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भारत सिर्फ भारत रहे या इंडिया

हमारे देश के आजाद होने के पूर्व अंग्रेजी शासनकाल में इसका नाम इंडिया था। 15 अगस्त सन् 1947 में देश आजाद हुआ तबसे हम इसका नाम हिन्दी में ‘‘भारत’’ कर चुके हैं। इसके बावजूद अंग्रेजी में आज भी हमारे देश का नाम ‘‘इंडिया’’ ही है। अत: हिन्दी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में देश के दो नाम हो गये हैं। ऐसे में अब आवाज उठने लगी है कि जब देश आजाद हो गया है तो क्यों न इसका नाम अंग्रेजी में भी ‘‘भारत’’ ही किया जाऐ।

ऐसे में यह विषय विचारणीय हो गया है कि ‘‘भारत’’ सिर्फ भारत रहे या ‘‘इंडिया’’ भी? आइये जानें इस स्तम्भ की प्रभारी सुमिता मूंदड़ा से उनके तथा समाज के प्रबुद्धजनों के विचार।


भारत तो सिर्फ भारत ही है
पू. स्वामी श्री गोविंद देव गिरिजी

गोविंद देव गिरिजी

आज की युवा पीढ़ी ने भारत को तो केवल ‘भारत’ ही बोलना चाहिए, हम इंडिया क्यों बोलें? हमारे देश का नाम हजारों सालों से भारत ही रहा है।

‘‘मैं भारत हूं फाउंडेशन’’ जो आज अंतरराष्ट्रीय संस्था बन चुकी है, उनके विचारों व कार्यों का मैं सम्मान करता हूं और आशीर्वाद देता हूं कि वे अपने इस राष्ट्रीय नैतिक अभियान में सफल हों।

ताकि विश्व में भारत को केवल ‘भारत’ ही बोला जा सके क्योंकि मेरे देश का नाम हजारों सालों से ‘भारत’ ही रहा है, अब तो केवल ‘भारत’ ही रहे। शुभ आशीर्वाद!


गुलामी का प्रतीक है ‘‘इंडिया’’
श्याम जाजू (पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भाजपा)

श्याम जाजू

वास्तव में देखा जाए तो हमारे देश का मूल नाम ही भारत है, ‘‘इंडिया’’ नहीं।

‘‘इंडिया’’ नाम तो अंग्रेजों ने इसे दिया था। वर्तमान में हमारे देश को स्वतंत्र हुए एक अरसा हो चुका है, फिर भी यदि हम ‘‘इंडिया’’ नाम को गुलामी के प्रतीक के रूप में ढो रहे हैं, तो यह हमारा सिर्फ ‘‘दुर्भाग्य’’ ही है और निष्क्रियता।

अत: चाहे हिन्दी हो या अंग्रेजी हमारे देश का नाम तो सिर्फ और सिर्फ ‘‘भारत’’ ही होना चाहिये।


इंडिया पिछड़ेपन का पर्याय
शोभा सादानी (राष्ट्रीय महामंत्री, मैं भारत हूँ फाउण्डेशन)

शोभा सादानी

वरिष्ठों के ज्ञान की बुनियाद अनुभव मजबूत नींव से बनी होती है, जो हर परिस्थिति में उनके साथ होती है और उसके लिए असनातन भारत और उसकी पुराण सभ्यता से हम सब ही परिचित हैं।

अंकगणना, ज्योतिष विद्या, आयुर्वेद, योग, प्राणायाम, सौर मंडल का ज्ञान, क्या नहीं दिया विश्व को भारत ने? लेकिन आज जब हमें ये पता चलता है कि चालकी से थोपे गए इंडिया नाम का कैम्ब्रिज डिक्शनरी में अर्थ है, पिछड़े वर्ग के लोग, तो अपमानजनक लगा।

विश्व गुरु भारत पर करीब 200 वर्ष शासन कर दासत्व के अर्थ वाला नाम छोड़कर अंग्रेज चले गए। आज भी प्रमाणित है कि ग्रीक और रोम से विद्यार्थी चाणक्य, द्वारा स्थापित नालंदा विश्वविद्यालय पढ़ने आते थे, लेकिन हमें फिर भी पिछड़ा समझ रहे हैं।

