पर्व पॉसिटिविटी का- दीपावली

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जेब टटोल कर प्लानिंग कीजिये, चार दोस्तों के साथ घर पर मस्ती कीजिये, पति पत्नी बच्चे मिल कर घर में ही खेल का माहौल बनाइये। थियेटर और पापकॉर्न न सही, टीवी चलाओ, अंधेरा कमरा करो, मूंगफली और ठंडा पानी भी मजा दे सकता है। जंगल में मंगल हो सकता है तो फांके संग ठहाके क्यों नहीं हो सकते?


आजकल मीडिया में एक विज्ञापन हर जगह दिख रहा है, ‘‘अर्बन कंपनी- सफाई करायें दीवाली की।’’ अर्थात दीवाली पर्व का नाम आते ही जो विचार दिलों-दिमाग में कौंधता है नये कपड़े, मिठाई, पटाखे, पूजा, पर इन सबसे पहले – ‘सफाई’। घर हो, दुकान हो, ऑफिस हो, जो रोज साफ किये जाते हैं वो भी दीवाली पर विशेष सफाई द्वारा जम के चमकाये जाते हैं, छांटे जाते हैं, सजाये जाते हैं और मान्यता यह भी है कि ऐसा करने से लक्ष्मीजी प्रसन्न होती है और उस स्वच्छ घर में निवास करने आती हैं। लक्ष्मी अर्थात समृद्धि, संपन्नता, सफलता।

आप सभी ने की होगी हर साल दीवाली पर सफाई। क्या करते हैं, इसमें आप? रोज का कूढ़ा करकट तो आप रोज सुबह झाड़ के हटा ही देते हैं परंतु दीवाली की सफाई में जब दरवाजे, अलमारियां, पेटियां, फाइलें खोलते हैं तो आप खुद ही बहुत सारे सामान को अनावश्यक समझ फेंकने लगते हैं, जिसे और कोई नहीं आप ही घर लाये थे या किसी ने आपको दिया था, आपने रख लिया और अब आपको ही वह अनुपयोगी और बेकार ही नहीं लगता वह आपके लिये कचरा बन जाता है। दीवाली पर उसे घर से बाहर फेंक आप खुश हो जाते हैं, आपको घर हल्का-हल्का लगता है और फिर आपके पास इतनी जगह निकल जाती है कि आप कुछ नया, कुछ जरूरी और कुछ मनपसंद सामान ला सकते हैं।

भारतीय गृह विज्ञान में दीवाली पर वार्षिक सफाई बताई गई है। बरसात के बाद धूप की अहमियत दर्शाई गई है और मासिक, साप्ताहिक और दैनिक सफाई का भी अपना महत्व दर्शाया गया है।

घर की सफाई पूरी होने पर तन की सफाई हेतु ‘‘रूप चौदस’’ का प्रावधान है। भांति-भांति के तेल उबटन से तन को सुगंधित किया जाता रहा है। तन ही नहीं धन को भी धन तेरस के दिन बाहर निकाल, तिजोरी खाली कर पुन: साफ कर सजाकर धन रखा जाता है और उसमें बढ़ोत्तरी भी की जाती है। घर, तन, धन सबकी सफाई जरूरी है, तो मन की?त्यौंहार का ही नहीं जीवन का उत्साह भी बहुत बढ़ जायेगा। जीवन सुंदर सज जायेगा, उबटन की महक सा महक जायेगा, खुशियों के पटाखे फूटने लगेंगे और आतिशबाजी से दिलो दिमाग रोशन हो जायेगा। यदि हम मन की सफाई करते रहें- दैनिक, साप्ताहिक, मासिक, वार्षिक।


दैनिक सफाई मन की

दांतों के ब्रश, और घर की झाड़ू की तरह दिल दिमाग पर भी फटका मारिये। आज का दिन कैसे सजाना है, समय का संयोजन कैसे करना है कि नियमित कार्य अर्थात घर, स्कूल, आफिस के अलावा मन को प्रफुल्लित करने के लिये आज नया क्या, दो-दो, पाँच-पाँच मिनिट की खुशियां और मस्ती कैसे निकलेगी। थकान में आराम और एकरूपता में रसिकता कैसे लाना है। सोच बदलते ही सफलता सहज गोद में आ बैठेगी।

