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आयोजन में इवेंट मैनेजमेंट करवाना कितना उचित- अनुचित?

पिछले एक दशक से इवेंट मैनेजर यानि कार्यक्रम प्रबंधक रखने का चलन बढ़ता जा रहा है। शादी ब्याह के रीति रिवाज हो अथवा मुंडन संस्कार, गोद भराई हो अथवा जलवा, आज की स्थिति में तो तीज त्योहार भी इवेंट मैनेजर के बिना आयोजित नहीं किए जाते। आम मान्यता यह है कि इवेंट मैनेजर की नियुक्ति करने से मेजबान अपनी जिम्मेदारियों से काफी हद तक मुक्त हो जाते हैं। कार्यक्रम के आरंभ से अंत तक मेहमानों की तरह मेजबान भी मेहमान बनकर कार्यक्रम का लुत्फ उठा पाते हैं। वहीं दूसरे पक्ष की सोच है कि अनावश्यक रूप से इवेंट मैनेजर रख कार्यक्रम का आयोजन करना अपनी क्षमता को कम आंकना, अपनी जिम्मेदारियों से भागना तथा पैसे की बर्बादी है। यदि समर्थ हैं तो इवेन्ट मैनेजर रखने के स्थान पर पारिवारिक रूप से ही कार्यक्रम की जिम्मेदारी निभाते हुए ऐसे आयोजन किये जाऐं, तो इसमें पारिवारिक समरसता बढ़ती है और सभी को अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करने का अवसर मिलता है।

ऐसे में यह विचारणीय हो गया है कि वर्तमान दौर में कार्यक्रम प्रबंधक (इवेंट मैनेजर) रखा जाना उचित है अथवा अनुचित?आइये जानें इस स्तम्भ की प्रभारी सुमिता मूंदड़ा से उनके तथा समाज के प्रबुद्धजनों के विचार।


कहीं जरूरत है तो कहीं दिखावा
सुमिता मूंधड़ा, मालेगांव

sumita mundra

आजकल कार्यक्रम सामाजिक हो अथवा पारिवारिक, कार्यक्रम प्रबंधक नियुक्त करने का चलन दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा ह। एकल परिवार में पारिवारिक सदस्यों की संख्या सीमित होने के कारण कार्यक्रम को इवेंट मैनेजर के सुपुर्द करना पड़ता है तो कहीं-कहीं परिवार के सदस्य अगर कार्यक्रम में काम करने की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार न हों तो भी इवेंट मैनेजर को नियुक्त करना पड़ता है।

धनाढ्य परिवारों में कार्यक्रम प्रबंधक नियुक्त करना एक स्टेट्स सिंबल की तरह भी देखा जाने लगा है। देखा गया है कि सामाजिक और पारिवारिक रीति रिवाजों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर जब आधुनिकता का जामा पहनाकर इवेंट मैनेजर उसको प्रस्तुत करता है तो नई पीढ़ी भी बड़े जोश के साथ उसमें प्रतिभाग करती है, अन्यथा नई पीढ़ी को पुराने रीति-रिवाज ढकोसले से लगते है। यह बात भी सच है कि इवेंट मैनेजर के अनुसार कार्यक्रम को आगे बढ़ाने से मध्यमवर्गीय मेजबान का आर्थिक खर्च बढ़ जाता है।

व्यस्त दिनचर्या में किसी भी पारिवारिक सदस्य और दोस्तों को कामों में हाथ बंटाने का समय नहीं है ना ही कोई काम को करने की जिम्मेदारी लेना चाहता है, इसलिए भी कार्यक्रम प्रबंधक नियुक्त करना पड़ता है क्योंकि हर कोई आवभगत चाहता है। बहुत ही गिने चुने लोग ही काम करने के लिए, मेजबान का हाथ बंटाने के लिए, जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार होते हैं। मेजबान का सबकी आकांक्षाओं पर खरा उतरना एक चुनौती सा बन जाता है।

