Thursday, February 26, 2026
10.4 C
London

कालगणना का महत्वपूर्ण आधार- पंचांग

भारतीय कालगणना का आधार पंचांग भी दीपावली पर महालक्ष्मी पूजन में शामिल होता है। आमतौर पर लोगों ने इसे यहीं तक सीमित कर ज्योतिषियों तथा पंडितों की विषय वस्तु बनाकर रख दिया है। जबकि यह हमारे लिये वर्षभर उपयोगी होता है, बस जरूरत है ऐसे पंचांग के चयन की, जिसे हम सहजता से समझ सकें।

क्या है पंचांग

पंचांग शब्द का शाब्दिक अर्थ है, पांच अंगों की जानकारी। काल गणना में पांचों प्रमुख अंगों की जानकारी जो दे उसे ही पंचांग कहते हैं। इनमें प्रमुख पांच अंग हैं, वर्ष, माह, वार, तिथि और नक्षत्र। वास्तव में देखा जाए तो स्थूल रूप से पंचांग की शुरुआत इन्हीं के लिए हुई थी, जो कलांतर में सतत शोध से और भी गहन व सूक्ष्म होता चला गया। वर्तमान में पंचांग ज्योतिष का आधार स्तंभ है, जिसके आधार पर ही कोई ज्योतिषी फलकथन करता है।


देश-काल की जानकारी का आधार

सर्वप्रथम तो हम पंचांग से संबंधित शहर की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसमें उस शहर में संबंधित दिन का दिनमान, सूर्योदय-सूर्योस्त का समय, चंद्रोदय-चंद्रास्त तथा खगोलिय जानकारी के लिए संबंधित शहर के अक्षांश व देशांश शामिल होते हैं। वर्तमान में पंचांग में देश के सभी प्रमुख शहरों के साथ ही लगभग संपूर्ण विश्व के प्रमुख शहरों के देशान्तर भी दिए होते हैं। इनके द्वारा कुछ गणना कर हम इन सभी शहरों के संबंध में भी यह सभी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।


तिथि-वार आदि की जानकारी

पंचांगों में ईसवी वर्ष के अनुसार दिनांकों के साथ लगभग उनके सामने ही उस दिनांक की तिथि भी अंकित होती है। उसके आगे संबंधित तिथि की समाप्ति का समय ज्योतिषिय कालगणना के अनुसार घटी-पल में और उसके आगे वर्तमान कालगणना पद्धति के अनुसार घंटा-मिनट में भी दिया होता है।

गत दिनांक की तिथि समाप्ति से उक्त दिनांक की तिथि समाप्ति तिथि तक संबंधित तिथि रहती है। अतः हम शुद्धतापूर्वक किसी भी दिनांक को किसी भी समय रहने वाली तिथि को ज्ञात कर सकते हैं। इस सारिणी में संबंधित दिनांक के वार के साथ ही नक्षत्र, योग, दिनमान, सूर्योदय-सूर्योस्त आदि की जानकारी भी दी जाती है। वर्तमान में इसी सारणी में संबंधित दिवस के व्रत-त्योहार की जानकारी भी अंकित की जाती है।


वर्तमान में अत्यंत सहज मुहूर्त

कहा जाता है कि सही समय पर किसी कार्य के शुभारंभ का अर्थ ही उसकी आधी सफलता है। इसीलिये हमारी संस्कृति में हर शुभ कार्य के लिए मुहूर्त देखा जाता है। यह कार्य सामान्यतः ज्योतिषाचार्य ही करते आये हैं, लेकिन अच्छे व सरल पंचांगों से आम व्यक्ति भी आसानी से मुहूर्त ज्ञात कर सकता है।

जैसे उदाहरणार्थ उज्जैन से प्रकाशित श्री विक्रमादित्य पंचांग में प्रारम्भ के पृष्ठों में विभिन्न कार्यों के लिये मुहूर्त शुद्ध कर दिए होते हैं। अतः पाठक इनके द्वारा अपने इच्छित कार्य के लिये मुहूर्त को देख सकते हैं। इतना ही नहीं विवाह जैसे गहन अवसरों के लिये भी सामान्यतः घर बैठे मुहूर्त देखा जा सकता है।