हाँ, जैसे रात को बचे दूध, खाने पर नजर डालते हैं फाइलों की निपटा निपटी पर नजर डालते हैं और आप युवा, बच्चे बची हुई पॉकेटमनी पर नजर डालते हैं। वैसे ही दिन भर की खुशी और गम पर भी एक नजर दौड़ा लो। कल की प्लानिंग और बढ़िया होगी।


साप्ताहिक सफाई- मन की

सुबह और शाम रोज की खुशियां तो आप निकालने में लग ही गये हैं पर समय थोड़ा कम पड़ जाता है पर वीकएण्ड पर तो समय है न। हफ्ते भर की एकरूपता थोड़ी उदासीनता ला ही देती है, बैटरी डाउन हो गई है, तो काम कैसे चलेगा? सेल तो बदलने पड़ेंगे, या रीचार्ज करना पड़ेगा। तो बस निकल पड़िये सैर सपाटे को, जरूरी नहीं कि खूब पैसा खर्च करने से बैटरी फास्ट रीजार्च होती है।

जेब टटोल कर प्लानिंग कीजिये, चार दोस्तों के साथ घर पर मस्ती कीजिये, पति पत्नी बच्चे मिल कर घर में ही खेल का माहौल बनाइये। थियेटर और पापकॉर्न न सही, टीवी चलाओ, अंधेरा कमरा करो, मूंगफली और ठंडा पानी भी मजा दे सकता है। जंगल में मंगल हो सकता है तो फांके संग ठहाके क्यों नहीं हो सकते?

सच होगा, सब होगा, सोच की पॉजिटिविटी, सब साकार करेंगी।


मासिक सफाई- मन की

काम का उत्साह और मन मस्तिष्क की मोज मस्ती में कब निकल गया पता ही नहीं चला। नहीं, नहीं, अब जरा रूकिये, कुछ पता लगाइये, आत्मविश्लेषण से दिल-दिमाग की सफाई भी अब हर माह के अंत में जरूरी है। मासिक बजट में आय-व्यय का लेखा जोखा देखना, अपने स्वास्थ्य के लिये ही नहीं, सबके लिये फायदेमंद है। इस माह में आंतरिक ऊर्जा कितनी बड़ी, क्या कुछ और किया जा सकता है? क्या नहीं करना था? किसने अच्छा, किसने बुरा किया? हमारा सही गलत क्या हुआ? ईमानदारी से सोचिये और आगे बढ़िये।


वार्षिक साफ सफाई

दीवाली की सफाई, रंग, रोगन, रोशनी सबसे जरूरी है, दिल और दिमाग का हर कोना एक एक करके खाली कीजिये। हर विचार को हर कार्य को, हर रिश्ते को एक-एक कर हाथ में उठाइये, जरूरी नहीं तो फेंक दीजिये और जरूरी है, तो झाड़-पोछ कर दिल और दिमाग के उपयुक्त कोने में सजा लीजिये। कुछ टूट-फूट हो गई हो तो मरम्मत कर लीजिये। कहीं से आया, अनचाहा कुछ हो तो या तो उसे लौटा दीजिये या बेवजह समझ दिलो दिमाग से निकाल दीजिये, जो जगह खाली हुई है, उसे कुछ त्यौहार के अवसर पर नये आकर्षक विचारों से भर दो और कुछ जगह खाली छोड़ दो, साल भर जब जहां कुछ अच्छा मिलेगा, तब ले लेंगे।

सकारात्मक विचारों के साथ सहजता, सफलता, सरलता, समरसता, सद्भाव की सकारात्मक ऊर्जा देने वाले पर्व की सहस्र शुभकामनाएं।


Sri Maheshwari Times
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