जागो भारतीय ‘‘मैं भारत हूं फाउंडेशन’’ के माध्यम से आपका आह्वान करती हूँ कि अपनी युवा पीढ़ी को इस बात से सतर्क करें।


भारत बोलें, गौरवान्वित अनुभव करें
डॉ.गोविन्द माहेश्वरी (निदेशक, ALLEN कोटा)

भारत बोलें, गौरवान्वित अनुभव करें
डॉ.गोविन्द माहेश्वरी (निदेशक, ALLEN कोटा)

‘भारत को भारत ही बोला जाए’, यह प्रकल्प देशवासियों को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का अभियान है। सम्पूर्ण विश्व मे केवल हमारा देश ही ऐसा है जिसे कई नामों से जाना जाता है। कोई हिन्दुस्तान कहता है तो कोई इंडिया बोलता है। हर नाम के साथ देश के प्रति द्रष्टिकोण और पहचान बदल जाती है।

अतः एक राष्ट्र-एक नाम की संकल्पना से ‘मैं भारत हूं’ अभियान की संरचना की गई है। देशवासियों को जागृत किया जा रहा है कि किसी से भी मिलें तो ‘‘जय भारत’’ कहकर अभिवादन करें। यह परिवर्तन की एक छोटी कड़ी है लेकिन आपको अपने इस अभिवादन पर गौरव अवश्य होगा।

‘‘मैं भारत हूं’’ फाउण्डेशन के माध्यम से हमारा सतत प्रयास है कि अधिक से अधिक देशवासियों को इस संदेश से जोड़ा जाए और भारत को केवल भारत ही बोला जाए। साथ ही सभी जनप्रतिनिधियों से भी यह मांग की जा रही है कि देश की सबसे बड़ी पंचायत संसद में एक ऐसा प्रस्ताव पास किया जाए, जिसमें भारत को केवल भारत ही बोला जाए, एक राष्ट्र-एक नाम का ध्येय हो।

इंडिया, हिन्दुस्तान नहीं, सिर्फ भारत ही बोला जाए। हमे पूर्ण विश्वास है कि हम शीघ्र ही अपने लक्ष्य तक पहुंचेंगे। आप सभी से भी पुनः निवेदन है कि एक राष्ट्र-एक नाम की भावना से जुड़कर भारत को भारत ही बोलें। जय भारत!


नाम का अनुवाद सम्भव नहीं
निशा लढ्ढा (राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष, मैं भारत हूँ फाउण्डेशन)

निशा लढ्ढा

भारत और इंडिया क्या ये हमारे देश के दो नाम हैं? हमारे देश को अंग्रेजों ने आजादी के पहले भारत से इंडिया कर दिया था जबकि हजारों सालों से हमारे देश का नाम ‘भारत’ ही था। आजादी के बाद हमारे देश को 2 नामों से पुकारा जाने लगा, एक तो पुरातन भारत, दूसरा अंग्रेजों का दिया गया नाम इंडिया!

संपूर्ण भारतवर्ष में आज एक अभियान चल रहा है कि देश का नाम ए क ही होना चाहिए, जबकि देश की काफी जनता हमारे देश को हिंदी में भारत और अंग्रेजी में इंडिया कहती है। हम सभी जानते भी हैं कि नाम का अनुवाद नहीं होता। आज हम भारतीय चाहते हैं कि जब भारत मां अपनी आजादी के 75 साल पूरे करे तो देश का नाम एक ही हो।

भारत की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने प्रस्तुत एक याचिका पर 3 जून 2020 को एक ऐतिहासिक फैसला दिया है कि यदि आप भारतीय संविधान से इंडिया को विलुप्त करवाना चाहते हैं तो आप सभी को संबंधित केंद्रीय मंत्रालय से संपर्क करना चाहिए। तो आइए हम सब मिलकर भारत को केवल ‘भारत’ बनाएं।


इंडिया गुलामी का नाम
विजय कुमार जैन (अध्यक्ष ‘‘मैं भारत हूँ फाउण्डेशन’’)