सभी मेहमानों को अच्छी से अच्छी आवभगत और मेहमाननवाजी की उम्मीद रहती है, जो कि एक अकेले मेजबान परिवार से संभव नहीं हो पाता है। कार्यक्रम के पहले और बाद में भी अनगिनत हजारों कार्य मेजबान पर होते हैं। इवेंट मैनेजर रखकर मेजबान काफी हद तक कार्यक्रम की सफलता के प्रति निश्चिंत हो जाता है, इसलिए जरूरत और समय की मांग हो तो इवेंट मैनेजमेंट की तरफ रुख करना अनुचित नहीं पर अपनी आर्थिक स्थिति देखकर ही कदम बढ़ाएं।


वर्तमान दौर में अत्यंत आवश्यक
श्रैया सनी सोड़ानी, उज्जैन

आज के दौर में इवेंट मैनेजमेंट रखना चाहिए या नहीं तो मेरी तो यही राय है कि यह आज की पारिवारिक, सामाजिक व्यवस्था में अत्यंत आवश्यक हो गया है। आज के दौर में जहां अधिकतर लोग एकल परिवार में रहते हैं और उस परिवार के बच्चे भी जॉब के कारण दूसरे शहर में रहते हैं।

ऐसे में ज्यादा दिन की छुट्टी ना मिल पाने के कारण सिर्फ प्रोग्राम वाले दिन ही छुट्टी होती है। पति-पत्नी दोनों सर्विस करते हैं। अतः प्रोग्राम की तैयारी करना संभव ही नहीं होता। ऐसे में इवेंट मैनेजमेंट की मदद से किसी भी प्रोग्राम को कम समय में प्लान कर सकते हैं। समय और भाग दौड़ की बचत होती है।

ऑनलाइन ऑर्डर के इस युग में हर कोई समय की बचत चाहता है और साथ ही कुछ नया भी चाहता है। ऐसे में इवेंट मैनेजमेंट की मदद से हम हमारे कार्यक्रम में नयापन ला सकते हैं। यह आज के युग की अनिवार्य आवश्यकता है दिखावा नहीं, क्योंकि शगुन के पल यादगार होते हैं।

यदि हम हमारे ही दम पर कार्यक्रम करें तो सब जानते हैं कि घर के कार्यक्रम में नया पहनना, खाना सभी छूट जाते हैं और कार्यों के बोझ तले दबे इंसान अपने कार्यक्रम का आनंद कैसे ले सकते हैं? इवेंट मैनेजमेंट की मदद से हम हमारे घर आए मेहमानों का भी अच्छे से स्वागत कर सकते हैं। हम खुद भी अपने शगुन के पलों को यादगार बना सकते हैं।


अंदाज वही ट्रेंड नया
पूनम नंदकिशोर जाजू, महाराष्ट्र

आज से कुछ समय पहले जैसे ही घर में किसी कार्यक्रम की तारीख तय होती थी तो भवन बुक करना है और रसोईया बुक करना है इन दो बातों पर ज्यादा ध्यान दिया जाता था, लेकिन आज के इस दौर में इवेंट मैनेजर की हवाएं हर जगह लहराती हुई नजर आ रही है। यह माइंडसेट जिनके यहां शादी है उनका तो है ही लेकिन जो मेहमान बन कर आते हैं, उनका भी पूरी तरह हो चुका है।

पहले रीति-रिवाज से काम चलते थे आज रीति-रिवाज को लेकर मौज मस्ती से काम चल रहे हैं। इवेंट ऑर्गेनाइज करना यह गलत नहीं है लेकिन हर इवेंट के लिए इवेंट मैनेजर अपॉइंट करना यह कुछ हद तक पैसों की फिजूलखर्ची है, ऐसा मेरा मत है। इवेंट ऑर्गेनाइज् जरूर कीजिए लेकिन उस इवेंट में अपनी-अपनी क्षमता अनुसार घर वाले ही आगे आकर इवेंट मैनेज करते हैं, तो अपनी कलाओं को विकसित करने का एक सुनहरा मौका मिलता है और काफी हद तक हम अपने धन को फिजूल खर्ची से बचा सकते हैं और अपनी प्रतिभाओं को भी उभार सकते हैं।

