माहेश्वरी परिवार की बेटियाँ अपनी प्रतिभा के मामले में कभी पीछे नहीं रहीं, यह यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा के घोषित परिणाम ने फिर सिद्ध कर दिखाया। इसमें अलीराजपुर (म.प्र.) की बेटी राधिका गुप्ता ने 18वीं रेंक के साथ आईएएस हेतु अंतिम रूप से चयनित होकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा ही दिया।
गत दिनों संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा का बहुप्रतिक्षित परिणाम घोषित हुआ। इसकी घोषित मैरिट लिस्ट की जानकारी जब समाज में पहुँची तो खुशी की लहर फैल गई। समाज के कई संगठन व संस्थाऐं गत कुछ वर्षों से यह कोशिश कर रहे हैं कि माहेश्वरी परिवार के युवक युवती अधिक से अधिक संख्या प्रशासनिक सेवा में जाऐं। इस परिणाम ने यह सिद्ध कर दिखाया कि सही मार्गदर्शन मिले तो समाज में प्रतिभा की कमी नहीं है। इस परीक्षा के अंतिम परिणाम में अजीराजपुर की बेटी राधिका गुप्ता (बाहेती) ने 18वीं रेंक के साथ आईएएस हेतु चयनित होने में सफलता प्राप्त की।
व्यवसायी परिवार में लिया जन्म
राधिका का जन्म अलीराजपुर के किराना व्यवसायी पिता प्रहलाद व गृहणी माता चंदा गुप्ता की सुपुत्री के रूप में हुआ। परिवार परम्परागत रूप से व्यवसायी था, लेकिन राधिका का रूझान पढ़ाई के प्रति विशेष रूप से रहा। इसी का नतीजा रहा कि अलीराजपुर जैसे आदिवासी क्षेत्र में अपनी स्कूली पढ़ाई के दौरान भी राधिका हमेशा अव्वल ही रही। स्कूली शिक्षा के पश्चात इंदौर के एक प्रतिष्ठित कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक. किया। इसके बाद प्रतिष्ठित कम्पनी होंडा में इंजीनियर के रूप में सेवा दी लेकिन इसी बीच उनके मन में प्रशासनिक सेवा का सपना इस तरह उमड़ने लगा कि जीवन की दिशा ही बदल दी।
ऐसे बढ़े सफलता की ओर कदम
कहते है ‘ना जहां चाह है वहां राह है!’ ठीक इसी तरह उस समय महाराष्ट्र प्रदेश माहेश्वरी सभा प्रशासनिक सेवा मार्गदर्शन समिति के सहयोग से होशंगाबाद हरदा जिला माहेश्वरी सभा द्वारा पिपरिया में आयोजित प्रशासनिक सेवा मार्गदर्शन शिविर मे पधारे राधिका के मामाजी धीरज मूंदडा के सुझाव पर उन्होने समिति प्रमुख किशनप्रसाद दरक से संपर्क किया। दरकजी ने न केवल उसे यथोचित मार्गदर्शन किया बल्कि उसे पूरा करने के लिये दिल्ली में जयचंदलाल करवा माहेश्वरी होस्टल मे निवास की व्यवस्था के साथ ही समय समय पर प्रोत्साहित भी किया।
असफलता से हार न मानी
राधिका बिटिया ने मेहनत एवं लगन से गत सत्र में प्रथम बार मे ही प्रिलिम व फाइनल परीक्षा उत्तीर्ण कर ली; किन्तु इंटरव्यू मे प्रतीक्षा सूची मे रहना पड़ा। प्रतीक्षा सूची से भारतीय रेल कार्मिक सेवा मे (फर्स्ट क्लास अफसर) चयन हो गया। लेकिन उन्होंने अपने प्रयास जारी रखे। अपने लक्ष्य की प्राप्ति लिए ट्रैनिंग करते हुए द्वितीय प्रयास मे पुनः प्रिलिम, फाइनल और इंटरव्यू के बाद केंद्रीय लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा इस बार घोषित अंतिम परिणामों में अखिल भारतीय स्तर पर 18 वी रैंक प्राप्त कर परिवार एवं समाज को गौरवांवित किया है।
जीवन का लक्ष्य बनाऐं- राधिका
अपनी इस सफलता से उत्साहित राधिका अपनी इस सफलता को माता-पिता के साथ ही दादीजी श्रीमती मनोरमा गुप्ता के आशीर्वाद प्रोत्साहन का परिणाम मानती हैं। उसके साथ ही वे इसका श्रेय समाज द्वारा संचालित योजनाओं को देते हुए कहती हैं कि इसमें किशनप्रसादजी दरक, निलेश करवा नई दिल्ली, ललितजी माहेश्वरी तथा गौरीशंकर गुप्ता का विशेष सहयोग रहा। श्री गुप्ता ने मुझे मॉक इंटरव्यूह द्वारा साक्षात्कार की तैयारी करवाई, जिससे मुझमें विशेष आत्मविश्वास उत्पन्न हुआ। समाज के युवाओं को संदेश देती हुई वे कहती हैं कि जीवन में कुछ भी असंभव नहीं, बस हम जो करना चाहते हैं, उसके लिये लक्ष्य बनाना जरूरी है। महिलाओं को तो सिविल सेवा के क्षेत्र में विशेष रूप से आगे आना ही चाहिये।




