासंघ की तकनीकी कमिटी का भी सदस्य बनाया गया। पिछले तीन महीनों में संजयजी ने अथक परिश्रम कर योगासन को खेल के रूप में स्थापित करने हेतु अत्यंत जटिल तकनीकी कार्य का संपादन किया।

इसी महीने संगमनेर में उनके नेतृत्व में योगासन के रेफ़रीस और जजेस की प्रशिक्षण कार्यशाला संपन्न हुई जिसे अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने संबोधित किया। इस कार्यशाला के माध्यम से एक इतिहास गढ़ने का कार्य हुआ और भविष्य में जब भी योगासन को एशियाड और ओलंपिक्स खेलों में एक खेल के रूप में मान्यता प्राप्त होगी तो संजयजी के योगदान को स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा।

शिक्षण प्रसारक संस्था के कार्याध्यक्ष के रूप में काम करते हुए उन्हीं की संकल्पना से संगमनेर में निर्मित माधवलाल मालपाणी योग एवं निसर्गोपचार केंद्र का आधुनिक प्रकल्प भी उनके योग विषयक रुचि का एक और प्रमाण है।


संस्कारों की पाठशाला बनी ‘ध्र्रुव अकादमी’

गत तीन दशकों से गीता परिवार के माध्यम से कार्य करते हुए संजयजी ने देशभर के बालकों और पालकों के साथ निरंतर संवाद किया। बच्चों के सम्पूर्ण विकास के लिए और औपचारिक स्कूली शिक्षा के महत्व का उन्हें आभार हुआ और अपने दीर्घ अनुभव के आधार पर मालपाणी फाउंडेशन के माध्यम से उन्होंने ध्र्रुव ग्लोबल स्कूल की स्थापना की।

पुणे कैंपस

ध्रुव ग्लोबल स्कूल की ख्याति अब एक ऐसे विद्यालय के रूप में है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएँ प्रदान करते हुए भी अपने छात्रों में भारतीय मूल्यों का बीजारोपण करता है। भविष्य के भारत को नेतृत्व प्रदान कर सकने वाले तथा एकेडेमिक्स के साथ-साथ खेल, कला, संगीत, नृत्य, नाट्य, योगासन आदि विभिन्न क्षेत्रों में देश का नाम रोशन करने वाले छात्रों के निर्माण का स्वप्न देखते हुए जो बीज उन्होंने बोया था, अब उसे फल लगने लगे हैं।

ध्रुव के छात्र आज अपनी उपलब्धियों से पहचाने जाते हैं। मल्टीपल इंटेलिजेंस थ्योरी पर आधारित इस विद्यालय को हाल ही में टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा महाराष्ट्र के सर्वोत्तम विद्यालय की रेटिंग से नवाजा गया। इसकी संगमनेर के अतिरिक्त पुणे में एक शाखा पहले से थी और अब पुणे के उंद्रि क्षेत्र में भी एक नई शाखा का आरंभ करने का कार्य इसी वर्ष सम्पूर्ण होने जा रहा है।

लॉकडाउन के समय में भी डॉ. संजय मालपानी ने विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से शिक्षकों और शिक्षण क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों के लिए अनेक वेबिनार को सम्बोधित किया। शिक्षा के क्षेत्र में उनके कार्य को देखते हुए इसी वर्ष उनका चयन ग्लोबल टॉक एजुकेशन फाउंडेशन के डायरेक्टर के रूप में किया गया।


पारिवारिक उद्योग को भी दी ऊँचाई

उद्योग के क्षेत्र में डॉ. संजय मालपानी ने अपने परिवारिक ‘मालपानी उद्योग समूह’ के विस्तार को ही आपने जीवन का लक्ष्य बनाया। यह उद्योग समूह उनके भाईयो व उनके द्वारा संयुक्त रूप से संचालित होता है। इसके अंतर्गत परिवार के पारंपरिक उद्योग में वैविध्य लाते हुए उद्योग का विस्तार कर रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाना तथा समृद्धि का सदुपयोग संस्कार-संस्कृति के संवर्धन के लिए करना अपना प्रमुख लक्ष्य रखा और इसमें वे खरे भी उतरे।

वर्तमान में डॉयरेक्टर के रूप में आपके नेतृत्व में मालपानी उद्योग समूह विविध क्षेत्रों में प्रगतिशील है। राजस्थान सहित देश के 7 प्रदेशों में स्थापित उनके पवन व सौर उर्जा प्रोजेक्ट लगभग 630 मेगावॉट विद्युत ऊर्जा का उत्पादन करते हैं और वह भी बिना किसी प्रदूषण के।

इनके माध्यम से अभी तक लगभग 3500 से अधिक अप्रशिक्षित श्रमिकों को रोजगार भी प्रदान किया जा चुका है। मालपानी ग्रुप एफएमसीजी प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग, इम्युजमेंट पार्क, हॉस्पिटेलिटी तथा बिल्डर्स एण्ड डिवलपर्स के रूप में भी सेवा दे रहा है।


सेवा ने दिलाया सम्मान

डॉ. संजय मालपानी कई संस्थाओं से सम्बद्ध होकर अपना चहुँमुखी योगदान दे रहे हैं। इसके अंतर्गत शारदा शिक्षा संस्थान के डायरेक्टर, श्रमिक जूनियर कॉलेज चेयरमेन, वृद्धाश्रम ‘‘सेवाश्रम संस्था’’ के कोषाध्यक्ष, गौरक्षण संस्था व अ.भा. मराठी बालकुमार साहित्य परिषद संगमनेर अध्यक्ष के रूप में सेवा देते रहे हैं।

महाराष्ट्र प्रदेश माहेश्वरी सभा कौंसिल सदस्य, संस्कार बाल भवन संगमनेर-अध्यक्ष, भारतीय शिक्षण परिषद उपाध्यक्ष आदि के रूप में कई संस्थाओं में सक्रिय योगदान दे रहे हैं। आरटीई की स्टेट एक्सीक्यूटिव कमेटी के सदस्य भी हैं।

डॉ. मालपानी को उनकी सेवाओं के लिये स्वच्छता दूत, नेहरू युवा पुरस्कार, सर्वोदय पुरस्कार, संस्कृति वैभव पुरस्कार, आर.बी. हिवड़गाँवकर पुरस्कार, सहयाद्री पुरस्कार, लायन सफॉयर अवार्ड, स्वामी भूषण पुरस्कार, दीर्घायु ज्ञानदीप अवार्ड तथा ग्रंथालय भूषण अवार्ड आदि कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।


पूरा परिवार भी सेवापथ पर साथ

मालपाणी उद्योग समूह के संचालक होने के नाते अपनी जिम्मेदारियाँ निभाते हुए भी डॉ. संजय मालपानी समाजसेवा की उस विरासत को भी आगे ले जा रहे हैं जो उन्हें अपने पिता स्व. श्री औंकारनाथ मालपानी से प्राप्त हुई थी।

डॉ. संजय मालपानी

माहेश्वरी समाज तथा अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा के लिए डॉ. संजय मालपानी सदैव तत्पर रहते हैं। श्री औंकारनाथ मालपाणी महाराष्ट्र महेश सेवा निधि के भी अध्यक्ष हैं। उनके इन कार्यों में बड़े भाई राजेश के साथ ही भाई मनीष, गिरीश, आशीष व पूरे परिवार का सहयोग भी उन्हें प्राप्त होता है।

उनकी पत्नी श्रीमती अनुराधा मालपाणी ध्रुव ग्लोबल स्कूल के संचालन के साथ संस्कार बालभवन की मानद संचालिका के रूप में उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चलती हैं।


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