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नृत्य गुरू- रुपाली सोनी

राजस्थानी नृत्य घूमर की बात हो या फिर कथक नृत्य की शहर की प्रतिभा नवीन सोनी की धर्मपत्नी रुपाली सोनी का नाम सीहोर शहर के हर व्यक्ति की जुबां पर सबसे पहले आता है। मंच पर जब रुपाली कथक, एकल नृत्य, गरबा या समूह में प्रस्तुति देती हैं तो हर व्यक्ति उनकी प्रतिभा की तारीफ़ करने लगता है। रुपाली शहर मे ‘‘मिनी इला अरुण’’ के नाम से भी जानी जाती हैं, तो अब अपने नृत्य प्रशिक्षण केंद्र के माध्यम से नृत्य गुरू के रूप में नयी प्रतिभाओं को भी तराश रही हैं।

सीहोर ग़ल्ला मंडी निवासी स्व. श्री देवकीनंदन एवं कान्ता भट्टर की मझली सुपुत्री रुपाली को उनकी प्रतिभा के लिये कई समाज सेवी संस्था, कला केन्द्र, एजुकेशन इंस्टिट्यूट द्वारा शहर, जिला, प्रदेश के साथ राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका हैं।

रुपाली का जन्म वर्ष 1978 में म.प्र. के शाजापुर मे हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा भोपाल एवं शाजापुर में हुई। रुपाली को बचपन से ही नृत्य का बेहद शोक था। इसी को देखते हुए इनके माता पिता ने सीहोर के प्रसिद्ध संगीत गुरु पंडित वासुदेव मिश्रा से संपर्क किया और रुपाली की जिज्ञासा बताई।

तब रुपाली की उत्सुकता देखकर पं. मिश्रा जी ने रुपाली को अपनी शिष्या बनाने की अनुमति प्रदान की। वे संगीतिका संगीत महाविद्यालय की कथक सीखने वाली प्रथम बैच की छात्राओं मे से एक थी। रुपाली ने बी.कॉम शिक्षण पूर्ण किया तथा वर्ष 2000 तक कथक में डिप्लोमा भी हासिल किया था।


विवाह भी बना सहयोगी

वर्ष 2000 मे रुपाली ने शादी के बाद कुछ वर्षो का विराम लिया परन्तु अपनी नृत्य के प्रति लगन व उत्साह को देखते हुये रुपाली ने विवाह के पश्चात भी अपने पति एवं परिवार की सहमति लेकर नृत्य के क्षेत्र मे अपना अध्ययन चालू रखा इसका परिणाम ये हुआ कि वर्ष- 2020 मे रुपाली ने नृत्य के क्षेत्र में स्नातक उपाधि बी.डांस हासिल कर डबल ग्रेजुएशन कर सभी को चौका दिया।

रुपाली सोनी

अब वे नृत्य के क्षेत्र में कला और संस्कृति से जुड़े शासकीय एवं अशासकीय मंचों पर अपनी प्रस्तुति के द्वारा उपस्थित जनसमूहों को मंत्र मुग्ध करने लगी।

शहर की इस उभरती कलाकार को म. प्र. शासन द्वारा आयोजित युवा महोत्सव में कत्थक की शानदार प्रस्तुति देने को लेकर वर्ष 1994 से 1996 मे जिले के साथ साथ प्रदेश में भी ग्वालियर एवं बैतूल में प्रथम स्थान प्राप्त कर सम्मानित किया गया था।