विजय कुमार जैन

हजारों सालों से हमारे देश का नाम ‘भारत वर्ष’ यानी अखंड भारत रहा है, जिसके क्रमवार कई टुकड़े हुए। अंग्रेज 17वीं शताब्दी में जब ‘भारत’ आए तो मात्र व्यापार करने के लिए आए थे और ईस्ट इंडिया कंपनी का निर्माण किया था। धीरे-धीरे करके हमारे ‘भारत’ पर कब्जा कर लिया और करीबन 247 सालों तक ‘भारत’ पर शासन किया।

हमारे पूर्वज स्वतंत्रता सेनानियों ने ‘भारत मां’ की जय बोल कर अपना बलिदान दिया, कई स्वतंत्रता सेनानी फांसी तक चढ़ गए, पर अपनी जिद नहीं छोड़ी। सन् 1947 में ‘भारत मां’ को गुलामी की जंजीरों से मुक्त करवाया गया।

सन 1950 में जब संविधान बना तो भारतीय संविधान के अनुच्छेद क्रमांक एक पर INDIA THAT IS BHARAT लिख दिया गया, जो कि मेरे हिसाब से गलत है। मैं अंतरराष्ट्रीय संस्था ‘मैं भारत फाउंडेशन’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाते यह कह सकता हूं कि मेरे देश का नाम एक ही ‘भारत’ रहना चाहिए, इंडिया को मैं गुलामी का नाम समझता हूं, जबकि आज हम आजाद हैं।

एक इंसान के नाम 2 नहीं होते तो हमारे देश के नाम 2 क्यों? मैं जब भी अपना उद्बोधन करता हूं ‘जय भारत’ बोलकर ही करता हूं।


भारत ही हमारी पहचान
कल्पना गगडानी (पूर्व अध्यक्ष अ.भा. माहेश्वरी महिला संगठन)

कल्पना गगडानी

हम अपने आपको भारतीय या भारतवासी कहते हैं। हमारी संस्कृति महान भारतीय संस्कृति कहलाती है। यदि हमारी संस्कृति भारतीय है हम भारतीय हैं तो हमारे देश का नाम तो भारत ही होना चाहिए ना।

सोचिए, और आगे बढ़कर इस बात को और लोगों तक बढ़ाइये, पहुंचाईये कि हमारी पहचान हमारा भारत है। इसलिए हमारे देश का नाम भी भारत ही होना चाहिए।


‘‘भारत’’ नाम गौरव का प्रतीक
अरूण मूंदड़ा, व्होस्टन (यूएसए)

अरूण मूंदड़ा

अगर सारे विश्व में कहीं भी देखें तो चाईनीज़, मेसोपोटानीय, ब्रेबर आयरलैंड, मिश्र, ग्रीस, माया, स्टिक, रोमन एम्पायर आदि सभी सभ्यताएं समाप्त हो गयी। केवल भारतीय सभ्यता ही जीवित और जीवंत है क्यों? क्योंकि भारत एक भू-भाग मात्र नही, अपितु जीवंत भारतीय सभ्यता है।

जो भारत या भारतीय सभ्यता विश्व के किसी काल में किसी युद्ध से भी मिटी नहीं, उसे इंडिया नाम दे कर भारत गौरव नाम हटाने का, उसे भुलाने या उसे लुप्त करने का, उसे मिटाने का षड़यंत्र क्यों? तो यह देश एक जमीन का टुकड़ा मात्र ना होकर भारतीय सभ्यता का जीता जागता प्रतीक है। अतः ईस्ट इंडिया कंपनी जो भारत पर साम्राज्य करने आयी और उन ब्रिटिशर्स अंग्रेजों ने जाते हुवे भारत को ईस्ट इंडिया कंपनी का छद्म नाम और पहचान इंडिया थोपने की कोशिश की।

इसी तरह इंडिया नाम थोप कर भी भारतीय मूल के लोगों को उनकी संस्कृति और संस्कारों तथा देश के हज़ारों वर्ष पुराने ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान, आध्यात्म, पहचान से तोड़ने के षड्यंत्र का हिस्सा है, जिससे भारतीय अपनी हज़ारों वर्ष से पनपी पली उन्नत सभ्यता पर न गर्व कर सकें और ना ही अनुसरण।

