एडवोकेट से बनी ‘‘गौ सेवक’’- सुनीता रांदड़

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एडवोकेट व पशुपालन दोनों लगभग विपरीत क्षेत्र हैं। इनका साथ होने की बात करें तो लगभग असंभव सा ही लगेगा। लेकिन दो भिन्न व्यक्ति नहीं बल्कि एक ही किशनगढ़ निवासी एडवोकेट सुनीता रांदड़ ने इस ‘अनहोनी को होनी’ करके दिखा दिया। इसमें उनका सम्बल बनीं गौमाता के प्रति श्रद्धा जिसने उनके जीवन की दिशा डेयरी व्यवसाय की ओर मोड़ दी।

किशनगढ़ निवासी बी.ए.एल.एल.बी. तक शिक्षित सुनीता रांदड़ पेशे से वकील हैं। आपने सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में प्रखर वक्ता एवं बुद्धिजीवी के तौर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। पति विनोद रांदड़ बिट्स पिलानी से बी.ई हैं। लेकिन श्रीमती रांदड़ अब जैविक खेती और गोवंश पालन में भी विशिष्ट पहचान बना रही हैं। साथ वे अब भारत के वातावरण में देशी गौमाता के हो रहा तिरस्कार के खिलाफ भी बिगुल बजा चुकी हैं।


ऐसे मिली जीवन को राह

गौमाता के प्रति श्रद्धा भाव के साथ सुनीता ने आज से ठीक 5 वर्ष पूर्व रूपनगढ़ के पास मानपुरा गांव में अपने गिर गाय के डेयरी फार्म एवं संरक्षण एवं संवर्धन केंद्र की शुरुआत 2 गाय से की। फिर देशी नस्ल की गौमाता के संरक्षण का बीड़ा उठाया एवं साथ ही भारत में जैविक क्रांति को भी सफल बनाने का प्रण लिया। इनके आ जाने से उन्हें घर के लिए शुद्ध सब्जियों के साथ ही दूध, दही/छाछ एवं घी मिलने लगा।

धीरे-धीरे ज्यादा दूध होने के कारण रिश्तेदारों एवं मित्रों को भी दूध दिया जाने लगा। देशी गाय के लिए श्रीमती रांधड़ का लगाव बढ़ा, साथ ही दूध की मांग भी। तत्पश्चात सुनीताजी ने डेयरी खोलकर गौमाता को आत्मनिर्भर बनाने एवं लोगों को पूर्णत: शुद्ध दूध घी देने का विचार किया।

इसके लिये उन्होंने गिर नस्ल की गायों के साथ ही नंदी भी खरीदा और धीरे-धीरे गौवंश की मात्रा एवं दूध उत्पादन बढ़ने लगा।


जैविक चारा और फसल उत्पादन

शुरुआती दिनों में दूध छाछ एवं घी की नियमित एवं व्यवस्थित बिक्री से सुनीता जी ने डेयरी को आत्मनिर्भर बनाने पर प्रयत्न किया। इसके बाद जैविक चारा एवं फसल का उत्पादन भी स्वयं के खेत पर जीवामृत एवं गोबर केचुआ खाद व बिना कीटनाशक के करना शुरू किया। यही चारा एवं फसल गायों की नित्य खुराक में रखीं गई।

गौपालन के साथ ही अपनी जैविक खेती एवं रसायनमुक्त भारत के मिशन को लेकर उन्होंने घी के साथ ही बैल से चलित घाणी से निकले हुए जैविक तेल, शुद्ध जैविक मसाले एवं सभी प्रकार के जैविक खाद्य पदार्थों का उत्पादन एवं विक्रय उचित मूल्य पर ऑनलाइन एवं ऑफलाइन चालू किया।

सुनीता रांदड़

आज श्रीमती सुनीता का डेयरी फार्म श्री चारभुजा ऑर्गेनिक डेयरी फार्म ‘‘गिर गाय संरक्षण एवं संवर्धन केंद्र’’ के नाम से जाना जाता है, यहां इस वक्त 95 के लगभग गोवंश है। जहां न सिर्फ शुद्ध दूध छाछ घी का उत्पादन किया जाता है बल्कि उन्नत गिर नस्ल का गोवंश भी पैदा किया जा रहा है।

