‘कोरोना’ से डरो ‘ना’, समझदारी से लड़ो

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इस समय हमारे देश ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व में कोरोना को लेकर भारी कोहराम मचा हुआ है। हमारे माननीय प्रधानमंत्री के शब्दों में इस महामारी की स्थिति विश्वयुद्ध से भी अधिक भयावह है। ऐसे में आखिर हमारे मन में कई प्रश्न भी उठते होंगे और भविष्य की भयावह कल्पना से भय भी उत्पन्न होता ही होगा। लेकिन इसका समाधान यह नहीं है। सरकार इससे देश को बचाने के लिये अपनी परी सामर्थ्य लगा रही है और हमें उसे ऐसे दौर में सम्बल देना है। याद रखें यदि हममें आत्मविश्वास है, तो सफलता अवश्य ही मिलेगी।

त्रिभुवन काबरा, वडोदरा

कोरोना कहाँ से आया? कैसे आया? क्यों आया? कैसे बढ़ा? हमारी सरकार क्या कर रही थी? हमारा गुप्तचर विभाग क्या कर रहा था? हमारा मेडिकल विभाग क्या कर रहा था? समय पर इसपर रोक क्यों नहीं लगाई गई? हमारी वजह से इस रोग का फैलाव होगा क्या ? आदि अनेक सवाल देश की जनता द्वारा किये जा रहे हैं। देश की जनता को यह समझना चाहिए कि यह समय सरकार या किसी और पर आरोप प्रत्यारोप करने का नहीं, बल्कि समस्या की गंभीरता को समझकर इससे उभरने के लिए सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों का पूर्णतः पालन करने का है।

यह हमारा कर्तव्य भी है और ऐसा करना हमारी सच्ची देश सेवा भी । प्रथम चरण में सरकार ने 21 दिनों का सम्पूर्ण लॉक डाउन का निर्देश दिया था किन्तु उस दौरान कुछ लोगों ने सार्वजनिक जमावड़ा एवं सीमाओं का उल्लंघन किया जो कि इस वायरस के विस्तृत होने की गति को बढ़ाने में मददगार साबित हुआ। इसके कारण सरकार को मजबूरन लॉक डाउन की अवधि को बढ़ाना पड़ा और तब लॉकडाउन का दूसरा चरण शुरू हुआ।

इनसे लें राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा:

दूसरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं, जिनको अपने पूज्य पिताजी के देहांत का दुःखद समाचार कोविड-19 की सभा में प्राप्त हुआ, पर वे विचाराधीन मुद्दे के महत्व को देखते हुए सभा में अंत तक उपस्थित रहे और मंत्री समाप्त होने के बाद ही अपनी जगह से उठे। उन्होंने लॉकडाउन में लागू प्रतिबंध की वजह से तथा उत्तर प्रदेश की जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने का निर्णय लिया।

साथ ही साथ अपने परिवारजनो को अंतिम संस्कार करते वक्त सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की सख्त हिदायत भी दी जो कि अपने आप में कर्त्तव्य की प्रतिबद्धता का एक अद्वितीय और अनुकरणीय उदाहरण है। यह प्रसंग, रामायण में अपने पिता के अंतिम संस्कार के लिए अनुपस्थित भगवान श्री रामचंद्र जी की याद दिलाता है। हमारे देश की जनता आर्थिक रूप से मुख्यत: तीन वर्गों में बंटी हुई हैं, उच्च वर्ग, मध्यम वर्ग एवं निम्न वर्ग।

जैसा की हम सभी जानते हैं की जब कभी भी देश पर किसी भी तरह की आपदा अथवा विपदा आती हैं तो इसका सबसे अधिक नुकसान निम्न वर्ग को ही भुगतना पड़ता है। शायद यही वजह है कि वह लोग ही सबसे अधिक तनाव में एवं आर्थिक रूप से कमज़ोर पाए जाते हैं। फिर भी याद रखें हमें हर हाल में धैर्य रख इस महायुद्ध में कोरोना को हराना है।

मानवता के पुजारी हैं कोरोना योद्धा:

उन सभी कोरोना हीरो को मेरा हार्दिक नमन, जिन्होंने देशवासियों की सेवा के लिए खुद को पूर्ण रूप से भारत माता के नाम न्योछावर कर दिया है। इन हीरो की श्रेणी में डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, सपोर्ट स्टॉफ, पुलिस, सफाई कर्मी, सुरक्षा दल, सिक्योरिटी गार्ड, ड्राइवर, इलेक्ट्रीशियन आदि ऐसे सभी लोग शामिल हैं, जो प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से इस लड़ाई में अपनी पूरे सामर्थ्य के साथ अपना उत्कृष्ट योगदान दे रहे हैं। देश के औद्योगिक घराने तथा अनेकों सामाजिक संस्थाएं भी इस संकट की घडी में सरकार को प्रत्येक राहत कार्य में यथा संभव मदद कर रहे हैं। देश में अनेकता के बावजूद एकता का सुखद माहौल नजर आ रहा है जो कि भारत की शान में चार चाँद लगाता है। इन प्रतिकूल और विकट परिस्थितियों में केंद्र सरकार तथा सभी राज्य सरकारों एवं उनके कैबिनेट द्वारा लिए गए सभी निर्णय बेहद सराहनीय है। कोरोना वायरस महामारी के इस कठिन वक्त में पूरी दुनिया एक तरह से घरों मे स्थिर सी हो गयी है। इस वक्त खाद्य सामग्री की सबसे ज्यादा आवश्यकता है और साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन पूरी निष्ठा से करना है। हमें जान और जहान दोनों को बचाना है, ताकि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को खुशहाल और स्वस्थ पृथ्वी की अद्भुत सौगात दे सकें।

देश हित में सरकार उठा सकती है ये कदम:

जिस तरह सरकार “रेड जोन” की परिधि में नहीं आने वाले और आवश्यक वस्तुओं के निर्माण तथा निर्माण कार्य कार्य में आवश्यक सेवा देने हेतु कार्यरत हैं, उनको सभी आवश्यक मापदंड के अंतर्गत सुरक्षा के नियमों का पालन करते हुए कार्य शुरू करने की अनुमति दी है। इसी के अन्तर्गत सरकार कुछ सुधारात्मक कदम और भी उठा सकती है। जैसे सरकार को छोटे दुकानदारों को कुछ घंटो के लिए अपना व्यवसाय शुरू करने की अनुमति देनी चाहिए।

सभी दुकानदारों को व्यवसाय करने का मौका मिल सके, इसके लिए एक एरिया में एक दिन 1, 3, 5 नंबर की दुकाने तथा दूसरे दिन 2, 4, 6 नंबर की दुकाने खोली जा सकती हैं। इससे सुरक्षा और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन भी होगा और देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त करने में मदद भी होगी। प्रत्येक वर्ग के लोगो को उनकी जरुरत के हिसाब से पैकेज देना चाहिए। आयकर नियमावली में ऐसे उदार संशोधन करने चाहिए, जिससे एक तरफ करदाताओं को राहत मिले और कर दाताओं की संख्या में भी वृद्धि हो सके।

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