ज्योतिष विज्ञान पर विश्वास- सार्थक अथवा निरर्थक?

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वर्तमान दौर में ज्योतिष विज्ञान को एक वर्ग अंधविश्वास भी मान बैठा है तो दूसरा वर्ग इसे हमारा सनातन ज्ञान कहता है, जो हमारे ऋषि मुनियों की घोर तपस्या की देन है। ऐसे में यह विचारणीय हो गया है कि हम सोचें कि ज्योतिष विज्ञान पर विश्वास करना वास्तव में सार्थक है अथवा निरर्थक?

ऐसा करके हम कर्महीन बन रहे हैं अथवा हम भाग्य का साथ प्राप्त कर रहे हैं? आज के तकनीकी से भरे इस युग में हमारा यह पुरातन ज्ञान हमारे लिये आखिर कितना उचित है?

क्या यह वर्तमान दौर में भी हमारे लिये उपयोगी सिद्ध हो सकता है अथवा सिर्फ अंधविश्वास ही बन जाएगा? आइये जानें इस स्तम्भ की प्रभारी सुमिता मूंदड़ा से उनके तथा समाज के प्रबुद्धजनों के विचार।


जीवन में ज्योतिष आटे में नमक जितना ही श्रेयस्कर
सुमिता मूंधड़ा, मालेगांव

ज्योतिष विज्ञान अथाह है, जितनी अधिक गहराई में जाएंगे, उतना ही अधिक ज्ञान पाएंगे। पढ़े-लिखे होकर भी हम यह मानते हैं कि पृथ्वी से दूर होते हुए भी नवग्रह हमारे जीवन पर अपना प्रभाव छोड़ते हैं और हमारे जीवन में उतार-चढ़ाव नवग्रहों की ही देन है। ज्योतिषशास्त्र पर अंधविश्वास करते हुए अपना जीवन भाग्य के भरोसे छोड़ना सर्वथा अनुचित है।

ज्योतिष विज्ञान
सुमिता मूंधड़ा

‘अजगर करे ना चाकरी पंक्षी करे ना काम’ कहावत को मनमस्तिष्क से निकाल दें और ‘कर्म प्रधान विश्व रचि राखा जो जस करहि सो तस फल चाखा’ कहावत को जीवन में सफलता का सूत्र बनाएं। हमारा भाग्य जन्म से ही हमारे साथ जुड़ा होता है। उच्च कोटि का ज्योतिषाचार्य हमारी जन्मकुंडली देखकर हमारा पूरा जीवन खोलकर रख सकता है। पर उनकी भी कुछ मर्यादाएं/उसूल होते हैं। एक हद तक ही वह जातक की मदद कर सकते हैं।

अच्छे और सच्चे ज्योतिष जातक की कुंडली देखकर कुछ हद तक पूजा-पाठ-दान-पुण्य द्वारा उसके जीवन में आनेवाले कष्टों और परेशानियों का प्रभाव कम करने की क्षमता रखते हैं। कभी भी अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए ज्ञान का दुरूपयोग नहीं करना चाहिए अन्यथा इसका दुष्प्रभाव अहित कर सकता है।

हमें ज्योतिषशास्त्र की मदद अच्छे और विशिष्ट कार्यों के लिए लेनी चाहिए। जैसे देश के उत्थान और प्रगति में, शादी-ब्याह में कुंडली मिलान, शुभ-अशुभ मुहूर्त निर्धारण, धार्मिक कार्य इत्यादि। आटे में नमक जितना ही ज्योतिष और कुंडली को अपने जीवन में शामिल करें। हम अपने भाग्य को सिर्फ अपने कर्मों द्वारा बदल सकते हैं।


वर्तमान दौर में भी यह महत्वपूर्ण
पूजा नबीरा, नागपुर

ज्योतिष विज्ञान और तकनीकी ज्ञान इनकी कोई स्पर्धा नहीं, ना ही कोई तुलना ही की जा सकती है। ज्योतिष एक गहरा रहस्य है जिसकी गणना के लिये भी वैज्ञानिक तथ्य और साक्ष्य की जानकारी आवश्यक है।