इसके लिये वर-वधू की चंद्र राशि के अनुसार विवाह मुहुर्त शुद्धता पूर्वक दिये जाते हैं। इनमें अतिश्रेष्ठ, पूजा योग्य (अर्थात् मध्यम) व नेष्ट (त्याज्य) का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। चौघड़िये भी सूर्योदय के अनुसार स्पष्ट किये जा सकते हैं।


कई उपयोगी जानकारियों का खजाना

ज्योतिष के विशेषज्ञ तिथि आदि की गणना वाले पृष्ठ के नीचे दी गई ग्रह स्थिति और लग्न मान से गणना कर जन्म कुंडली आदि का निर्माण जैसे समस्त ज्योतिषिय कार्य कर सकते हैं। वैसे इसके लिये ज्योतिष की कम से कम सामान्य जानकारी होना आवश्यक है। फिर भी इसमें सूर्योदयकालीन समस्त ग्रह स्पष्ट इस तरह किए जाते हैं कि इनसे बड़ी आसानी से संबंधित समय व शहर के अनुसार ग्रह स्पष्ट किये जा सकते हैं।

वर्तमान में पंचांग अत्यंत वृहद रूप ले चुके हैं। इनमें सूर्य व चंद्र ग्रहण की स्पष्ट स्थिति उसके ग्रहणकाल के अनुसार तो दी ही जाती है, साथ ही देश आदि के लिये वर्षफल भी स्पष्ट होते हैं। इनके साथ जातक का सामान्य राशिफल भी स्पष्ट होता है।

और भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां पंचांगकर्ता शामिल करते हैं, जैसे ‘श्री विक्रमादित्य पंचांग’ में अनिष्टकारी ग्रहों की शांति के उपाय, कुंडली मिलान, स्वप्न विचार, वैधव्य, विष कन्या तथा मांगलिक योग, व्यापार भविष्य आदि कई जानकारियां दी गई हैं।


Hot this week

Varshika Gaggar को अमेरिका मे गोल्ड मेडल

नागौर। स्व. श्री महादेवजी एवं स्व. श्रीमती गीता देवी...

Sri Maheshwari Times- February 2026 Edition

Check out Sri Maheshwari Times February 2026 Edition on...

Ashva Ratna Mudra for Concentration

अश्व रत्न मुद्रा (Ashva Ratna Mudra) का अभ्यास एकाग्रता...

साझा संस्कृति के आधार- National Festivals

आप सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। हमारा...

Kale Til Ke Kachuriya

यह गुजराती डिश है पारंपरिक और ठंड में, उत्तरायण...

Topics

Varshika Gaggar को अमेरिका मे गोल्ड मेडल

नागौर। स्व. श्री महादेवजी एवं स्व. श्रीमती गीता देवी...

Sri Maheshwari Times- February 2026 Edition

Check out Sri Maheshwari Times February 2026 Edition on...

Ashva Ratna Mudra for Concentration

अश्व रत्न मुद्रा (Ashva Ratna Mudra) का अभ्यास एकाग्रता...

साझा संस्कृति के आधार- National Festivals

आप सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। हमारा...

Kale Til Ke Kachuriya

यह गुजराती डिश है पारंपरिक और ठंड में, उत्तरायण...

Aarav Daga बने चैंपियन ऑफ चैंपियंस

बठिंडा। आरव डागा (Aarav Daga) सपुत्र राजेश डागा ने...

Pallavi Laddha को शक्ति वंदनम पुरस्कार

भीलवाड़ा। अखिल भारतीय माहेश्वरी महिला अधिवेशन अयोध्या में आयोजित...

Babulal Jaju को राष्ट्रीय स्तरीय पर्यावरण पुरस्कार

भीलवाड़ा। इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एवं कल्चरल हेरिटेज...
spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img