पूर्ण वैज्ञानिकता पर आधारित – गर्भ संस्कार

Date:

संस्कार ही मानव को पशुओं से पृथक करते हैं। हमारे देश में इन्हें 16 संस्कारों में समाहित किया है, जिनकी शुरूआत होती है, गर्भ संस्कार से। आमतौर पर लोग कुछ अन्य संस्कारों के साथ इसकी भी उपेक्षा कर देते हैं, जबकि यह पूर्ण वैज्ञानिकता पर आधारित एक अनिवार्य संस्कार है।

Dheera Somani

यदि अपनी संतान को संस्कार नहीं देंगे तो आप अपनी संतति और संपत्ति दोनों को नहीं बचा पायेंगे और संतान को संस्कार देने की शुरूआत गर्भसंस्कार से ही की जानी चाहिए। गर्भसंस्कार जैसा नाम से स्पष्ट है गर्भावस्था के दौरान दिये जाने वाले संस्कार। शास्त्रों के अनुसार सौलह संस्कार में से सबसे महत्वपूर्ण है गर्भसंस्कार।

वैदिक युग से आधुनिक युग तक जितने भी महान व्यक्ति हुए हैं उनके महान होने के पीछे गर्भसंस्कार ही कारणभूत हैं। हमारे प्राचीन इतिहास में गर्भसंस्कार की आध्यात्मिक सफलता के कई उदाहरण हमने देखे हैं। जैसे महान यौद्धा अभिमन्यू ने अपनी माता के गर्भ में ही चक्रव्यूह को भेदना सीख लिया था।

भक्त प्रहलाद दानव कुल में जन्म लेने के बाद भी अपनी माता द्वारा गर्भावस्था में की जाने वाली प्रवृत्तियों के कारण भगवान नारायण के परम भक्त बने। शिवाजी महाराज की माता जीजाबाई का उदाहरण जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भी अपनी संतान को गर्भसंस्कार देकर महान बनाया।


सफलता के पीछे गर्भ संस्कार

आधुनिक समय के भी ऐसे कई उदाहरण हमारे सामने है जहां जाने अंजाने में माता-पिता द्वारा किये गए प्रयासों का इनकी संतान पर असर स्पष्ट दिखाई देता है। उदाहरण के लिए बेडमिंटन खिलाड़ी सानिया नेहवाल, प्रसिद्ध गायक सोनू निगम, तबला वादक जाकिर हुसैन साहब इन सभी की कला कहीं न कहीं इनके गर्भसंस्कार की ही देन है। गर्भसंस्कार सिर्फ वैदिक विज्ञान ही नहीं है बल्कि ये मार्डन साइंस भी है।

आधुनिक रिसर्च के बाद कई आश्चर्यजनक तथ्य सामने आए हैं। जैसे- शिशु के दिमाग का 70 प्रतिशत विकास गर्भावस्था के दौरान ही हो जाता है। गर्भावस्था के तीसरे महीने से शिशु की श्रवण शक्ति विकसित हो जाती है। शिशु गर्भ में सुन सकता है, समझ सकता है और याद भी रख सकता है।

इसलिए तो वो अपनी मातृभाषा बिना सिखाए ही बोलने लगता है क्योंकि गर्भावस्था के दौरान ही वो उसे सीख लेता है। माता के विचार, प्रक्रिया और आसपास के वातावरण का शिशु पर सीधा असर पड़ता है।


गर्भसंस्कार के चमत्कारी फायदे

गर्भ संस्कार के पालन से इच्छित गुणवाली संतान प्राप्त हो सकती है, जो गुण माता-पिता में न हों परंतु वो अपनी संतान में लाना चाहते हो तो वो भी गर्भ संस्कार के पालन से संभव होता है। गर्भ संस्कार के पालन से अनुवांशिक रोगों को नियंत्रित किया जा सकता है।

होने वाली संतान का मानसिक, शारीरिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक हर तरह से संपूर्ण विकास किया जा सकता है। उसमें अच्छी आदतें और संस्कार का सिंचन किया जा सकता है। गर्भ संस्कार के पालन से माता भी गर्भावस्था के दौरान होने वाले मानसिक तनाव से मुक्त रह सकती है और अपनी गर्भावस्था की यात्रा को आनंदपूर्ण तथा प्रसव के समय को आसान बना सकती है।


क्या है गर्भ संस्कार

गर्भ संस्कार मात्र कोई धार्मिक क्रिया नहीं है ये आचार विचार में बदलाव लाने की प्रक्रिया है। गर्भ संस्कार ये बताता है कि गर्भस्थ स्त्री को कैसी दिनचर्या का पालनकरना चाहिये ताकि श्रेष्ठ गुणों वाली संतान की प्राप्ति हो सके। गर्भसंस्कार गर्भस्थ शिशु का मानसिक आहार है। शरीर के पोषण के लिए जिस प्रकार भोजन की आवश्यकता हर रोज रहती है, ठीक उसी प्रकार गर्भस्थ शिशु के श्रेष्ठ विकास के लिए गर्भ संस्कार का पालन भी हर रोज होना चाहिए।

गर्भ संस्कार द्वारा शिशु के 90 वर्षों का विकास 9 महिनों में किया जा सकता है। यदि हमें फल अच्छा चाहिए तो बीज भी अच्छा होना चाहिए क्योंकि ‘‘सुधार बीज में हो सकता है, वृक्ष में नहीं।’’ तो क्यों न हम मिलकर गर्भ संस्कार के इस ज्ञान को समाज के हर घर तक पहुँचायें और एक स्वस्थ और संस्कारवान समाज की नींव तैयार करें। नींव मजबूत होगी तभी तो उस पर बनी इमारत भी मजबूत बनेगी।


Sri Maheshwari Times
Sri Maheshwari Times
Monthly Maheshwari community magazine connecting Maheshwaris round the globe.

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

Burberry is the First Brand to get an Apple Music Channel Line

Find people with high expectations and a low tolerance...

For Composer Drew Silva, Music is all About Embracing Life

Find people with high expectations and a low tolerance...

Pixar Brings it’s Animated Movies to Life with Studio Music

Find people with high expectations and a low tolerance...

Concert Shows Will Stream on Netflix, Amazon and Hulu this Year

Find people with high expectations and a low tolerance...