ज्योतिष विज्ञान
पूजा नबीरा

ज्योतिष एक शास्त्र है भाग्य जानने के लिये, तो इसकी एक शाखा को गणना के लिये प्रयोग किया जाता है। सत्य है, कर्म ही जीवन पथ निर्धारित करते हैं किन्तु कर्म कितने भी सुनियोजित क्यों ना हों कभी -कभी जीवन का कोई एक पल भी जीवन के सहज़ बहाव को बदल देता है। किसी लाटरी का खुल जाना टिकिट लेने के कर्म से निर्धारित नहीं होता बस निमित्त बन जाता है। आज की उन्नत तकनीक ने सोच, संस्कृति और संस्कार तीनो को एक वृहद एवम विस्तारित धरातल दिया है।

अनेक विडंबनाये टूटी हैं किन्तु कर्म प्रधान सोच के साथ भी नियति को पराजित करना संभव नहीं हुआ। अनेक स्थानों पर हम खुद को नियति के समक्ष बौना पाते हैं और अंत में यही आस्था के साथ स्वीकार भी करते हैं। तकनीकी विज्ञान जितना भी अधिक उन्नत हो जाये उसको आत्मसात करने के बाद भी इस जगत के आध्यात्मिक चिंतन में मूल रूप से कर्मों के जन्मजन्मांतर फल को भाग्य का निर्माता माना गया है।

अतः दोनों ही एक दूसरे के विरोधी नहीं पूरक हैं विज्ञान की दो शाखाएँ तकनीकी ज्ञान आज की प्रमुख आवश्यकता और सुख शांती हेतु अध्यात्म की गहराई का ज्ञान देती दूसरी शाखा दोनों में संतुलन की आवश्यकता है विरोध की नहीं।


कुछ हद तक विश्वास ठीक लेकिन अंधविश्वास न करें
सतीश लाखोटिया, नागपुर

मानव सदियों से किसी न किसी माध्यम से ईश्वर व ऋषि मुनियों के बारे में सुनते आ रहा है। आकाशवाणी की भविष्यवाणी, ऋषि मुनियों द्वारा की गई भविष्यवाणी आदि के कई प्रसंग हमारे जेहन में विराजमान है। यह निर्विवाद सत्य है कि अपने बारे में जानने की चाह हर इंसान के मन के द्वार पर कहीं न कहीं दस्तक देती है। इसी वजह से नामी गिरामी पंडितो के साथ अज्ञानी छोटे-मोटे पंडित भी अपनी दुकानदारी जमा कर बैठे हैं।

ज्योतिष विज्ञान
सतीश लाखोटिया

शादी ब्याह में कुंडली का मिलान इन दिनो फैशन या जरुरत या संबंधो को टालने का माध्यम, यह एक विचारणीय प्रश्न। इस आधुनिक युग में मन को सांत्वना देने के लिए ज्योतिष पर विश्वास करना कोई गलत बात नहीं, पर अंधविश्वास करके लाखों रुपया खर्च करना, पंडितों के घर भरना, अपने घर की सुख-शांति खत्म करना बिल्कुल भी तर्कसंगत नही, यह मेरा मानना है।

कई महान नामी-गिरामी स्वयंभू भविष्यवक्ता पंडित अपना ही भविष्य न पढने के कारण जेल की शोभा बढा रहे हैं, यह हम सभी जानते है। कहना बस इतना ही है कि ज्योतिष के पास जाने के बाद भी अपने विवेक से हर पहलू पर सोचने के बाद ही किसी भी काम को अंजाम दें।

यह भी अटल सत्य है कि हर इंसान अपने होने वाले अनुभव के आधार पर ही किसी भी बात को स्वीकारता एंव नकारता है। यही है मेरी नजरो में सार्थकता एंव निरर्थकता।


