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योग नृत्य के सौगातदाता- गोपाल मूंदड़ा

लगभग 4 वर्ष पूर्व योग के क्षेत्र में ‘योग नृत्य’ नाम ही नहीं था लेकिन वर्तमान में यह योग की एक विधा के रूप में हर किसी की जुबान पर चढ़कर बोल रहा है। आपको यह जानकर गर्व होगा कि योग की नयी विधा के रूप में योगनृत्य की सौगात देने का श्रेय भी माहेश्वरी समाज के ही चंद्रपुर (महा.) निवासी योग गुरू गोपाल मूंदड़ा को जाता है।


भगवान शिव को विश्व का महानतम् नृत्यकार के साथ ही महायोगी भी माना गया है। इन दोनों विशेषताओं का एकात्म यह संकेत देता है कि दोनों का परस्पर विशिष्ट सम्बंध है। बस इसी सोच ने चंद्रपूर निवासी योग गुरु गोपाल मूंदड़ा को प्रेरित किया और उनसे ‘‘योग नृत्य’’ की शुरूआत करवा दी।

वर्तमान में विदर्भ के नागपुर के हर पार्क में संगीत की धुन पर ‘‘योग नृत्य’’ झूमते लोग नजर आ जाऐंगे। यूट्यूब पर भी इस योग के विडियो बड़ी संख्या में मौजूद हैं, जो हर किसी के प्रशिक्षण के लिये पर्याप्त हैं। प्रत्यक्ष रूप से नि:शुल्क प्रशिक्षण के लिये भी उनकी टीम आमंत्रण पर देश के किसी भी शहर में जाती है और प्रशिक्षक भी तैयार करती है।


खेल से रहा सदा जुड़ाव

श्री मूंदडा का जन्म 21 नवम्बर 1968 को अमरावती में श्री गंगाबिशन व श्रीमती गीता मूंदड़ा के यहां हुआ था। उनका परिवार मूल रूप से ग्राम मुंदयाल जिला नागौर (राज.) का मूल निवासी रहा हैं। लगभग 150 वर्ष पूर्व उनके पूर्वज अमरावती आ गये थे।

श्री मूंदड़ा मात्र कक्षा 10वीं तक शिक्षा ग्रहण करके ही प्रापर्टी व्यवसाय से सम्बद्ध हो गये थे। बचपन से कबड्डी के अच्छे खिलाड़ी रहे व जिला से विदर्भ स्तर तक खेले तथा कोच के रूप में भी सेवा दी। बस इसी शौक ने स्वास्थ्य जागरूकता के कारण उन्हें सिर्फ व्यवसाय जगत की ओर कभी भी सीमित नहीं होने दिया।


फिर बढ़े योग की ओर कदम

उनका खिलाड़ी मन वर्ष 2007 में उन्हें योग की ओर ले गया तथा वे पतंजलि योग पीठ की संस्था ‘‘भारत स्वाभिमान’’ से सम्बद्ध हो गये।

वर्ष 2009 से 2017 तक लगातार इस संस्था के जिला प्रभारी रहे तथा शहर से लेकर गाँवों तक बड़ी संख्या में लोगों को इससे सम्बद्ध कर अन्य सेवा गतिविधियों के साथ ही पतंजलि के ‘‘योग प्रशिक्षण शिविरों’’ का आयोजन भी किया। वर्ष 2017 में संस्था में बढ़ते दिखावे व अनावश्यक व्यस्तता के कारण उन्होंने त्यागपत्र देकर जिम्मेदारी से मुक्ति प्राप्त कर ली।


ऐसे हुई योग नृत्य की शुरूआत

श्री मूंदड़ा ने योग नृत्य की शुरूआत वर्ष 2017 में की। श्री मूंदड़ा इसकी शुरूआत की कहानी सुनाते हुए बताते हैं कि एक दिन मैं समाज की संगीत संध्या के बाद बच्चों का सामूहिक डांस देख रहा था, सभी बच्चे और बड़े इस सामूहिक डांस का खूब आनंद ले रहे थे और थकने के बावजूद भी डांस करना बंद नहीं कर रहे थे।

