मनोकामना का ‘‘सिद्धि पर्व’’- गुप्त नवरात्रि

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आषाढ़ शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से प्रारम्भ नवदिवसीय पर्व गुप्त नवरात्रि कहलाता है। इसका नाम ‘‘गुप्त’’ इसलिये है क्योंकि इस काल में होने वाली उपासना गुप्त रूप से मनोकामना सिद्ध करती है। इस पर्व पर तंत्र की महान देवी दस महाविद्याओं की गुप्त साधना से वशीकरण, उच्चाटन, सम्मोहन, स्तंभन, आकर्षण और मारण जैसी तांत्रिक क्रियाओं के दुष्प्रभाव से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख समृद्धि प्राप्त होती है।


गुप्त नवरात्रि आषाढ़ शुक्ल पक्ष प्रतिपदा आगामी 11 जुलाई, 2021 से प्रारंभ होंगे, संयोग से इस दिन अतिशुभ रविपुष्य योग भी विद्यमान रहेगा। इस शुभ योग में वाहन खरीदना, रत्न धारण करना, तंत्र-मंत्र साधना आदि शुभ कार्य करना विशेष फलदाई और शुभ होते हैं। पुष्य नक्षत्र में भगवान गणेश का गणपति अथर्वशीर्ष के साथ अभिषेक एवं आराधना कर शुभ प्राप्ति की प्रार्थना करते हैं।

तिथि क्षय के कारण इस वर्ष गुप्त नवरात्र भड्डली नवमी, 18 जुलाई तक चलेंगे। गुप्त नवरात्र मनाने एवं इनकी साधना का विधान देवी भागवत तथा अन्य धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। श्रृंग ऋषि ने गुप्त नवरात्राओं के महत्व को बतलाते हुए कहा है कि जिस प्रकार वासंतिक नवरात्र में विष्णु पूजा की और शारदीय नवरात्र में देवी शक्ति नौ देवियों की पूजा की प्रधानता रहती है, उसी प्रकार गुप्त नवरात्राओं में मनोकामना एवं सर्वार्थसिद्धि की प्राप्ति हेतु दस महाविद्याओं की पूजा अर्चना करने का विधान है, यदि कोई इन महाविद्यााओं के रुप में शक्ति की उपासना करे तो जीवन धन-धान्य, राज्य सत्ता, एैश्वर्य से भर जाता है।

गुप्त नवरात्रों की प्रमुख देवी के स्वरुप का नाम सर्वेष्वर्यकारिणी देवी है। लोभी, कामी, व्यसनी सहित मांसाहारी अथवा पूजा पाठ न कर सकने वाला भी यदि इन दिनों अपनी मनोकामना के अनुसार इन दस महाविद्याओं में से किसी की भी पूजा-साधना करके घर में उसका यंत्र स्थापित करते हैं तो उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। गुप्त नवरात्र में देवी की आराधना कर न सिर्फ शक्ति संचय किया जाता है वरन् नवग्रहों से जनित दोषों का शमन भी इस अवधि में सुगमता से किया जा सकता है।

जन्म कुंडली में कोई भी प्रतिकूल ग्रह नीच अथवा शत्रुक्षेत्रीय प्रभाव में होकर अनिष्टकारक हो, उनकी दशा अर्न्तदशा में अनिष्ट प्रभाव पड़ रहा हो या अनिष्ट की आशंका हो तो नवरात्रा में देवी की पूजा आराधना से सभी नौ ग्रह तथा बारह राशियों के प्रतिकूल प्रभाव शांत होकर घर में सुख, समृद्धि तथा शांति की प्राप्ति होती है।


दस महाविधाओं की साधना

दस महाविद्याएं काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, तथा कमला हैं। इनकी प्रवृति के अनुसार इन्हें तीन ग्रुप में विभाजित किया गया है। 1. सौम्य कोटि- त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, मातंगी, और कमला। 2. उग्र कोटि- काली, छिन्नमस्ता, धूमावती और बगलामुखी। 3. सौम्य-उग्र कोटि- तारा और त्रिपुर भैरवी। यह महाविद्याएं तंत्र की प्रमुख देवी हैं।

