तनावों से मुक्ति दिलाती- Shobha Lahoti

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जब मानवता की सेवा करने की भावना हो तो, इसमें कोई भी कमी कभी बाधक नहीं बन सकती। इसी सोच को चरितार्थ करते हुए वर्तमान दौर की तनावपूर्ण जीवन शैली के बीच तनाव से मुक्ति की राह दिखा रही हैं, ख्यात विपस्यना विशेषज्ञ विदिशा निवासी शोभा लाहोटी (Shobha Lahoti)। इतना ही नहीं वे व्यावसायिक रूप से ज्वेलरी उद्योग का भी सफलतापूर्वक संचालन कर रही हैं।

आमतौर पर महिलाऐं शिक्षा की कमी को अपने जीवन की बाधा मान अपने आपको चार दीवारी में कैद कर लेती हैं और अपनी पहचान सिर्फ इसी तक सीमित कर लेती हैं। जबकि प्रतिभा किसी परम्परागत शिक्षा की मोहताज नहीं होती। यह तो ईश्वर का दिया आशीर्वाद है, जो हर किसी में मौजूद है, बस इसे पहचानने भर की जरूरत होती है।

अपनी इसी प्रतिभा के बलबूते पर अपनी एक अलग पहचान बनाने में कामयाब हुई हैं, विदिशा निवासी सुरेश लाहोटी की धर्मपत्नी शोभा लाहोटी। उनकी पहचान एक ऐसी विपस्यना विशेषज्ञा के रूप में है, जो अभी तक हजारों लोगों को तनावमुक्ति की राह बता चुकी हैं। अपने व्यावसायिक कौशल को पंख लगाते हुए श्रीमती लाहोटी वर्तमान में गोल्ड ज्वेलरी उद्योग का भी संचालन न सिर्फ कर रही हैं, बल्कि उन्होंने अपनी बहुओं को भी इसमें अग्रसर किया है।


कर्मठ, हँसमुख और समर्पित समाजसेविका शोभा लाहोटी का जन्म 23 जून 1963 को मूर्तिजापुर (महाराष्ट्र) निवासी श्री गणेशदास भट्टड़ के यहाँ हुआ। न्यूनतम शिक्षा प्राप्त कर, समय की दरकार को ध्यान रख कर आप जीवन के अगले पड़ाव की ओर बढ़ी। आपका विवाह 17 जून 1981 को विदिशा निवासी सुरेश लाहोटी (स्टोन क्रशिंग का व्यवसाय) से हुआ और श्री नथमल लाहोटी की पुत्रवधू बन विदिशा आ गयीं।

आपने सदा एक संयुक्त परिवार को सकुशल संजोया और नारी शक्ति के इस रूप को बखूबी अंगीकार किया। आपने विपस्यना का अभ्यास कर तनाव ग्रस्त जीवन में संतुलन लाने में विशेषज्ञता हासिल की। और अनेक क्षेत्रों में मानसिक तनाव से पीड़ित रोगियों को परामर्श सेवा भी दी है। आप दिग्दर्शिका संस्था (मानसिक एवं शारीरिक विकलांग बच्चों के लिए पुनर्वास और अनुसंधान संस्था) की सक्रिय कार्यकर्ता रही हैं। आपकी आध्यात्मिक पुस्तक वाचन और बाग़बानी में भी विशेष रुचि रही है।


आपकी एक पुत्री संजना अभिषेक साबू मुंबई और एक पुत्र शान्तनु लाहोटी (स्टोन क्रशिंग का व्यवसाय) है, जिन्हें आपने उच्च शिक्षा एवं संस्कारों से सींचा। सभी विपदाओ को छोड़ एक नयी सोच और दिशा में आगे बढ़ आपने 2003 से गोल्ड (डायमंड एवं कुंदन) ज्वैलरी का उद्योग शुरू किया।

आपने अपनी पुत्रवधू निकिता लाहोटी को भी प्रोत्साहित कर इस उद्योग में अग्रसर किया। पढ़ाई का साथ ना होने पर भी आपने हर कार्य को मुस्कुराते हुए सीख कर सफलता का नया परचम लहराया। आप माहेश्वरी समाज संगठनों से भी जुड़ी और किसी पद की लालसा ना रखते हुए समाज सेवा के हर प्रकल्प में तन-मन-धन से योगदान देकर कार्य को सफल बनाया। आपने अतिथि सम्मान और नेपथ्य की बागडोर संभालने के महत्वपूर्ण कार्यों में मानक भी स्थापित किया है।

आपके इस हंसमुख और मिलनसार स्वभाव, हाथों के जायके और सदह उपलब्ध रसोई से आपको कई बार माँ अन्नपूर्णा की उपाधि से सम्मानित किया गया। आप पिछले 9 साल से राष्ट्रीय माहेश्वरी महिला संगठन के पदों पर कार्यरत हैं। आप सशक्त नारी सम्मान से भी सम्मानित हो चुकी हैं।


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