नारी सशक्तिकरण की ज्योति जगाती – चन्द्रकला भार्गव (मणियार)

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हम जब भी नारी शक्ति के मान सम्मान की बात करते हैं, तो विभिन्न घटनाओं को देखकर तमाम दावे झूठे से महसूस होते हैं। कारण है नारी में आत्मनिर्भरता तथा अपने अधिकारों की जानकारी की कमी। इन्हीं को लेकर जागृति उत्पन्न करने में अपना सम्पूर्ण जीवन अर्पित करती चली आ रही हैं, लातूर निवासी 77 वर्षीय समाजसेवी चंद्रकला भार्गव (मणियार)।

हम लातूर निवासी चंद्रकला भार्गव की जब बात करते हैं, तो लगता है कि जैसे वे माहेश्वरी नहीं हैं। हकीकत में देखा जाऐ तो भार्गव उनके पूर्वजों को संगीत के क्षेत्र में योगदान को लेकर मिली उपाधि है, जो अभी तक परिवार उपनाम के रूप में लगाता आ रहा है।

वास्तव में आप मूल रूप से मणियार माहेश्वरी हैं। गत 45 वर्षों से श्रीमती भार्गव नारी के सर्वांगीण विकास, समानता व उसके सशक्तिकरण से सतत रूप से ज़ुडी हुई हैं। युवावस्था से प्रारम्भ आपका यह अभियान उम्र के 77वें पड़ाव पर भी उसी तरह जारी है।


पति से मिली समाजसेवा की प्रेरणा

श्रीमती भार्गव का जन्म देश की आजादी के भी पूर्व 27 जनवरी 1945 को सोलापुर में स्व. श्री पन्नालाल व श्रीमती पार्वतीबाई डागा के यहाँ हुआ था। बचपन से तो धार्मिक माहौल मिला लेकिन लातूर निवासी श्री नंदकिशोर भार्गव के साथ परिणय सूत्र में बंधने के पश्चात ऐसा समाजसेवी माहौल मिला कि स्वयं के कदम भी समाजसेवा की ओर बढ़ चले।

लगभग 11 वर्ष पूर्व दिवंगत हो चुके आपके पति स्व. श्री नंदकिशोर भार्गव ख्यात समाजसेवी संस्था रोटरी क्लब से तो सदस्य के रूप में सम्बद्ध थे ही, साथ ही कई अन्य समाजसेवी संस्थाओं में भी अपना योगदान दे रहे थे। आपने एक मूकबधिर विद्यालय स्थापित किया था, जो वर्तमान में मानसिक रूप से पिछड़े बच्चों को भी सेवा दे रहा है।

इसके साथ ही आपने एक प्रतिष्ठित मराठी माध्यम विद्यालय श्री किशन सोमानी हाईस्कूल की भी स्थापना की थी। इन दोनों ही संस्थान से वर्तमान में श्रीमती भार्गव सदस्या के रूप में सम्बन्ध हैं।


ऐसे बढ़े नारी सशक्तिकरण की ओर कदम

एम.ए. अंग्रेजी, पी.जी. डिप्लोमा इन टीचिंग इंग्लिश तथा स्पेशलाईजेशन इन फोनेटिक्स एण्ड लिंग्विस्टिक्स तक उच्च शिक्षित श्रीमती भार्गव ने 12 वर्षों तक एस.पी. महाविद्यालय पुणे व दयानंद महाविद्यालय लातूर में अध्यापन किया। इसके बाद अपने पति द्वारा स्थापित विद्यालयों को समर्पित हो गईं।

chandrakala bhargav maniyar

नवान्वेषण के अंतर्गत वर्ष 2019-20 में श्री किशन सोमानी विद्यालय के बच्चों के लिये 11 हजार इंग्लिश शब्दों के सही उच्चारण की स्वयं की आवाज में रिकार्डिंग की, जिसका विद्यार्थियों को बहुत लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही वर्ष 1983 से नारी प्रबोधन मंच लातूर के माध्यम से नारी के सर्वांगीण विकास के लिये कार्य प्रारम्भ किया।

यह संस्था में वर्ष 1985 से 1999 तक आपके अध्यक्षीय मार्गदर्शन में कार्यरत रहीं। उसी समय से आदर्श महिला गृह उद्योग लातूर इस संस्था की अध्यक्षा के रूप में काम चल रहा है।


देश की सीमाओं से बाहर तक जनजागरण

श्रीमती भार्गव संस्था आदर्श महिला गृह उद्योग की अध्यक्ष के रूप में नारी के सर्वांगीण विकास तथा सशक्तिकरण के लिये सतत रूप से कार्य कर रही हैं। यह संस्था 152 ग्रामों में अपनी सेवा दे रही है। इसी के अंतर्गत 650 महिला बचत गट के माध्यम से 7500 से अधिक महिलाओं को रोजगार प्रदान किया, जिनमें अधिकांश गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली महिलाऐं शामिल हैं।

