उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश- उमेशचंद्र माहेश्वरी

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उच्च न्यायालय के न्यायाधीश व उपलोकायुक्त जैसे अति सम्मानजनक व महत्वपूर्ण पदों पर सेवा दे चुके महू निवासी उमेशचंद्र माहेश्वरी वर्तमान में युवा पीढ़ी के लिये प्रेरक बने हुए हैं। इतना ही नहीं वे युवा वर्ग के मार्गदर्शन के साथ विभिन्न सेवा गतिविधियों में भी सतत रूप से अपना योगदान देते रहे हैं।

न्यायाधिपति उमेश चंद्र माहेश्वरी का जन्म 02 नवंबर, 1955 को मालवा क्षेत्र के लब्ध प्रतिष्ठित परिवार में श्री रामनारायण माहेश्वरी के कनिष्ठ पुत्र प्रसिद्ध अधिवक्ता एवं समाजसेवी श्री कृष्णगोपाल माहेश्वरी के पुत्र के रूप में हुआ। आपकी प्रारंभिक शिक्षा श्री माहेश्वरी विद्यालय महू एवं उच्चतर माध्यामिक शिक्षा उच्चतर माध्यामिक विद्यालय महू से संपन्न हुई।

इसके बाद शासकीय महाविद्यालय महू से वाणिज्य में स्नातक की उपाधि वर्ष 1974 में एवं वाणिज्य स्नातकोत्तर की उपाधि वर्ष 1976 में स्वाध्यायी छात्र के रूप में इंदौर विश्वविद्यालय से प्राप्त की, वहीं विधि स्नातक की परीक्षा पी.एम.बी. गुजराती महाविद्यालय इंदौर से वर्ष 1977 में उत्तीर्ण की। इसके पश्चात् अपने पिता श्री कृष्ण गोपाल माहेश्वरी के कार्यालय से उनके सहयोगी अधिवक्ता न्यायाधिपति श्री आशाराम तिवारी के सान्निध्य में विधि व्यवसाय प्रारम्भ किया।


श्री माहेश्वरी ने अपने विधि व्यवसाय में अधीनस्थ न्यायालयों से मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय तक विधि की विभिन्न शाखाओं में सफलता पूर्वक पैरवी करते हुए जन सामान्य को न्याय दिलाने में सहयोग किया। इस अवधि में लगातार दो बार अभिभाषक संघ महू के अध्यक्ष एवं हाईकोर्ट बार एसोसिएशन इंदौर के सचिव भी रहें हैं।

लगभग 27 वर्षों के लगातार विधि व्यवसाय के पश्चात 11 अक्टूबर 2004 को आपको म.प्र. उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में मनोनीत किया गया। समर्पित सेवा देते हुए 27 जून 2016 को निवृत्त होने तक विभिन्न विषयों के प्रकरणों में न्यायदान की प्रक्रिया में संलग्न रहे। 28 जून 2016 से निरन्तर 06 वर्षों तक उप-लोकायुक्त, मध्यप्रदेश के रूप में सेवाऐं दी है।


इनका परिवार पीढ़ियों से सामाजिक सरोकार, शिक्षा, जनकल्याण एवं समाज के शोषित पीड़ित वर्ग के उत्थान के लिए सदैव सक्रिय रूप से जुड़ा रहा है। उसी परम्परा को आगे बढ़ाते हुए अपने दादाजी श्री रामनारायण माहेश्वरी एवं पिता जी श्री कृष्ण गोपाल माहेश्वरी द्वारा पोषित एवं पल्लवित श्री माहेश्वरी विद्यालय महू के अध्यक्ष के रूप में वर्षों सफलता पूर्वक कार्य करते हुए उक्त संस्था को ऊंचाईयों पर स्थापित किया।

पिताजी के बाद स्वर्ग मंदिर कन्या महाविद्यालय महू शासी निकाय के अध्यक्ष के रूप में बालिकाओं के लिए शिक्षा का कुशल प्रबंधन किया एवं आर.सी.जाल विधि महाविद्यालय महू में 1987 से वर्ष 2004 तक निरंतर मानसेवी विधि व्याख्याता के रूप में शिक्षण का कार्य किया।


इसके साथ ही श्री माहेश्वरी ने राधाकृष्ण गौशाला महू के विकास के लिए कार्य समिति में रहते हुए विकास के महत्वपूर्ण कार्य किये। सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक क्षेत्र के विभिन्न कार्यक्रमों का सफलता पूर्वक आयोजन किया जिसमें परम पूज्य साध्वी ऋतम्भरा जी की सन् 1996 में महू में सम्पन्न प्रथम श्रीमद्भागवत महापुराण कथा जिसमें मुख्य यजमान आपके पिता श्री कृष्ण गोपाल माहेश्वरी एवं माता भगवती देवी माहेश्वरी थे, का आयोजन अविस्मरणीय है।

न्यायाधीश के पद पर पदस्थ होने के पूर्व तक परमशक्तिपीठ वात्सल्य आश्रम कोठी ओंकारेश्वर के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में पूज्यनीय साध्वी जी के मार्गदर्शन में समर्पण के साथ आश्रम का कार्य भी संपादित किया।


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