ज्योतिषशास्त्र विज्ञान का अभिन्न अंग
महेश कुमार मारू, मालेगांव

विज्ञान शब्द का एक अर्थ है, विशुद्ध (परिष्कृत) ज्ञान! या ज्ञान की पराकाष्ठा। अंधविश्वास तब होता है, जब हमें व्यक्तिगत रूप से उस विषय का ज्ञान नही होता और हम अपने से अधिक जानकार पर यह समझ कर विश्वास कर लेते हैं कि वह जो कह रहा है वह पूर्ण सत्य है।

महेश कुमार मारू

ज्योतषिशास्त्र का अर्थ ही है ज्योति अर्थात प्रकाश की ओर ले जाना है। ज्योतिषशास्त्र विज्ञान का अभिन्न अंग है। इसमें काल गणना के जो सूत्र हैं, वे आज तक विफल नहीं हुए हैं। आज भी अगले सौ वर्षों में कब और कितने समय पर कौनसा ग्रहण, तिथि, त्यौंहार उत्सव आदि आने वाले हैं, उनकी अचूक जानकारी उपलब्ध हैं।

हमारे यहाँ समय और राजनीतिक बदलाओं के कारण भले ही यह विज्ञान अब अध्ययन का भाग नहीं रह गया हो, परंतु आज विश्व की सभी खगोलीय और अन्य प्रयोगशालाओं का ज्योतिषशास्त्र अभिन्न अंग है।

अत: इस विज्ञान को अंधविश्वास या अकर्मण्य बनाने वाला मानना सर्वथा अनुचित है। यह शुद्धरूप से गणितीय गणना है, जो हमें ब्रह्माण्ड में स्थित हमारे सौरमण्डल के विभिन्न ग्रहों की गति का हमारे ऊपर किस प्रकार का प्रभाव डालने वाला है, की सही-सही जानकारी उपलब्ध करता है। यह विषय इतना विशाल है कि, कुछ शब्दों में लिखना असम्भव है।


ज्योतिष मूलतः संकेतों का विज्ञान
भारती काल्या, कोटा

ज्योतिष विज्ञान सार्थक या निरर्थक का उत्तर देना समाज के किसी भी वर्ग के लिए आसान नहीं है। ज्योतिष विज्ञान अंधविश्वास नहीं सदियों का विश्वास है। प्रामाणिक विज्ञान और सशक्त शास्त्र है। ज्योतिष विद्या पर नकारात्मकता या प्रश्नचिन्ह लगाना भारतीय संस्कृति पर आघात है। भारतीय ऋषियों की यह अनोखी देन ज्योतिष शास्त्र है। इसका अपना गौरवमयी यशस्वी इतिहास है।

भारती काल्या

हस्तरेखा और ज्योतिष शास्त्र का अलग अलग नजरिया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ही ग्रहों की स्थितियों का पता लगाया जाता है। ज्योतिष विज्ञान पर विश्वास सार्थक है पर इस पर अंधविश्वास करना निरर्थक है। ज्योतिष विज्ञान पर अंधविश्वास करके हम कर्म करने के प्रति उदासीन ना बने रहें। कर्म यदि होगा हमारा उत्तम तो हमारे भाग्य की रेखाएं भी बदल जाएगी। प्रारब्ध का जो लिखा हुआ होना होगा उसे ज्योतिष विज्ञान या अंधविश्वास का सहारा लेकर टालने की कोशिश ना करें।

कभी-कभी ज्योतिष विज्ञान झूठा साबित हो जाता है पर इसका अर्थ यह होता है कि ज्योतिषी गलत हो सकते हैं, ज्योतिष विज्ञान नहीं। ज्योतिष विज्ञान को सार्थक मानते हुए ही आज भी बच्चे के जन्म लेते ही सबसे पहले जन्मपत्री बनवाई जाती है।

परंपरावादी और अंधविश्वासी विचारधारा के लोग किसी भी मुसीबत में फंसते ही समाज से छुपकर ज्योतिषियों की शरण में जाते हैं। ऐसे लोग ज्योतिष विज्ञान को न तो अंधविश्वास मानते हैं और न विज्ञान। पर हर छोटी-बड़ी समस्याओं के लिए ज्योतिष विज्ञान पर आश्रित रहना निरर्थक है। ज्योतिष विज्ञान मूलतः संकेतों का विज्ञान है।



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