संस्था ने 9 करोड़ रुपये का ऋण स्वरोजगार के लिये लिया था, जो वह शत प्रतिशत उतार चुकी है। वे इनरव्हील क्लब लातूर, महाराष्ट्र स्त्री अभ्यास व्यासपीठ महाराष्ट्र तथा माहेश्वरी महिला मंडल लातूर से भी सम्बद्ध हैं। सामाजिक जागृति तथा महिला अधिकारों को लेकर वे अभी तक 2 हजार से अधिक उद्बोधन विभिन्न आयोजनों में दे चुकी हैं।

इसी से संबंधित नाटिका ‘‘मुलगी झाली हो’’ की पूरे महाराष्ट्र में 150 से अधिक प्रस्तुति दे चुकी हैं। इसी नाटिका की एकल पात्र के रूप में 42 से अधिक प्रस्तुति भी श्रीमती भार्गव ने दी हैं, जिसमें से 7 से अधिक प्रस्तुति तो अमेरिका में दी हैं।

आपके पुत्र मनोज भार्गव तथा पुत्री अनुपमा-संदीप धूत अमेरिका में ही निवास कर रही हैं। अत: उन्होंने भी वहाँ इनकी प्रस्तुति में सहयोग प्रदान किया। बेटे संजीव भार्गव लातूर में ही निवास कर रहे हैं और अपनी माता श्रीमती भार्गव को समस्त गतिविधियों में सहयोग प्रदान कर रहे हैं।


सेवा के वृहद आयाम

श्रीमती भार्गव की समाजसेवा यहीं तक ही नहीं थमी। आपके लिखे कई आलेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। अभी तक लगभग 13 हजार से अधिक महिलाओं को उन्होंने व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करवाया है। ‘‘जिज्ञासा’’ और ‘‘दीपशिखा’’ जैसे कई आयोजन किशोर लड़के-लड़कियों के लिये विभिन्न शिक्षण संस्थाओं में किये।

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में पौधारोपण, केमिकल रहित कृषि आदि के साथ ही कोविड-19 के दौरान राशन वितरण तथा चिकित्सा सेवा में योगदान भी दिया। 20 ग्राम पंचायतों में जनजागृति उत्पन्न कर बिना दहेज के विवाह सम्पन्न करवाये। इतना ही नहीं वर्ष 1995 में आयोजित बीजिंग अंतर्राष्ट्रीय महिला परिषद में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए वहाँ नाटक ‘‘शांतता’’ की प्रस्तुति भी दी।

आपके द्वारा लिखित 500 माहेश्वरी महिलाओं के साक्षात्कार पर आधारित पुस्तक ‘‘कठपुतली’’ भी प्रकाशित हो चुकी है। एचआईवी एड्स तथा टीबी के प्रति भी आप जनजागृति उत्पन्न कर रही हैं। अपने यूट्यूब चेनल ‘‘औंकार थेरेपी’’ से लोगों को मार्गदर्शित कर शारीरिक, मानसिक व आध्यात्मिक विकास के लिये कार्यरत हैं।


सेवा ने दिलाया सम्मान

अर्थ-फाउंडेशन मुंबई द्वारा तेजस्विनी पुस्कार 2021, ‘महेश गौरव पुरस्कार-2021’ (महेश प्रोफेशनल फोरम और महेश प्रोफेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट, पूना), ‘जिजाऊ समाजरत्न पुरस्कार’ – 2021, आईसीएआई की ओर से महिला सक्षमीकरण पुरस्कार, व्यवसायिक उत्कृष्टता पुरस्कार 2019-20 (रोटरी क्लब ऑफ श्रेयस लातूर), महाराष्ट्र प्रदेश माहेश्वरी महिला संगठन द्वारा ‘समर्पिता’ पुरस्कार-2016, ‘‘आई वालंटियर्स’’ संस्था व महाराष्ट्र फाउंडेशन, (अमेरिका) आदि सहित विभिन्न संस्थाओं से लातूर गौरव पुरस्कार, अहिल्यादेवी होलकर पुरस्कार आदि से आप सम्मानित हो चुकी हैं।

1996-1997 में सरकार की तरफ से शराब बंदी के काम के लिए सम्मानित हुई। इसके अतिरिक्त महिला और ग्रामीण विकास के लिए जिला पुलिस अधीक्षक और ‘युनिसेफ’ की तरफ से भी सम्मानित हुई। अटलांटा (अमेरिका) निवासी लेखिका जया कमलानी ने अपनी- “To India With Tough Love” पुस्तक में एक पूरा चेप्टर उनके काम पर लिखा है।

इस किताब को ‘भारत सम्मान पुरस्कार’, ‘हिंद रतन पुरस्कार’ व महात्मा गांधी पुरस्कार मिला है। वक्ता के रूप में Indian Development Services, Chicago, India Development Coalition America (IDCA) महाराष्ट्र फाऊंडेशन, अमेरिका, प्रिन्स्टन युनिव्हर्सिटी अमेरिका आदि द्वारा अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर निमंत्रित और सम्मानित हुई।


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