इनकी पूजा तथा जप आदि शुद्ध आचरण के साथ करने चाहिए। तंत्र और शाक्त मत का तो ये सबसे अहम पर्व माना जाता है। वैषनो, पारम्बा देवी, कामाख्या देवी और हिन्गुलाज देवी का यही मुख्य पर्व है। गुप्त नवरात्र में की गयी मंत्र साधना निष्फल नहीं जाती है।

वशीकरण, उच्चाटन, सम्मोहन, स्तंभन, आकर्षण और मारण जैसी तांत्रिक क्रियाओं के दुष्प्रभाव को नष्ट करने की शक्ति इनमें में ही विद्यमान है।


कैसे करें महाविधा की साधना

सर्व प्रथम गुप्त नवरात्रों की प्रमुख देवी सर्वेष्वर्यकारिणी माता को धूप, दीप, प्रसाद अर्पित करें। रुद्राक्ष की माला से प्रतिदिन ग्यारह माला ‘‘ओम ह्नीं सर्वेष्वर्याकारिणी देव्यै नमो नमः।’’ मंत्र का जप करें। पेठे का भोग लगाएं। इसके पश्चात मनोकामना के अनुसार निम्न में से किसी मंत्र का जप करें। यह क्रम नौ दिनों तक गुप्त रुप से जारी रखें।

कालीः लम्बी आयु, बुरे ग्रहों के प्रभाव, कालसर्प, मंगलीक बाधा, अकाल मृत्युभय आदि के लिए काली की साधना करें। मंत्र- ‘‘क्रीं ह्नीं ह्नुं दक्षिणे कालिके स्वाहाः।’’ हकीक की माला से नौ माला का जप कम से कम करें।

ताराः तीव्र बुद्धि, रचनात्मकता, उच्च शिक्षा के लिए माँ तारा की साधना नीले कांच की माला से बारह माला प्रतिदिन मंत्र जप करें। मंत्र- ‘‘ओम ह्नीं ट्टीं हुम फट।’’

त्रिपुर सुंदरीः व्यक्तित्व विकास, स्वस्थ्य और सुन्दर काया के लिए त्रिपुर सुंदरी देवी की साधना करें। रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करें। दस माला मंत्र जप अवष्य करें। मंत्र- ‘‘ऐं ह्नीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः।’’

भुवनेश्वरीः भूमि, भवन, वाहन सुख के लिए भुवनेश्वरी देवी की आराधना करें। स्फटिक की माला से ग्यारह माला प्रतिदिन जप करें। मंत्र- ‘‘ह्नीं भुवनेश्वरीयै ह्नीं नमः।’’

छिन्नमस्ताः रोजगार में सफलता, नौकरी, पदोन्नति आदि के लिए छिन्नमस्ता देवी की आराधना करें। रुद्राक्ष की माला से दस माला प्रतिदिन जप करें। मंत्र- ‘‘श्रीं ह्नीं ऐं वज्र वैरोचानियै ह्नीं फट स्वाहा’’।

त्रिपुर भैरवीः सुन्दर पति या पत्नि प्राप्ति, शीघ्र विवाह, प्रेम में सफलता के लिए मुंगे की माला से पंद्रह माला मंत्र का जप करें। मंत्र- ‘‘ह्नीं भैरवी क्लौं ह्नीं स्वाहाः।’’

धूमावतीः तंत्र, मंत्र, जादू टोना, बुरी नजर, भूत प्रेत, वशीकरण, उच्चाटन, सम्मोहन, स्तंभन, आकर्षण और मारण जैसी तांत्रिक क्रियाओं के दुष्प्रभाव को नष्ट करने के लिए देवी घूमावती के मंत्र की नौ माला का जप मोती की माला से करें। मंत्र- ‘‘ओम धूं धूं धूमावती देव्यै स्वाहाः।’’

बगलामुखीः शत्रु पराजय, कोर्ट कचहरी में विजय, प्रतियोगिता में सफलता के लिए हल्दी या पीले कांच की माला से आठ माला मंत्र का जप करें। मंत्र- ‘‘ओम ह्नीं बगुलामुखी देव्यै ह्नीं ओम नमः।’’