आज का जो दौर है, वह ट्रेंड इस शब्द के आगे पीछे घूम रहा है। लेकिन कुछ हद तक हम सबकी यह जिम्मेदारी है कि इसी ट्रेंड को कुछ अपनी प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने हेतु कुछ लोग आगे आकर इस तरह के प्रोग्राम शुरू करें ताकि यह भी एक ट्रेंड बन जाए और समाज में कुछ अच्छा और नया दौर शुरू हो।


वर्तमान दौर में तो उचित
शाश्वत मानधन्या, बैंगलोर

अर्थशास्त्र में एक अवधारणा है- ‘अवसर लागत’ जिसका मतलब होता है, किसी चीज को करने के लिए कितने अवसरों का हमें त्याग करना होता है। आजकल की भागदौड़ वाली जिंदगी में पैसे से ज्यादा मोल समय का है। आज वर्किंग डे पर छुट्टी लेना आसान नहीं, व्यवसाय को भी छोड़ना मुश्किल हो गया है। आज के समय में पति-पत्नी दोनों सर्विस करते हैं।

परिवार में काम करने वाले सदस्य भी आजकल मेट्रो शहरों में रहते हैं। ऐसे में मेजबान कार्यक्रम का काम करें या सबसे मेल-मिलाप करें? इसी कारण मेरी राय में वर्तमान दौर में इवेंट मैनेजमेंट करना उचित है। मेरा मानना है कि हमें अपनी सोच को आज की समस्याओं और अपनी क्षमताओं को देखकर बदलना चाहिए। यह सच बात है कि दस साल पहले तक सामाजिक कार्यक्रम मेल मिलाप का जरिया थे और सभी लोग काम में हाथ बंटाते थे, पर अब जमाना बदल गया है।

आज शहरी जीवन पद्धति का चलन है, अपने पड़ोस में कौन रह रहा है, इसका भी पता नहीं होता। एकल परिवार हो गए, ऐसी स्थिति में इवेंट्स मैनेजमेंट आवश्यक है। इससे अनावश्यक कामों से ध्यान हटाकर अपना समय आयोजनों के महत्वपूर्ण पलो में लगाकर कार्यक्रम का और अधिक आनंद लेंगे। समय के हिसाब से हमें अपने आयोजनों को करने के तरीकों में बदलाव करना आवश्यक है।


जरूरत अनुसार ही निर्णय उचित
नीरा मल्ल, पुरूलिया

इवेंट मैनेजमेंट का प्रचलन हाल के कुछ वर्षो में चरम सीमा तक पहुंच गया है। सभी एक दूसरे के देखा देखी में इसी चाल में चल रहे हैं। चाहे उनके घर परिवार में काम संभालने वाले लोग हों या ना हों। दिखावे के कारण छोटे से छोटे कार्यक्रम को भी इवेंट को दे दिया जाता है। जबकि बड़े से बड़ा कार्य भी तुरंत हो जाता है, जब अपने साथ हों।

इस बात से नकारा नहीं जा सकता कि इवेंट मैनेजमेंट वालों के लिए भी यह रोजगार है, उनका यह प्रोफेशन है। जिनके घर कोई हाथ बंटाने वाला ना हो या किसी को काम बोलने में संकोच आता हो, सामर्थ्यवान हो इन लोगों की जरुरत इवेंट वालों से पूरा करवाते है। लेकिन यह हमारी समझदारी होनी चाहिए कि जरूरत हो उसी में इवेंट मैनेजमेंट को देना चाहिए। कार्य को संभालने हेतु परिवार और घनिष्ट मित्र बंधु पड़ोसी को भी सहायता के लिए बोल सकते हैं। इससे प्रेम, सामंजस्य व व्यवहारिकता पनपती है, साथ ही अपनत्व भी बढ़ता है।

अगर आप पहले से ही अच्छे से बारीकी से प्लानिंग कर लें तो कार्य बहुत सुचारू रूप से व्यवस्थित और सुंदर ढंग से होगा। फायदे भी अनेक होंगे। जैसे हमारे परिवार में एकता बढ़ेगी। इससे हमारे साथ रहने वालों का टैलेंट भी दिखता है। फिजूल खर्च होने वाले रूपये भी बचेंगे। जिससे हम दूसरी जरूरत पूरी कर सकें या किसी की मदद कर पाऐंगे।


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