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ऑनलाइन जॉब को ऑफलाइन जॉब की तुलना में कमतर समझना उचित अथवा अनुचित ?

महामारी कोरोना वायरस के साथ आरम्भ हुआ ऑनलाइन जॉब अथवा नौकरी का चलन निरन्तर बढ़ता जा रहा है। इसके बावजूद आम मानसिकता के कारण ऑनलाइन जॉब/नौकरी करने वाले नौकरीपेशा लोगों को समाज और परिवार द्वारा विशेष महत्व नहीं दिया जाता क्योंकि वो लोग सारा दिन घर पर ही बैठकर अपने ऑफिस का काम निपटाते हैं। जबकि वे इसके साथ दौहरी जिम्मेदारी निभाते हैं। इससे नौकरी के साथ घर परिवार की मदद भी हो जाती है। महिलाओं के लिये तो ऑनलाइन जॉब करना वरदान साबित हुआ है फिर भी वर्तमान में पुरुषों के लिए ऑनलाइन जॉब करना उनकी योग्यता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।

ऐसे में यह विचारणीय हो गया है कि क्या ऑनलाइन कार्य के ऑफलाइन कार्य की तुलना के कमतर समझना उचित है अथवा अनुचित? आइये जानें इस स्तम्भ की प्रभारी सुमिता मूंदड़ा से उनके तथा समाज के प्रबुद्धजनों के विचार।


ऑनलाइन जॉब यानी 24×7ऑन ड्यूटी
सुमिता मूंधड़ा, मालेगांव

ऑनलाइन जॉब करने वाले ऑफिस के साथ-साथ घर और बाहर के दूसरे कार्यों में भी अपना सहयोग दे सकते हैं लेकिन ऑनलाइन जॉब में उनके ऑफिस के कार्य की कोई समय सीमा नहीं होती है बल्कि वो 24×7 ऑन ड्यूटी रहते हैं। अधिकांशत उन्हें जो कार्य सौंपा जाता है उसकी समयावधि निर्धारित कर दी जाती है जो कि कार्य के लिए आवश्यक समय से कम ही होती है जिससे उन पर कार्यभार बढ़ जाता है।

ऑनलाइन जॉब देकर कंपनी अपने ऑफिस के खर्चे तो बचाती ही है साथ ही अपने कर्मचारियों का समय भी अधिक लेती है। यह मुनाफाखोर कंपनी वाले कर्मचारियों को ऑनलाइन जॉब की सुविधा देकर दुगुना वसूलते हैं। जबकि ऑफलाइन जॉब में ऑफिस की समय सीमा और काम की सीमा निर्धारित होती है। कंपनी अपने कर्मचारियों का नाहक फायदा नहीं उठा सकती, कर्मचारियों से अधिक काम करवाने पर पार्ट टाइम और बोनस देना पड़ता है।

ऑफलाइन जॉब करने वाले घर परिवार में अपना रुतबा दिखाते हैं क्योंकि वो ऑफिस जाते हैं जबकि ऑनलाइन जॉब करने वाले अपेक्षाकृत अधिक ही काम करते हैं। ऑनलाइन जॉब करने वाले ऑफिस के लिए ही नहीं घर और परिवार के लिए भी 24×7ऑन ड्यूटी रहते हैं। जैसे एक गृहलक्ष्मी का कार्य 24×7 चलता ही रहता है वैसे ही ऑनलाइन जॉब करने वाले हमेशा व्यस्त रहते हैं और ऑफिस का काम करते हुए परिवार के साथ मस्त रहते हैं फिर भी उन्हें ऑनलाइन जॉब करने वालों से कमतर आंकना अनुचित है। हर सिक्के के दो पहलुओं की तरह ही ऑनलाइन और ऑफलाइन जॉब के नुकसान और फायदे हैं पर दोनों के कार्यों की तुलना करना अनुचित है।


स्वयं के लिए भी लाभदायक नहीं
मुकेश कुमार लखोटिया, राजस्थान

Mukesh Kumar Lakhotiya

वैसे तो यह विषय ऑनलाइन जॉब और आफलाईन जॉब में तुलना करना ही गलत है। ऐसा माना जाता है आनलाइन जॉब करने से व्यक्ति अपने परिवार के साथ समय बिता पाता है, लेकिन यह सही नहीं है। उसका समय उसका नहीं आफिस का होगा।

जबकि ऑफलाईन जॉब में उसके जॉब का समय जब तक वह आफिस में काम कर रहा होगा तब तक ही रहेगा, न कि उस समय जब वह अपने परिवार के साथ समय बांट रहा हो। आनलाइन जॉब का चलन तब-तक सही प्रतीत होता था जब तक इस महामारी करोना वायरस का असर व्याप्त था। आज के समय में आफिस के कार्यों का दवाब कितना होता है, यह किसी से छुपा नहीं है। यही दवाब जब ऑनलाइन जॉब के माध्यम से घर आ जायें तो उस व्यक्ति का अपने परिवार और समाज के लिए समय का बचाना असम्भव सा लगता है।


बहुमुखी विकास भी जरूरी
राजश्री राठी अकोला, महाराष्ट्र

परिस्थितियों के आधार पर जॉब का चुनाव निर्भर करता है, कार्य का रूप चाहे जो हो उसे कमतर आंकना उचित नहीं है। ऑफलाइन जॉब में हमारे परिचय का दायरा विस्तृत होता है, अलग अलग व्यक्तियों से मेल मिलाप होने से हमें हर क्षेत्र की जानकारी पता चलती है, जिससे हमें वर्तमान दौर की हर गतिविधियों के बारे पता रहता है। ऑफलाइन जॉब में हमारे कई मित्र बनते हैं उनके साथ छुट्टियों में कुछ प्रोग्राम बनाए जाते हैं।

