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पृथ्वी की संजीवनी- गेंहू के ज्वारे

कभी आपने सोचा है, हमारी सनातन संस्कृति में शक्ति की उपासना का पर्व नवरात्रि हो अथवा कोई भी धार्मिक अनुष्ठान उसमें गेहूँ के ज्वारे की विशेष रूप से पूजा क्यों होती है? इसके पीछे वैज्ञानिक कारण है। वास्तव में इन ज्वारे में वे महत्वपूर्ण पदार्थ होते हैं, जो इन्हें संजीवनी बूटी बना देते हैं।

गेहूँ के जवारे अर्थात गेहूँ के छोटे-छोटे पौधों की हरी-हरी पत्ती, जिसमें हैं शुद्ध रक्त बनाने की अद्भुत शक्ति, तभी तो इन ज्वारो के रस को ‘ग्रीन ब्लड’ कहा गया है। इसे ग्रीन ब्लड कहने का एक कारण यह भी है कि रासायनिक संरचना पर ध्यानाकर्षण किया जाए तो गेहूँ के ज्वारे के रस और मानव रुधिर दोनों का ही पी.एच. फैक्टर 7.4 ही है, जिसके कारण इसके रस का सेवन करने से इसका रक्त में अभिशोषण शीघ्र हो जाता है, जिस से रक्ताल्पता (एनीमिया) और पीलिया (जांडिस) रोगी के लिए यह ईश्वर प्रदत्त अमृत हो जाता है।

गेहूँ के ज्वारे के रस का नियमित सेवन और नाड़ी शोधन प्रणायाम से मानव शरीर की समस्त नाड़ियों का शोधन होकर मनुष्य समस्त प्रकार के रक्तविकारों से मुक्त हो जाता है। गेहूँ के ज्वारे में पर्याप्त मात्रा में क्लोरोफिल पाया जाता है जो तेजी से रक्त बनाता है इसीलिए तो इसे प्राकृतिक परमाणु की संज्ञा भी दी गयी है। गेहूँ की पत्तियों के रस में विटामिन बी,सी और ई प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।


अगर आप भयंकर बीमारी से ग्रस्त हैं, और आपको लगता हैं के ये बीमारिया आपकी जान लेकर ही छोड़ेंगी और आप दवा ले लेकर थक चुके हो। तो एक बार गेंहू के जवारे का रस जरूर आज़मायें। यह कैंसर किलर हैं, कैंसर के मरीजों को ये नियमित लेना चाहिए। यह मधुमेह के रोगियों के लिए भी वरदान है व खून की कमी को चमत्कारिक रूप से पूरा करता हैं। हृदय रोगियों गर्भिणी महिलाओं के लिए यह वरदान है। यह शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकलता हैं। अत: मोटापे के रोगियों के लिए वरदान हैं। यह शरीर की ऊर्जा को बढ़ा देता हैं, अत: खिलाड़ियों के लिए ये वरदान हैं।


गेहूँ के जवारे का रस त्वचा सम्बंधित रोगो में वरदान हैं। यह शरीर की दुर्गन्ध को भी दूर करता हैं। बुढ़ापे को रोकता हैं व वीर्य की कमी को पूरा करता हैं। इसके सेवन से कोष्ठबद्धता, एसिडिटी, गठिया, भगंदर, मधुमेह, बवासीर, खांसी, दमा, नेत्ररोग, म्यूकस, उच्च रक्तचाप, वायु विकार इत्यादि में भी अप्रत्याशित लाभ होता है। इसके रस के सेवन से अपार शारीरिक शक्ति की वृद्धि होती है तथा मूत्राशय की पथरी के लिए तो यह रामबाण ही है।


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