नृत्य ने दिलाया सम्मान

रुपाली सोनी को म.प्र. पूर्व क्षेत्रीय प्रादेशिक माहेश्वरी युवा संगठन पुणे, संगीतिका म्यूजिक कॉलेज सीहोर, खेल एवं युवा कल्याण विभाग सीहोर, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खेरागढ़, भारतीय संस्कृति के संरक्षण सवर्धन एवं उत्थान के लिये काम करने वाले विद्या भारतीय संस्कृति शिक्षा संस्थान हरियाणा, नगर पालिका सीहोर, जनपद पंचायत सीहोर, जिला निर्वाचन कार्यालय सीहोर, नवांकुर क्लब शाजापुर, दुर्गा उत्सव समिति सीहोर, नवोदित कला मंच सीहोर, साहित्य साधना मंच सीहोर, दूरदर्शन ज्ञानदीप मंडल सीहोर, माहेश्वरी समाज सीहोर, सिद्धपुर सांस्कृतिक चेतना मंच सीहोर, सीहोर सांस्कृतिक मंच सीहोर, सूरत जिला माहेश्वरी सभा अभिरुचि गरबा महोत्सव सीहोर, अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महिला संगठन देहली, वृहत्तर कोलकाता प्रादेशिक माहेश्वरी युवा संगठन, माहेश्वरी समाज सूरत, वनिता विश्राम वुमेंस कॉमर्स कॉलेज सूरत, आल इंडिया कल्चरल सोसाइटी कटक (उड़ीसा) आदि अनेकानेक संस्थाओ द्वारा सम्मानित किया गया।

सम्मान की इसी श्रृंखला में दैनिक भास्कर सीहोर द्वारा वर्ष 2019 में स्वच्छता स्लोगन में प्रथम आने पर सम्मानित किया गया। वहीं पत्रिका समूह द्वारा कला के क्षेत्र में वर्ष 2019 में रुपाली की उपलब्धि को देखते हुये पत्रिका अचीवर अवार्ड- 2019 से नवाज़ा गया। रुपाली को पूर्व राष्ट्रपति स्व श्री शंकरदयाल शर्मा की माताजी द्वारा भी सम्मानित किया गया।


कलाकार से अब नृत्य गुरू का सफर

रुपाली सोनी ने अपनी कला को आगे बढ़ाते हुये वर्ष 2014 से शहर की बच्चियों को कला के क्षेत्र में आगे बढ़ाने का प्रण लिया और सरस्वती कथक कला केन्द्र की वर्ष 2016 में नींव रखी। इस संस्था के माध्यम से शहर की उभरती कलाकारों को कथक नृत्य के साथ फोक नृत्य, गरबा डांडिया, धार्मिक एवं देशभक्ति नृत्यों के माध्यम से तराशने का कार्य करती हैं एवं समय-समय पर सेमिनार एवं मंच उपलब्ध कराया जाता है।

इसी श्रेणी में रुपाली एवं उनकी संस्था की टीम को लगातार 3 वर्षो से शहर की विभिन्न गरबा समितियों द्वारा प्रथम स्थान प्राप्त हुआ तथा 15 अगस्त- 2019 मे शासकीय कार्यक्रम में जिले के सभी स्कूलों से मुकाबला करते हुये द्वितीय स्थान एवं वर्ष- 2020 के गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम में प्रथम स्थान पाने का सुनहरा अवसर मिला।

मार्च- 2020 में कोविड-19 की परिस्थितियों में भी हार माने बिना रुपाली ने ऑनलाइन वर्चुअल प्लेटफार्म के माध्यम से कथक नृत्य एवं कथक योगा सिखाना चालू किया। अब संस्था ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों प्लेटफार्म पर क्लासिकल नृत्य का प्रशिक्षण देने का कार्य कर रही हैं।

संस्था की छात्राऐं राजा मानसिंह तोमर कला एवं संगीत विश्वविद्यालय द्वारा डिप्लोमा एवं डिग्री कोर्स की परीक्षा देकर अपने कैरियर को संवार रही हैं। निकट भविष्य में बहुत जल्दी संस्था अपना खुद का कॉलेज शुरू करने की दिशा में कार्य कर रही हैं, संस्था का उद्देश्य उभरती प्रतिभाओं को सही मंच तक पहुंचाना एवं उनके कैरियर को एक नई दिशा देना है।

आज संस्था की अनेक प्रतिभाएं स्कूल, कॉलेज एवं विभिन्न मंचों पर संस्था का नाम रोशन कर संस्था को एक नई पहचान दिला रही हैं।


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