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स्वस्थ रहने का सहज माध्यम – सहज योग

योग क्या है? वास्तव में योग का अर्थ वही है जो गणित में होता है। यह शरीर की खोई ऊर्जा लौटाने का एक सशक्त माध्यम है। इसके द्वारा हम न सिर्फ स्वस्थ देह बल्कि स्वस्थ मन की प्राप्ति द्वारा मोक्ष को भी प्राप्त कर सके हैं। ऐसे ही योग में से एक है, सहज योग, जो अपने नाम के अनुरूप ही है, अत्यंत सहज।

वैसे तो अष्टांग योग में योग के सभी आयामों का समावेश हो जाता है किन्तु जो कोई योग के अन्य मार्ग से स्वस्थ, साधना या मोक्ष लाभ लेना चाहे, ले सकता है। योग के मुख्यत: छह प्रकार माने गए हैं। छह प्रकार के अलग-अलग उपप्रकार भी हैं।

इसके अलावा बहिरंग योग, मंत्र योग, कुंडलिनी योग और स्वर योग आदि योग के अनेक आयामों की चर्चा की जाती है, लेकिन मुख्यत: तो उपरोक्त छह योग ही माने गए हैं:

(१) राजयोग: यम, नियम, आसन, प्राणायम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि यह पतंजलि के राजयोग के आठ अंग हैं। इन्हें अष्टांग योग भी कहा जाता है।
(२) हठयोग: षट्कर्म, आसन, मुद्रा, प्रत्याहार, ध्यान और समाधि-ये हठयोग के सात अंग ४ हैं, लेकिन हठयोगी का जोर आसन एवं कुंडलिनी जागृति के लिए आसन, बंध, मुद्रा और प्राणायाम पर अधिक रहता है। यही क्रिया योग है।
(३) लययोग: यम, नियम, स्थूल क्रिया, सूक्ष्म क्रिया, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि। उक्त आठ लययोग के अंग हैं।
(४) ज्ञानयोग: साक्षीभाव द्वारा विशुद्ध आत्मा का ज्ञान प्राप्त करना ही ज्ञान योग है। यही ध्यान योग है।
(५) कर्मयोग: कर्म करना ही कर्म योग है। इसका उद्देश्य है कर्मों में कुशलता लाना। यही सहज योग भी है।
(६) भक्तियोग: भक्त श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्मनिवेदन रूप- इन नौ अंगों को नवधा भक्ति कहा जाता है। भक्ति अपनी रुचि, प्रकृति, साधना की योग्यतानुसार इनका चयन कर सकता है। भक्ति योगानुसार व्यक्ति सालोक्य, सामीप्य, सारूप तथा सायुज्य-मुक्ति को प्राप्त होता है, जिसे क्रमबद्ध मुक्ति कहा जाता है।

क्या है सहज योग:

सहज योग एक सरल और बहुत ही सफल योग की तकनीक है। इसे सभी लोगों को अपनाना चाहिए। जीवन जीने के लिए दो चीज, सांसें लेना व भोजन करना जरूरी होता है। एक तीसरी चीज के भी इसमें और शामिल करना होगा वह है, सहज योग। जब तक इस सहज योग को हम सांस लेना व भोजन करना जितना आवश्यक नहीं समझेंगे इसका लाभ नहीं उठा सकेंगे। इसके लिए काल, समय और स्थान का चुनाव आवश्यक है।

काल से आशय सुबह, दोपहर, सायंकाल से है। समय से तात्पर्य उस काल में किस समय व किस स्थान पर ये सभी निश्चित होना चाहिए। स्थान ऐसा हो जहां कोई डिस्टर्ब न करे, किसी प्रकार की गंध ना हो तथा शुद्ध एवं ताजा प्राकृतिक हवा हो। मेरे हिसाब से सुबह ५ से ६ का समय उत्तम होता है। स्थान अगर आपके घर की छत हो तो अति उत्तम या सबसे ऊपर की मंजिल का कमरा हो तो भी उत्तम।

कैसे करें सहज योग:

सुबह दैनिक कर्मों से निवृत होकर अपने चुने हुए स्थान पर एक विद्युत् कुचालक आसन पर, मैं तो बांस से बनी चटाई को प्राथमिकता दूंगा, बिछा लें। उस पर पद्मासन या सुखासन पर बैठ जाएं। बैठे इस प्रकार की रीड की हड्डी और जंगों के बीच ९० डिग्री का कोण बना रहे। अब आंखें बंद कर लें और नाक से सांस लेना चालू करें। सांस केवल पेट में लेनी है, सीने में नहीं। इसके लिए अपना हाथ पेट पर रखें।

जब सांस अंदर लें तो पेट फूलना चाहिए ,और हाथ ऊपर उठता दिखाई देना चाहिए और जब सांस छोड़े तो पेट पिचकना चाहिए और हाथ नीचे जाता हुआ महसूस होना चाहिए। याद रखें सांसों को केवल पेट में लेना है, सीने में नहीं। सीने में सांस भरने पर वह प्राणायाम की क्रिया हो जाएगी। ये क्रिया ५ से १५ मिनट करनी है और ये महसूस करना है कि पेट फूल रहा है या पिचक रहा है।

इन स्थितियों से न घबराएं:

याद रखें इस क्रिया में ऊर्जा पैदा होती है और आप विद्युत कुचालक आसन पर बैठे हैं। इसलिए उत्पन्न ऊर्जा पृथ्वी में नहीं जाती और शरीर में ही रहती है और शरीर को ही उसे अपने में समावेशित करना होता है।

हो सकता है, आप का शरीर उत्पन्न ऊर्जा को अपने में नहीं पचा सका तो वह आपका ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है। आपके नाक, मुंह से खून आ सकता है। आंखें लाल हो सकती हैं। अगर ये लक्षण नजर आएं तो घबराये नहीं, केवल की जाने वाली योग क्रिया का समय कम कर दें।

याद रखें शुरुआत ३ मिनट से करनी है तथा अधिकतम १५ मिनट तक ये क्रिया करनी है। जब ऊर्जा आप का शरीर पचाने लगेगा, तब आप इस क्रिया को चाहे जितनी भी देर तक कर सकेंगे। कुछ समय बाद आपको अपने शरीर में कम्पन्न महसूस होने लगेंगे।

शरीर अपने आप जरूरत के हिसाब से एक्सरसाइज करने लगेगा। आप को रोना आ सकता है। आप को हंसी आ सकती है। शरीर के जिस हिस्से में दर्द हो या कोई विकार हो उस भाग में कम्पन्न आ सकते हैं।

युवा वर्ग को कामनिवृत्ति भी हो सकती है। ये सब शरीर शुद्धि के लक्षण हैं, यानी होने दें। धीरे-धीरे आपका शरीर शुद्ध हो जाएगा। सभी दर्दों एवं विकारों से आपको मुक्ति मिल जाएगी। उसके बाद जो होगा उसे बताया नहीं जा सकता, उसे केवल महसूस ही किया जा सकता है।

– श्यामसुंदर सामरिया, मानसरोवर, जयपुर


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