आज सारा विश्व भारत की विश्व कल्याण की भावना को नमन कर रहा है। भारतीय सभ्यता ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम’’ की उच्च विचार धारा को प्रकाशित करती है और भारत के उच्च मूल्यों को गौरान्वित करती है। अतः भारत का नाम भारत ही होना चाहिए इंडिया नही।

संविधान लेखक भी कहता है INDIA THAT IS भारत यानी उस लेखक को भी मालूम है कि असली नाम तो भारत ही है। तभी वह उस भारत नाम का संदर्भ दे रहा है, तो जब असली नाम भारत है तो हम नकली छद्म षड़यंत्र कारक कारणों से दिए नाम इंडिया को क्यों अपनायें। आईये हम अपनी गौरवमयी माँ भारत माता को भारत नाम से ही पुकार कर गौरवान्वित करें।

उत्तरं यत समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणं। वर्षं तद भारतं नाम भारती यत्र संततिः। अर्थात जो समुद्र के उत्तर एवं हिमालय के दक्षिण में स्थित है उसका नाम भारत तथा यहाँ के लोग भारतीय हैं’। ये हमारे देश भारत कि महिमा तथा गौरव है।


दो नाम क्यों, भारत ही पर्याप्त
रवि जैन, मुंबई

रवि जैन

बिल्कुल सही है कि एक देश के 2 नाम नहीं हो सकते। पूरी दुनिया में कहीं भी किसी देश के 2 नाम नहीं हैं तो हमारे भारत देश के नाम दो क्यों हों? अगर दो भी हैं तो उसमें से एक नाम भारत जो वर्षों से या युगो से था, इस नाम को मिटाने की कोशिश की गई।

इसकी हस्ती को मिटाने की कोशिश की गई लेकिन यह उनके मिटाने से भी नहीं मिट सका ना मिट सकेगा। जो अंग्रेजों ने इंडिया नाम हम पर थोपा है, यानी वो ब्रांड देने की कोशिश की है, इस ब्रांड को हम को मिटाना चाहिए। हमारे संविधान से उस शब्द को मिटाना चाहिए जो ‘‘इंडिया’’ हमारी गुलामी का प्रतीक है।

हमारे देश का जो मूल नाम है भारत- भारत ही रहना चाहिए। तो हम सब भारत को भारत ही बोलने का प्रयास करें, अपने-अपने नित्य के व्यवहार में भी, ‘‘आई लव यू इंडिया’’ की जगह ‘‘आई लव यू भारत’’ होना चाहिये। जय भारत जय भारती।


सिर्फ ‘‘भारत’’ नाम ही उचित
पी.एम. भारद्वाज (राष्ट्रीय सलाहकार, मैं भारत हूँ फाउण्डेशन)

पी.एम. भारद्वाज

हमारा देश भारत वर्षों पूर्व में सोने की चिड़िया एवं विश्व गुरु था। भारत विश्व में एकमात्र देश है जो कि आध्यात्मिकता के अलावा भौतिकता में भी बहुत ऊपर था। हमारी धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहर बहुत ही अद्भुत थी।

हमारे देशवासी पुराने समय में योग्यता के साथ-साथ बहुत हुनर भी रखते थे। हमारी देश की शिक्षा एवं विधि प्रणाली बहुत ही मजबूत थी। अंग्रेजों ने षड्यंत्र कर हमारे देश को तहस-नहस करने के साथ-साथ देश का नाम इंडिया रख दिया जो कि किसी भी तरह से उचित नहीं है।

किसी भी देश या व्यक्ति के नाम दो नहीं होते। हिंदी और इंग्लिश में नाम एक ही होता है एवं हमारे देश को भारत के नाम से पुकारा जाना चाहिए। मुझे पूर्ण विश्वास है कि हमारा देश भारत पुनः विश्व गुरु और सोने की चिड़िया बनेगा।


