सत्यनारायण नुवाल

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उद्योग श्रेणी में ही विस्फोटक उद्योग जैसे विशिष्ट क्षेत्र के लिये ‘‘माहेश्वरी ऑफ द ईयर’’ अवार्ड दिया जा रहा है, सोलर ग्रुप के चेयरमैन 63 वर्षीय सत्यनारायण नुवाल को। उनका उद्योग समूह वर्तमान में विस्फोटकों में देश में शीर्ष व विश्व में टॉप-10 उद्योगों में शामिल है। विस्फोटक के व्यवसाय के बावजूद आध्यात्म और मानवीय संवेदनाओं से भरपूर है, श्री नुवाल का मन। आईये जाने कैसे मात्र 10 वर्ष में भी नुवाल ने छुआ यह सफलता का अकल्पनीय शिखर।

नुवाल देश ही नहीं बल्कि विश्व के विस्फोटक व्यवसाय जगत में एक प्रतिष्ठित नाम हैं। यह ईश्वरीय कृपा श्री नुवाल की सूझबूझ और दृढ़संकल्प का नतीजा ही माना जा सकता है कि मात्र 19 वर्ष पूर्व शून्य ही नहीं बल्कि उधारी से एक वर्कशॉप की लघु उद्योग की स्थापना करने वाला उनका विस्फोटक उद्योग ‘‘सोलर ग्रुप’’ के रूप में सम्पूर्ण विश्व के लिये एक अत्यंत जाना माना नाम है।

वर्तमान में वे विस्फोटक एवं इससे संबंधित उपकरणों के देश के सबसे बड़े निर्माता बन चुके हैं और दुनिया के शीर्ष 10 विस्फोटक निर्माताओं में से एक हैं। आज भारत में 20 स्थानों पर सोलर ग्रुप की निर्माण इकाईयां स्थापित हो चुकी हैं। इसके अलावा भारत के बाहर कंपनी की तीन निर्माण इकाइयां जाम्बिया, नाइजीरिया और तुर्की में भी हैं। वर्तमान में इस समूह में कुल 3000 कर्मचारी कार्यरत हैं। दुनिया का सबसे बड़ा कार्टिज एक्सप्लोसिव्स एंड डेटोनेटिंग फ्यूज निर्माण संयंत्र सोलर ग्रुप का ही है।

दुनिया के 40 से अधिक देशों को निर्यात:

यह कंपनी आज हर तरह के उपयोगी विस्फोटक उत्पादों व उपकरणों का निर्माण कर रही है। देश के एक-तिहाई विस्फोटक एवं संबंधित उपकरणों के बाजार पर इसका वर्चस्व कायम है। कंपनी के उत्पाद दुनिया के 40 देशों में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2014-15 में सोलर ग्रुप ने कुल 1463 करोड़ रुपए का कारोबार किया।

कंपनी के शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज एवं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में भी सूचीबद्ध हैं। इस समय कंपनी की कुल बाजार पूंजी 6000 करोड़ रुपए से अधिक है। इनके उत्पादों को देखकर ही अंदाजा लगता है कि वे बाजार की नब्ज को अच्छी तरह जानते हैं। यही कारण है कि लगभग हर क्षेत्र के उद्योग उनके ग्राहक हैं।

अब देश को आयुध में आत्म निर्भर बनाने की तैयारी: 

अब यह समूह रक्षा उत्पादनों में भी प्रवेश कर चुका है। इसमें नागपुर के निकट, मिसाइल एवं रॉकेट में इस्तेमाल किए जाने वाले प्रॉपेलैंट, वॉरहेड विस्फोटक एवं वॉरहेड निर्माण संयंत्र शामिल हैं। रक्षा अनुसंधान एवं विकास केन्द्र (डीआरडीओ) द्वारा विकसित पिनॉक,आकाश,अग्नि एवं ब्रहोस मिसाइलों में यह उत्पाद इस्तेमाल किए जाते है।

वॉरहेड विस्फोटकों एवं प्रॉपेलैंट के दोनों संयंत्रों को पहले ही अधिकृत किया जा चुका है। ये दोनों संयंत्र किसी भी सार्वजनिक अथवा निजी क्षेत्र में अपनी तरह के पहले संयंत्र हैं। श्री नुवाल का सपना है कि वे देश के अग्रणी रक्षा उत्पादक बनें जिससे हथियारों और गोलाबारूद के आयात को कम किया जा सके। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मामले में हमारी दूसरे देशों पर निर्भरता भी कम हो।

अत्यंत सीमित शिक्षा ही मिली:

श्री नुवाल का जन्म भीलवाड़ा जिला राजस्थान की एक सुसंस्कृत परिवार में सन् 1952 में हुआ। पिताजी पटवारी थे, जो बाद में राजस्व निरीक्षक बन गये। प्राथमिक शिक्षा हुरड़ा तहसील के एक ग्रामीण विद्यालय से प्राप्त की, फिर गुलाबपुरा तहसील से हाईस्कूल तक ही पढ़ जाऐ। इसके बाद उन्हें वर्ष 1969 में गायत्री शक्तिपीठ परिवार के संस्थापक गुरूदेव पं. रामचन्द्र शर्मा आचार्य के मथुरा स्थित आश्रम में सेवा व संस्कार ग्रहण करने पहुँचा दिया।

