अपनी लेखनी व ओजस्वी वाणी दोनों से पाठकों को नई दिशा दे रही हैं, इंदौर निवासी नम्रता कचोलिया । उनके विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित आलेख अपने आपमें प्रेरणा स्त्रोत हैं।
नम्रता कचोलिया काँटाफोड़ ज़िला देवास के प्रसिद्ध उद्योगपति गिरधर-साधना बियाणी की सुपुत्री है और इंदौर माहेश्वरी समाज के प्रतिष्ठित कचोलिया परिवार के वरिष्ठ मुकेश-संगीता कचोलिया की बहू व रोहन कचोलिया की धर्मपत्नी हैं।
बचपन विशेष कर ग्रामीण क्षेत्र में बीतने के कारण जमीन से जुड़े रहने की भावना स्वाभाविक ही उन्हें प्राप्त हुई है। गाँव में दसवीं तक हिंदी माध्यम स्कूल से पढ़ने के बावजूद अपनी आगे की सम्पूर्ण पढ़ाई को श्रीमती कचोलिया ने अंग्रेज़ी माध्यम से पूरा किया है। ग्रैजूएशन भारत की विख्यात महिला यूनिवर्सिटी वनस्थली विद्यापीठ से किया और एमबीए की पढ़ाई गुरूग्राम आईआईएलएम इंस्टिट्यूट से पूर्ण की।
आपका सामाजिक कार्यों के प्रति रुझान युवावस्था से ही रहा है और उस ओर कदम बढ़ाते हुए वर्ष 2014 में कृष्ण मोहन सामाजिक सेवा संस्थान की स्थापना की। वहीं दूसरी ओर अपनी बिज़नेस कम्पनी शांति ओवरसीज़ इंडिया लिमिटेड में एक्सपोर्ट डिविजन में कार्य करके अपने पति का सहयोग करते हुए पारिवारिक जिम्मेदारियों का भी निर्वाह कर रही हैं।
संचार माध्यमों से विचारों की क्रांति
वर्तमान में श्रीमती कचोलिया लेखन के क्षेत्र में अपने आपको स्थापित कर माहेश्वरी समाज का नाम रोशन कर रही हैं। वे देश के प्रतिष्ठत न्यूज़पेपर्स के लिए लिखती रहती हैं। उनके लिखे लेख दैनिक भास्कर, नईदुनिया, अमरउजाला, गुडईवनिंग जैसे प्रतिष्ठित न्यूज़ पेपर्स में काफी पसंद किए जाते है।
उनके लेख विशेषकर तात्कालिक सामयिक विषय को लेकर तथा पारिवारिक, सामाजिक व धार्मिक सकारात्मकता को ध्यान में रखते हुए भी लिखे गए हैं। वह हर रोज़ अपने सोशल प्लैटफॉर्म फेसबुक पेज, इंस्टाग्राम, ट्वीटर पर एक प्रेरणादायक सुविचार भी डालती हैं।
प्रेरक वक्ता के रूप में भी पहचान
श्रीमती कचोलिया अपनी पहचान एक मोटिवेशनल स्पीकर के तौर पर भी बना रही हैं। इसके लिए उन्होंने लॉकडाउन के दौरान और उससे पहले भी विभिन्न संस्थाओ में जाकर महिलाओं और बच्चों को मोटिवेट किया है।
इसी कारण अभी हाल ही में उन्हें ‘‘स्माईल चैरिटी’’ संस्था द्वारा एक उभरती ओजस्वी लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सम्मानित किया गया। वहाँ भी उन्होंने अपनी मोटिवेशनल स्पीच द्वारा लोगों को प्रभावित किया।
आप अपनी उपलब्धियों के लिए विशेष तौर पर अपने ससुरजी मुकेश कचोलिया को अपना प्रेरणा स्रोत मानती हैं। श्रीमती कचोलिया निरंतर एक अच्छे लेखक और वक्ता के रूप में उभरने के लिये प्रयासरत हैं और नए आयाम बना रही हैं।






