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हस्तरेखा से आरोग्य की राह- डॉ पुरुषोत्तम बिदादा

वैसे तो हैदराबाद निवासी डॉ. पुरुषोत्तम बिदादा सिद्ध हस्त आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं, लेकिन उनकी पहचान इससे भी आगे बढ़कर ‘‘नाड़ी व हस्तरेखा विज्ञान’’ से रोग के निदान की उनकी विशिष्ट शैली के कारण है। डॉ. बिदादा ने ज्योतिष की हस्तरेखा जैसी विद्या का उपयोग निरामय जीवन की राह बताने के लिये किया है।

हैदराबाद में डॉ. पुरूषोत्तम बिदादा की विशिष्ट पहचान है। वैसे तो वे बी.ए.एम.एस. उपाधिधारी आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं, और उन्होंने इस क्षेत्र द्वारा जनहित में कई चिकित्सा शिविरों का आयोजन कर मानवता की सेवा की है। इसके बावजूद मानव को स्वस्थ जीवन देने की उनकी चाह पूरी नहीं हुई और यही चाह उन्हें हस्तरेखा विज्ञान की ओर ले गई।

डॉ. पुरुषोत्तम बिदादा की नाड़ी विज्ञान व हस्तरेखा विज्ञान के क्षेत्र में ऐसी कई विस्मयकारी शोध हैं, जो मानव को स्वस्थ जीवन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वर्तमान में वे ‘आरोग्य निकेतन’ नाम से हैदराबाद के गोशामहल व हिमागतनगर क्षेत्र में दो आयुर्वेदिक चिकित्सालय का संचालन कर रहे हैं।


आयुर्वेद के साथ ज्योतिष की शिक्षा

डॉ. बिदादा का जन्म 9 मई 1962 को हैदराबाद में हुआ। बचपन से ही डॉ. वेणूगोपाल व्यास का प्रभाव रहा। जिसके चलते हिन्दी प्रचार सभा हैदराबाद से ‘हिन्दी विद्वान’ की उपाधि पूर्ण की। नानकराम साइन्स कॉलेज से बी.एससी. वर्ष 1983 में किया व डॉ. बीआरसीआर आयुर्वेद महाविद्यालय, हैदराबाद से बीएएमएस वर्ष 1987 में किया।

बनारस में ‘गुरू शिष्य परम्परा’ के तहत नाडी विज्ञान में कुशलता हासिल की। वर्ष 2005 में पोट्टी श्रीरामुलु तेलुगु विश्वविद्यालय से ज्योतिष विज्ञान में स्नातकोत्तर उपाधि हासिल की। बचपन से ही अनेक सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सेदारी की। ज्ञानवर्धक संघ की स्थापना से अभी तक जुड़े हैं।


नाड़ी विज्ञान व हस्तरेखा का किया समन्वय

आंध्रप्रदेश आयुर्वेद सम्मेलन के मंत्री के रूप में वृहद हैदराबाद आयुर्वेद सम्मेलन के मंत्री व उपाध्यक्ष अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन, नईदिल्ली के प्रचार मंत्री तथा इसी सम्मेलन की कार्यकारिणी सदस्य के रूप में अपनी सेवाएँ दे चुके हैं। राजस्थानी स्नातक संघ की पत्रिका ‘राजस्थानी स्नातक’ का संपादन भी किया है।

अब तक तेलंगाना व आंध्र प्रदेश के लगभग 12 जिलों में 300 से अधिक नि:शुल्क आयुर्वेद शिविरों का जनहित में संचालन किया है। उनके आयुर्वेद व चिकित्सा हस्तरेखा विज्ञान पर कई लेख प्रकाशित हुए हैं। गत 15 वर्षों से निरंतर हैदराबाद से प्रकाशित होने वाले हिन्दी दैनिक ‘स्वतंत्र वार्ता’ में हर मंगलवार आयुर्वेद व स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर जनता द्वारा पूछे गए प्रश्नों का ‘आयुर्वेदिक स्वास्थ्य प्रश्नोत्तरी’ में उत्तर देते रहे हैं।

केंद्र व राज्य सरकार तथा विभिन्न संगठनों में स्वास्थ्य व हस्तरेखाओं पर व्याख्यान दिए हैं। उन्होंने रोग निदान का एक नया तरीका ‘नाड़ी विज्ञान व हस्तरेखा विज्ञान’ के समन्वय से खोजा है।


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