यहाँ रहते हुए उन्होंने हवन व पूजा आदि की शास्त्रोक्त पद्धतियाँ सीखी। यहाँ से मिले संस्कार उनके जीवन में रच बस गये। जीवन तो संस्कारित व आध्यात्म से ओतप्रोत हो गया लेकिन उनके परम्परागत शिक्षा, हाईस्कूल से आगे नहीं बढ़ पाई। हाँ, यहाँ रहते आश्रम के कौशल विकास केन्द्र से लिये प्रशिक्षण के कारण प्रिटिंग प्रेस व इंक निर्माण उद्योग आदि जैसे व्यवसायों के सपने अंगड़ाई लेने लगे थे।

सपने तो कई बार बिखरे पर हौंसला नहीं:

18 वर्षीय श्री नुवाल वर्ष 1970 में लघु उद्योग का सपना लिये मथुरा से घर पहॅुंचे और छोटे से ‘‘इंक निर्माण उद्योग’’ की शुरूआत की। बहुत प्रयासों के बावजूद भी यह असफल हो गया और उद्योग बंद करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने केमिकल व्यवसाय में कदम रखा और वर्ष 1975-1976 तक इसमें ही जुटे रहे, पर असफलता हाथ लगी।

इसके बाद पार्टनशिप में ट्रेक्टर कम्प्रेशर निर्माण के व्यवसाय में कदम रखा लेकिन वह भी अधिकसमय तक नहीं चला इसके बाद 20 वर्ष की अवस्था में श्री नुवाल अच्छे व्यवसायिक अवसरों की आशा में चंद्रपूर के निकट स्थित बाल्लारशा आ गये।

यहाँ उनके एक निकटतम रिश्तेदार एक कम्पनी में माईन मैनेजर के रूप में कार्य कर रहे थे। यहाँ आकर अपनी समस्त जमापूंजी से किसी तरह सेना का एक पुराना ट्रक 3 हजार रुपये में खरीदा और इसे भाड़े पर चलाते हुए ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में कदम रखा।

बदकिस्मती ने यहाँ भी पीछा नहीं छोड़ा। इस ट्रक का एक्सीडेंट हो गया और इसमें न सिर्फ उनकी समस्त जमापूंजी ही डूबी बल्कि उल्टे 2 हजार रुपये का कर्ज भी हो गया। इन विकट स्थितियों के बावजूद श्री नुवाल के हौंसले कायम थे और वे व्यवसाय के नये अवसर तलाशते रहे।

इस तरह रखा विस्फोटक की दुनिया में कदम:

जब उन्हें असफलता पर असफलता मिल रही तो ऐसे में किस्मत से उन्हें चंद्रपूर में एक वरिष्ठ शख्स मिले, अब्दुल सत्तार अल्लाह भाई। उनके पास विस्फोटक निर्माण का लायसेंस था और साथ ही निर्माण के लिये अनुपयोगी सुरक्षित स्थान भी। ट्रेक्टर कम्प्रेशर व्यवसाय ने उन्हें विस्फोटक से सम्बंधित आंशिक अनुभव दे रखा था।

बस उन्होंने किराये पर मैग्जीन (सुरक्षित स्थान) लिया और श्री अब्दुल की सहायता से विस्फोटक निर्माण की दुनिया में कदम रख दिया। इसके बाद श्री नुवाल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 1996 में नागुपर के समीप विधिवत एक लघु उद्योग की स्थापना की मात्र। इन 19 वर्ष में उन्होंने जो सफलता प्राप्त की वह कल्पना से परे है।

धर्म व आध्यात्म से ओतप्रोत:

इस सफलतम व्यवसाय की बागडोर संभालने के साथ-साथ नुवाल परिवार में धार्मिक एवं आध्यात्मिक विचार भी गहरे तक समाए हैं। इन विचारों का बीज श्री सत्यनारायण नुवाल के पिता श्री नंदनलाल नुवाल एवं छोटे भाई श्री कैलाशचंद्र नुवाल ने बोया था, जिन्होंने अपने जीवनकाल का अधिकांश हिस्सा गायत्री परिवार ट्रस्ट को समर्पित कर दिया।

श्री नुवाल गायत्री परिवार ट्रस्ट के ट्रस्टी हैं, साथ ही वे मारवाड़ी फाउंडेशन के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैंं। इसके अलावा कॉरपोरेट तथा सामाजिक जिम्मेदारियां निभाने वाली विभिन्न संस्थाओं को वे दिल खोलकर दान भी देते हैं। श्री नुवाल विदर्भ इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की कार्यकारी समिति के उपाध्यक्ष भी हैं।


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