‘भारत’ में सम्पूर्ण संस्कृति समाहित है
सुमिता मूंधड़ा, मालेगांव

सुमिता मूंधड़ा

विश्व में मात्र भारत देश के ही अंग्रेजी और हिंदी में दो अलग-अलग नाम हैं। भारत का ‘इंडिया’ नाम तो अंग्रेजों की देन है। इंडिया नाम सुनने पर अंग्रेजों की हुकूमत और भारतीयों का गुलामी वाला बुरा वक्त याद आ जाता है। अतः हमें इस नाम को अंग्रेजों के समान ही इतिहास में दफन कर देना चाहिए।

भारत को भारत बोलने पर अपनत्व का जो आभास होता है, वह इंडिया बोलने पर कतई नहीं होता। भारत नाम के उच्चारण में देशप्रेम का अहसास होता है। ‘भारत’ एक सम्मानजनक और अर्थपूर्ण शब्द है। ‘‘भारत’’ नाम के साथ ही हम सभी नागरिकों को भारतीय संबोधित किया जाता है, जो सुनने में बेहद कर्णप्रिय और गौरवपूर्ण लगता है।

यदि भारत को इंडिया कहा जाए तो उस आधार पर हम इंडियन कहलाते हैं, इंडियन शब्द बिल्कुल भी सुहावना नहीं लगता है। सभी सरकारी और गैर सरकारी कागजातों पर भी ‘भारत’ नाम को ही मान्यता मिलनी चाहिए।

हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है, हमारे देश का नाम भी हिंदी में हो तो यह हमारी संस्कृति का परिचायक भी होगा क्योंकि ‘इंडिया’ एक अर्थहीन शब्द है और ‘भारत’ एक सम्पूर्ण संस्कृति। विश्वपटल पर हमें अपने देश का एकमेव नाम ‘भारत’ ही घोषित कर देना चाहिए।


नाम नहीं देश के प्रति सम्मान महत्वपूर्ण
मीनू नवनीत भट्टड़, नागपुर

नाम नहीं देश के प्रति सम्मान महत्वपूर्ण
मीनू नवनीत भट्टड़, नागपुर

प्रथम जैन तीर्थंकर ऋषभदेव जी के पुत्र भरत के नाम पर हमारे देश का नाम भारत पड़ा था। इसमें ‘भा’ शब्द का अर्थ प्रकाश व ‘रत’ का अर्थ युक्त होता है अर्थात भारत शब्द का अर्थ प्रकाश युक्त होता है।

सिंधु नदी का दूसरा नाम इंडस रिवर भी है जिसके नाम पर विदेशियों द्वारा हमारे देश का नाम इंडिया रखा गया क्योंकि उन्हें हिंदुस्तान (उस समय भारत का प्रचलित नाम) शब्द उच्चारित करने में कठिनाई होती थी। बाद में भारत के संविधान ने इंडिया नाम को भी स्वीकार कर लिया और भारत के लोग देश को ‘इंडिया’ और स्वयं को ‘इंडियन’ कहने लगे। अब एक ही देश के दो नाम। क्या यह उचित है?

मेरा व्यक्तिगत तौर पर यह मानना है कि यदि देश का नाम सिर्फ इंडिया होता तो हम इस पर विवाद कर सकते थे। किंतु हमारे संविधान में पहले ही हमारे देश का नाम भारत कहा गया है। तब इस बहस का क्या औचित्य? ‘नाम में क्या रखा है’ विलियम शेक्सपियर की इन शब्दों को ध्यान में रखते हुए देश का नाम ‘भारत’ हो या ‘इंडिया’ हम स्वयं को ‘भारतीय’ कहें या ‘इंडियन’ यह बात ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है।

इससे ज्यादा महत्वपूर्ण है देश के प्रति अमूल्य प्रेम व सम्मान का वह भाव (जो दुर्भाग्यवश लुप्त को रहा है) जो हमारे देश के हर नागरिक के मन में सदैव स्थित व स्थिर रहना चाहिए। ताकि हम चाहें ‘भारतीय’ हो या ‘इंडियन’ हमारे द्वारा किया हर कर्म हमारे देश को विकास के पथ पर लेकर जाने के लिए सहायक हो।


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