आलम यह है कि दूरदराज से लोग इस काम पर गोपालन के तरीके सीखने और समझने आते हैं एवं जैविक खाद्य पदार्थों का उत्पादन बंशीवाला इंटरप्राइजेस के नाम से फेसबुक इंस्टाग्राम एवं सभी ऑनलाइन एवं ऑफलाइन प्लेटफार्म पर उपलब्ध है।


गौवंश की श्रेष्ठ देखभाल

गाय को स्वस्थ रखने के लिए वे नियमित सफाई एवं पीने के पानी की सफाई में चूने का प्रयोग करती है। गाय का हाजमा सुचारू रखने के लिए प्राकृतिक नमक का प्रयोग एवं मच्छरों से बचाव के लिए नियमित पुताई एवं सही मात्रा में नियमित पौष्टिक जैविक आहार का उपयोग होता है।

श्रीमती रांदड़ गौपालन क्षेत्र में आयी है और अपने फार्म पर गिर गाय की अच्छी नस्ल तैयार करती है जिससे पशुपालक यहां से अच्छी नस्ल की गौमाता लेकर जाते हैं। वह गिर नस्ल के सुडोल नंदी तैयार करके सार्वजनिक गौशालाओं को दान भी करती हैं, जिससे कि उनकी नस्ल भी सुधरे।

सुनीता रांदड़

श्रीमती रांदड़ को इनके प्रयत्नों के लिए भारतीय कृषि संस्थान द्वारा भी प्रोत्साहित किया गया, साथ ही इनका फार्म राजस्थान राज्य जैविक बोर्ड द्वारा नेशनल प्रोग्राम फॉर ऑर्गेनिक प्रोडक्शन, एफएसएसएएल, एमएसएमई एवं राजस्थान सरकार द्वारा संचालित व्यवसायिक केंद्र में भी पंजीकृत है।


राजनीति में भी रहीं सक्रीय

श्रीमती सुनीता रांदड़ का जन्म 26 अगस्त 1974 को अजमेर में बालकिशन लड्ढा तथा गीतादेवी लड्ढा के यहाँ नागौर में हुआ। वर्तमान में जिला अध्यक्ष- भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा-नागौर, सदस्या- उत्तर पश्चिम रेलवे उपयोगकर्ता एवं सलाहकार समिति (ZRUCC), सदस्या- जिला विकास एवं समन्वय कमेटी नागौर(DHISHA), सदस्य- अजमेर मंडल रेलवे कमेटी, जिला कमेटी प्रभारी- आईटी सेल नागौर के रूप में सेवा दे रही हैं। पूर्व में ‘मध्य राजस्थान’ प्रादेशिक माहेश्वरी महिला संगठन की भी जिम्मेदारी निभा चुकी हैं।


सेवा ने दिलाया सम्मान

गौ सेवा के इस अभियान ने जहाँ उन्हें आत्मसंतोष दिया वहीं सम्मान भी दिलाया। प्रशासन द्वारा गणतंत्र दिवस पर समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु सम्मानित किया।

महिला शक्ति शिरोमणि सम्मान से इंडो नेपाल समरसता समिति नई दिल्ली, गौ संवर्धन के क्षेत्र में कार्य हेतु भारतीय कृषि अनुसंधान (ICAR) परिषद से सम्मान सहित प्रवक्ता रत्न सम्मान- भीलवाड़ा, नारी शक्ति पुरस्कार- बीकानेर, किशनगढ़ रत्न सम्मान- किशनगढ़, वूमेन पॉलिटिकल लीडरशिप अवार्ड 2018- जयपुर तथा भामाशाह पुरस्कार आदि से सम्मानित हुई।

श्रीमती सुनीता रांदड़ की पुत्री दीक्षा बी टेक कर आई आई एम से एमबीए कर रही हैं तथा पुत्र तनिष्क भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर चहुंमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए अपनी माँ श्रीमती रांदड़ के गौसेवा के इस अभियान में भी सक्रीय योगदान दे रहे हैं।


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