गोपाल मूंदड़ा

इस डांस को देखकर मेरे दिमाग में एक युक्ति सूझी कि क्यों न इसे योग से जोड़ दिया जाए और संगीत के माध्यम से प्रतिभागियों को नृत्य द्वारा योग की शिक्षा दी जाए। मैंने यह प्रस्ताव मेरे साथियों के सामने रखा और उन्होंने इसे स्वीकार करते हुए मुझे प्रोत्साहन दिया।

बस फिर क्या था मैंने साथियों के माध्यम से आधे घंटे का एक मॉडल बनाया और धीरे-धीरे उसे शहर के विभिन्न बगीचे और योग शिविरों में प्रस्तुत किया। बहुत अल्प समय में ही लोग इससे जुड़ गए और यह एक कारवां बन गया।


पूरे देश में संस्था के केंद्र

श्री गोपाल मूंदड़ा ने वर्ष 2017 में संस्था ‘‘योग नृत्य परिवार’’ की स्थापना की। देखते ही देखते यह नृत्य पूरे भारत में मशहूर हो गया। हर शहर, हर नगर, हर गांव में नृत्य के माध्यम से लोग अपने शरीर का ध्यान रखते हैं और कई रोगों से मुक्त हो रहे हैं।

गोपाल मूंदड़ा

आज करीब-करीब इसके 1664 केंद्र भारत में चल रहे हैं। विदेशों में भी इसकी गूंज धीरे-धीरे हो रही है। यह नृत्य सभी केंद्रों पर नि:शुल्क चल रहा है। यूट्यूब चैनल पर भी इसकी गूंज बहुत जबरदस्त है।

इसके अलावा श्री मूंदड़ा ने कई रक्तदान शिविरों का भी आयोजन किया है। कोरोना काल में भी योग नृत्य के माध्यम से आम जनता की सेवा में तत्परता से काम कर रहे हैं।


क्या है योग नृत्य

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श्री मूंदड़ा द्वारा प्रस्तुत इस ‘‘योगा नृत्य’’ में न सिर्फ कई प्रकार के योगा बल्कि स्वीमिंग, मॉर्निंग वॉक, झाड़ लगाना, हास्य योग आदि जैसी कई क्रियाऐं भी नृत्य के साथ शामिल रहती हैं। लगभग 30 मिनट के एक सत्र में वे इसके बीच स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियाँ भी देते रहते हैं।

यह सब मधुर संगीत की धुनों पर होता है। नृत्य संगीत से सम्बद्ध होने से न सिर्फ वयोवृद्ध बल्कि युवा वर्ग भी बड़ी संख्या में इससे सम्बद्ध हो रहे हैं। कई स्कूल कॉलेजों में भी उनके शिविर आयोजित हो चुके हैं। इसे युवा वर्ग फीटनेस से जोड़कर देखता है, वहीं वयोवृद्ध स्वस्थ रहने का माध्यम।


कई बीमारियों से मुक्ति

श्री गोपाल मूंदड़ा अपने अनुभव के आधार पर बताते हैं कि इसकी सबसे बड़ी विशेषता उलटे चलना भी है, जिससे नवीन ऊर्जा की प्राप्ति होती है। इसकी विभिन्न मुद्राओं के कारण मोटापा व मधुमेह जैसी बीमारियों के इलाज में तो यह रामबाण सिद्ध हो ही रहा है, साथ ही हड्डियों से सम्बंधित विभिन्न रोग व जोड़ों के दर्द आदि से भी मुक्ति देता है।

गोपाल मूंदड़ा

कोरोना काल में इम्युनिटी वृद्धि में भी योग नृत्य ने अहम भूमिका निभाई। सामान्यत: योग नृत्य से जुड़े किसी भी सदस्य के साथ इस दौरान कोई अनहोनी नहीं हुई। स्वयं श्री मूंदड़ा इसके द्वारा कई स्वास्थ्य समस्याओं से मुक्त हो चुके हैं।

वर्तमान में श्री मूंदड़ा की धर्मपत्नी राधिका, पुत्र श्रवण व शिवम सभी उनके इसमें प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सहयोगी बने हुए हैं। श्रीमती मूंदड़ा समाजसेवा अंतर्गत माहेश्वरी महिला मंडल चंद्रपूर की सचिव हैं, वहीं श्री मूंदड़ा भी माहेश्वरी युवा संगठन के जिला प्रभारी रह चुके हैं।


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