मातंगीः संतान, पुत्र आदि की प्राप्ति के लिए स्फटिक की माला से बारह माला मंत्र जप करें। मंत्र- ‘‘ओम ह्नीं ऐं भगवती मतंगेष्वरी श्रीं स्वाहाः।’’

कमलाः अखंड धन धान्य प्राप्ति, ऋण मुक्ति और लक्ष्मी जी की कृपा के लिए देवी कमला की साधना करें। कमलगट्टे की माला से दस माला प्रतिदिन मंत्र का जप करें। मंत्र- ‘‘हसौः जगत प्रसुत्तयै स्वाहाः।’’


नवग्रहों की शांति साधना

जन्म कुंडली में यदि नवग्रहों में से कोई भी ग्रह अनिष्ट फल दे रहा हो तो गुप्त नवरात्र में शक्ति उपासना करने से विशेष लाभ मिलता है। सूर्य ग्रह के कमजोर होने पर स्वास्थ्य लाभ के लिए शैल पुत्री की उपासना से लाभ मिलता है। चन्द्रमा के दुष्प्रभाव को दूर करने के लिए कुष्मांडा देवी की आराधना करें।

मंगल ग्रह के लिए स्कंदमाता, बुध की शांति तथा अर्थव्यवस्था में वृद्धि के लिए कात्यायनी देवी, गुरु के लिए महागौरी, शुक्र के शुभत्व के लिए सिद्धिदात्री तथा शनि के दुष्प्रभाव को दूर करने के लिए कालरात्रि की उपासना सार्थक रहती है। राहु की शुभता के लिए ब्रह्मचारिणी की उपासना तथा केतु के विपरीत प्रभाव को दूर करने के लिए चंद्रघंटा देवी की साधना करनी चाहिए।

जब किसी की जन्म पत्रिका उपलब्ध नहीं हो तथा जीवन में कुछ परेशानियां आ रही हों जैसे बार-बार दुर्घटनाएं होना, मानसिक परेशानी, किसी भी काम में बार बार विफलता आना, संतान के विवाह में बिलम्ब या अन्य कष्ट होना, पूजा पाठ में मन नहीं लगना, चित्त विकृति, धनाभाव, व्यापार में नुकसान, रोजगार की समस्या, भय, शारीरिक व्याधि, दाम्पत्य जीवन में क्लेष आदि समस्याओं के समाधान के लिए गुप्त नवरात्रि में देवी की आराधना तथा यंत्र सहित मंत्र जप करें सफलता मिलेगी। नवरात्र के बाद यंत्र को घर में रखें।


दुर्गा सप्तशति मंत्र से मनोकामना सिद्धि

  • अशुभ ग्रहों की शुभता के लिए: करोतु सा नः शुभहेतुरीष्वरी। शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः।।
  • संतान प्राप्ति हेतु: नन्दगोपगृहे जाता यशोदागर्भ संभवा। ततस्तौ नाशयिष्यामि विन्घ्याचल निवासिनी।।
  • बाधा निवारण हेतु: सर्वाबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरी। एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरि विनाशनम्।।
  • आरोग्य एवं सौभाग्य के लिए: देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्। रुपं देहि जयं देहि यषो देहि द्विषो जहि।।
  • विपत्ति नाश के लिए: शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे। सर्वास्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तुते।।
  • संकटों से रक्षा के लिए: शूलेन पाहिनो देवि पाहि खंगेन चाम्बिके। घण्टास्वनेन नः पाहि चापज्यानिः स्वनेन च।।
  • सुलक्षणा पत्नि की प्राप्ति के लिए: पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्। तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्।।
  • व्यापार वृद्धि तथा भुक्ति मुक्ति हेतु: विधेहि देवि कल्याणं विधेहि परमां श्रियम्। रुपं देहि जयं देहि यषो देहि द्विषो जहि।।
  • यश, धन तथा विद्या प्राप्ति हेतु: आयु रक्षतु वाराही धर्म रक्षतु वैष्णवी। यषः कीर्ति च लक्ष्मीं च धनं विद्यां च चक्रिणी।

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