यह मित्रता मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी संजीवनी का काम करती है। बाहर जाते समय हम व्यवस्थित तैयार होकर जाते हैं, अपने आप को सुव्यवस्थित रखने से आत्मविश्वास भी बढ़ता है। ऑनलाइन जॉब में व्यक्ति चार दिवारो के भीतर सिमट कर रह जाता है। वह चाहे जितना ही होशियार रहे किंतु हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर उसे आसानी से नहीं मिलते। उसका जीवन यंत्रवत हो जाता है, इसमें आर्थिक रूप से बचत भले ही हो किंतु मानसिक रूप से एक से माहौल में उबाऊ महसूस होता है। फिर भी परिवार के वातावरण और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर जॉब का चुनाव करना श्रेष्ठ होगा, कार्य के रूप के बीच तुलना करना अनुचित है।


ऑनलाइन जॉब समय की मांग
सपना श्यामसुंदर सारडा, गुजरात

sapna shyam sundar sarda

कोरोना काल के बाद जो ऑनलाइन जॉब का ट्रेंड आया हैं सचमें यह बहुत अच्छा ट्रेंड है। यह तरीका तो इससे पहले ही आना चाहिए था मगर कहते है ना हर बात का उगम किसी खास कारण के बाद ही होता है। उसी तरह कोरोना काल में जब लॉक डाउन का समय था और सभी छोटी मोटी कम्पनियाँ आर्थिक नुकसान सह रही थी, तब यह एक नायाब तरीका लोगों के ध्यान में आया कि जो काम घर बैठकर भी हो सकता है तो क्यों ना हम इस तरह की कोशिश करें। उन लोगों नें ऑनलाइन काम शुरू कर अपनी कंपनी का कामकाज भी शुरू रखा और अपने कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान होने से भी उनको बचाया।

आज देश और दुनिया में ऐसी कई कम्पनियाँ हैं, जिन्हें अपना कामकाज घर बैठे ऑनलाइन कराने से भी उनको कोई फर्क नहीं पड़ता है। उल्टा ऑनलाइन काम कराने से जो कंपनी के कर्मचारी हैं, उनके समय और देश के ईंधन की तो बचत हो ही रही है साथ में गाड़ियों का आवागमन कम होने से प्रदुषण और रास्ते के ट्रैफिक जाम या एक्सीडेंट के प्रमाण में भी कमी आयी है। ऑनलाइन काम को कम या छोटा समझना सरासर गलत धारणा है क्योंकि अगर ऑनलाइन काम कराने से किसी कंपनी को नुकसान होता तो क्यों वह अपने कर्मचारियों को हफ्ते के कुछ दिन ऑनलाइन काम कराकर पूर्ण वेतन देती।

जहाँ शारीरिक कार्य करना हो या जहां ऑफिस में जाकर ही कार्य करने की जरुरत हो वहां तो ऑनलाइन कार्य संभव ही नहीं है। मगर बहुत सारे ऐसे कामकाज हैं जो आप बाहर रहकर या कहीं भी बैठकर पूरा कर सकते हैं। इससे आपके काम की कार्यक्षमता भी बढ़ती है और आपका कार्य भी तेजी से होता है। साथ में आप अपने परिवार के साथ भी समय व्यतीत करते हैं जिससे आपके व्यावसायिक सम्बंधो के साथ-साथ आपके पारिवारिक सम्बन्ध भी अच्छे रहते है इसलिए ऑनलाइन कामकाज को कमतर आंकना या अलग नजर से देखना सरासर गलत है। आज के समय की यह माँग है कि जो काम ऑनलाइन हो सकते है उसको ऑफलाइन क्यों करायें।


कमतर नहीं ऑनलाईन जॉब
ममता लाखणी, नापासर

जॉब, सर्विस और नौकरी एक ऐसा कार्य है जो कि न केवल परिवार को आर्थिक रूप से अपितु मानसिक रूप से भी संबल प्रदान करता है। जॉब तो जॉब ही है फिर चाहे वह ऑनलाइन हो या ऑफलाइन, जॉब से पैसा आता है और जो जॉब करता है, उसकी संतुष्टि पर निर्भर करता है, कि वह किस प्रकार से जॉब करने में संतुष्ट महसूस करता है।

यदि उसे शारीरिक व मानसिक रूप से ऑनलाइन जॉब करने में कोई तकलीफ नहीं है, तो इसमें कोई बुराई नहीं है और यदि उसे ऑफलाइन जॉब करने में सहज महसूस होता है तो उसे ऑफलाइन को प्राथमिकता देनी चाहिए। अपने घर, परिवार व स्वयं को सहज रूप से जो तरीका स्वीकार है, उसे सफलता दिलाने में सार्थक सिद्ध होता है, फिर चाहे वह ऑनलाइन हो या ऑफलाइन। सत्यता यही है कि ऑनलाइन जॉब किसी भी मायने में ऑफलाइन जॉब से कमतर नहीं है, अपितु यह तो जॉब करने वाले पर निर्भर करता है कि वह किस प्रकार की जॉब स्वीकार करें, जिसे करने में सहज महसूस करें।


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