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सच्चियाय माताजी 

सच्चियाय माताजी – बिहानी, अटल, कांसट, करवा, चांडक, डागा, तापड़िया, परतानी, बांगड़, बिड़ला, मालू, मंत्री, भंसाली, रांधड़, राङ्गी, लखोटिया, लढ़ा, सारड़ा एवं सिकची खांप की कुल देवी है।

माताजी का मन्दिर राजस्थान में जोधपुर जिले के छोटे से कस्बे ओसियां में स्थित है। ओसियां जोधपुर से लगभग 65 किमी दूर हैं। मंदिर भूमितल से लगभग 125 फीट ऊँची पहाड़ी पर बना हुआ है। मंदिर तक पहुँचाने वाली सीढ़ियों पर नौ तोरण द्वार बने हैं जिन्हें नवदुर्गा के नामों से अलंकृत किया गया है।

मंदिर की छत बड़ी ही आकर्षक एवं मनमोहक है। ऐसी मान्यता है कि प्रतिमा पहाड़ी से प्रकट हुई थी। मुख्य शिखर पर ध्वजादण्ड के पास सोने का कलश स्थापित है जिसमें घृत भरा हुआ है। मंदिर के सामने महामंडप में हवन-कुंड बना हुआ है, ऊपर सोलह पुतलियों की छवि दिखाई पड़ रही है। मन्दिर प्रांगण में भगवान शिव का मंदिर भी बना हुआ है।

माता का मंदिर पश्चिमाभिमुख है। यहाँ यात्रियों के ठहरने के लिये धर्मशाला व अतिथिगृह बने हुए है।

संवत् 2026 वैशाखसुदी 11 को ग्रामवासियों के सहयोग से माताजी मंदिर के पुजारियों के साथ पुजारी (स्व.) जुगराजजी पुत्र श्री. सदासुखजी सेवक की देखरेख व निर्देशन में मुख्य मंदिर सहित सूर्य मंदिर, विष्णु मंदिर, गजानन्द मंदिर, महादेव मंदिर पर ध्वजादण्ड चढ़ाये गये।

इस शुभ कार्य के बाद इस मंदिर में निर्माण का कार्य आज तक बन्द नहीं हुआ।यहाँ वर्ष में दो बार नवरात्रि उत्सव मनाया जाता है। जिसमें चैत्र आसोज में कलश स्थापना के साथ ज्वारे उगाये जाते हैं। माताजी की केशर पूजा होती है। महापूजा अभिषेक होता है जिसमें दंपत्ति भक्तों को स्वयं बैठने का अवसर मिलता है।

नवरात्रि में माताजी को लगने वाले भोग:

एकम – लापसी
दूज – खाजा, मगज-खीर,रसगुल्ला, केला
तीज – मीङ्गा चावल (बीणज), अनानास
चौथ – बेसन चक्की, पपीता, खुरमाणी
पाँचम – गुड़ का हलवा,सेवक, गुलाब जामुन
षष्टम – लापसी, सेव
सातम – दाल की चक्की, अंगूर
अष्टम  – नौ प्रकार की मिठाई – खीर पूड़ी, लापसी, खाजा, मगद हलवा, नव प्रकार के फल, नव प्रकार की नमकीन का भोग लगता है।
होम अष्टमी का हवन अष्टमी को आसोज व चैत्र नवरात्रि में परंपरानुसार रात्रि 9 बजे से डेड़ बजे के मध्य होता है। मंदिर पर लाल रेशमी ध्वजा भी चढ़ाई जाती है।

आरती:

चैत्र सुदी १ से आसोज बदी अमावस्था तक सुबह ८ः३० बजे, आसोज सुदी १ से चैत्र बदी अमावस्था तक सुबह ९ बजे व शाम को सूर्यास्त के २० मिनिट बाद होती है। रात्रि में पटमंगल के बाद मंदिर रात्रि में नहीं खुलता, नवरात्रि में १० बजे तक मंदिर खुला रहता है।

वर्तमान में ओसियां सच्चियाय माता मंदिर परिसर में पुराने मंदिरों के साथ सन् १९७६ में ट्रस्ट स्थापना के बाद मुख्य श्री सच्चियाय माता मंदिर के चारों तरफ परकोटे में नवदुर्गा के नौ भव्य मंदिर पुरानी कलात्मक कलाकारी के साथ दानदाताओं द्वारा ट्रस्ट की देखरेख में बनवाए है।

कैसे पहुँचें:

ओसियां जोधपुर – जैसलमेर रेल मार्ग पर तथा जोधपुर – ओसियां – फलौदी – रामदेवरा – जैसलमेर सड़क मार्ग पर स्थित है। दिल्ली, मुम्बई तथा जयपुर से जोधपुर तक के लिये सीधे विमान सेवा उपलब्ध है। दिल्ली – जैसलमेर इन्टरसिटी ट्रेन, जोधपुर – जैसलमेर ट्रेन पैलेस ऑन द व्हील्स द्वारा भी यहाँ तक पहुँच सकते है। राईकाबाग रोडवेज स्टैण्ड से हर ३० मिनिट में ओसियां के लिये तथा पावटा चौराहे से हर ३० मिनिट में ओसियां के लिये बसें उपलब्ध है।


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